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रिजल्ट की समीक्षा:9 स्कूलों का 12वीं का रिजल्ट 40% से भी कम, प्राचार्य बोले- विषयवार शिक्षकाें की कमी का असर

मुरैना9 दिन पहले
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पहाड़गढ़ ब्लॉक के कन्हार हायर सेकंडरी स्कूल को सिर्फ एक शिक्षिका ममता उइके चला रही हैं।
  • खरगपुर भर्रांड के स्कूल का रिजल्ट जिले में सबसे खराब, 13 में से 2 छात्र ही पास हो सके
  • ऐसे कैसे सुधरेगा रिजल्ट... कन्हार के हायर सेकंडरी स्कूल में एक महिला शिक्षक के भरोसे सालभर पढ़े छात्र, कुथियाना के स्कूल में अक्टूबर तक बाढ़ पीड़ित रुके रहे

नौ सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं जिनका इस साल 12वीं का रिजल्ट 40 फीसदी से भी कम रहा है। इनमें से बानमोर के पं. नेहरू स्कूल को छोड़कर किसी भी स्कूल में 50 से ज्यादा छात्र दर्ज नहीं थे लेकिन उनकी पढ़ाई की व्यवस्था न होने से रिजल्ट बिगड़ गया। खरगपुर भर्रांड के स्कूल का परिणाम जिले में सबसे खराब महज 15.35 फीसदी ही रहा। इन स्कूलाें के प्राचार्यों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ है। 12वीं के रिजल्ट को लेकर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि सबसे खराब रिजल्ट वाले हायर सेकंडरी स्कूल खरगपुर भर्रांड नूराबाद में 13 छात्र ही थे, उनमें से मात्र 2 पास हुए हैं। 9 छात्र फेल हाे गए।

इस स्कूल के साइंस के पांच में से एक व आर्ट के 9 में से एक छात्र पास हुआ है। इस स्कूल के प्रभारी प्राचार्य सुभाष धाकड़ का कहना है कि स्कूल में दर्ज छात्र नियमित पढ़ने के लिए नहीं आए। उनको प्राइवेट घोषित करने की चेतावनी देते थे तो दादागिरी करने लगते थे। प्राचार्य के अनुसार, विषयवार शिक्षकों की कमी रिजल्ट बिगड़ने का खास कारण रहा। इधर, अंबाह से 8 किमी दूर स्थित जग्गापुरा हायर सेकंडरी स्कूल का रिजल्ट 22.45 फीसदी रहा है। इस स्कूल के 49 परीक्षार्थियों में से 11 छात्र पास हुए हैं। प्राचार्य हरगोविंद ताेमर का कहना है कि उनके स्कूल में सालभर फिजिक्स, अंग्रेजी, एग्रीकल्चर, राजनीति शास्त्र व भूगोल के व्याख्याताओं के पद खाली रहे हैं।

साइंस की 3 लैब एक छोटे से कक्ष में संचालित होती रही क्योंकि स्कूल में पर्याप्त कक्ष न होने के कारण अलग-अलग विषयों की सेपरेट क्लास नहीं लगाई जा सकीं। फिजिक्स व कैमिस्ट्री की कक्षाएं तो एक साथ लगा देते थे लेकिन बायोलॉजी के 18 छात्रों को पढ़ाने के लिए सेपरेट रूम उपलब्ध नहीं था। ऐसे में कुछ कक्षाएं तो पेड़ के नीचे भी लगाना पड़ीं। वहीं मुरैना डीईओ सुभाषचंद्र शर्मा का कहना है कि जिले के 9 स्कूलों का रिजल्ट 40 फीसदी से कम रहा है। इस संबंध में संस्था प्राचार्य से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। रिजल्ट कमजोर रहने की कारणों की समीक्षा के बाद नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

कन्हार में एक महिला शिक्षक के भराेसे पूरा स्कूल, रिजल्ट 28 फीसदी

पहाड़गढ़ ब्लॉक मुख्यालय से 22 किमी दूर कन्हार में संचालित हायर सेकंडरी स्कूल के 14 में से 4 बच्चे पास हुए हैं यानी रिजल्ट 28.57 फीसदी रहा। इस स्कूल काे नया भवन तो मिल गया लेकिन नियमित शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी। जुलाई-अगस्त में शिक्षकों के तबादलों के दौरान साइंस, मैथ व अंग्रेजी विषय के 3 शिक्षक अपना तबादला कराकर जंगल क्षेत्र के स्कूल से मुक्ति पा गए। सिर्फ एक महिला शिक्षक ममता उइके के हवाले पूरा स्कूल रहा। हालांकि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई लेकिन वे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचे।

बानमोर: प्राचार्य का तर्क- परीक्षा न होने की आस में छात्रों ने पढ़ाई नहीं की

पं. नेहरू हायर सेकंडरी स्कूल बानमोर के प्राचार्य चंद्रप्रकाश पाठक का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान अफवाह रही कि 12वीं शेष प्रश्न-पत्रों की परीक्षा नहीं हाेगी और परीक्षार्थियों को प्रमोशन देकर पास किया जाएगा। इस अफवाह के कारण परीक्षार्थियों ने तैयारी पर ध्यान नहीं दिया और रिजल्ट 29.42 फीसदी रह गया। इस स्कूल के 694 छात्रों में से 208 ही उत्तीर्ण हुए हैं।

जिले में 80 % का लक्ष्य था अटके 53.36 प्रतिशत ही रहा रिजल्ट

2020-21 में 12वीं के रिजल्ट को 80 फीसदी तक ले जाने के आदेश लोक शिक्षण आयुक्त जयश्री कियावत ने अगस्त 2019 में दिए थे। हर महीने बताया गया कि जिन स्कूलों के बच्चों की परफॉरमेंस कमजोर है, उनके लिए रेमेडियल क्लास लगाई जाएं। इसके बाद भी जिले का रिजल्ट 53.36 फीसदी ही रह गया। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम 68.42 प्रतिशत रहा और प्राइवेट का 49.51 फीसदी। प्राइवेट स्कूल का रिजल्ट अधिक गिर जाने से समूचे परीक्षा परिणाम पर असर हुआ।

कुथियाना... बाढ़ प्रभावितों ने घेरे रखा स्कूल, 15 अक्टूबर तक नहीं हुई पढ़ाई

हायर सेकंडरी स्कूल कुथियाना का परिणाम 25.81 प्रतिशत रहा। 31 में से महज 8 छात्र पास हुए। 23 बच्चे फेल हो गए। प्रभारी प्राचार्य रामदास करौरिया का कहना है कि चंबल नदी से आधा किमी दूर स्थित इस स्कूल में बारिश के दौरान बाढ़ आने से 3 महीने तक 2 गांव के लोगाें काे स्कूल में ठहराया गया था। इस कारण 15 अक्टूबर तक तो पढ़ाई ही नहीं कराई जा सकी। स्कूल के पास खुद का भवन नहीं है। अभी मिडिल स्कूल में ही हायर सेकंडरी स्कूल संचालित किया जा रहा है। विषयवार नियमित शिक्षकों की कमी भी है। लैब न होने से साइंस के छात्रों को प्रैक्टिकल भी ठीक से नहीं कराए जा सके। अंग्रेजी विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं था।

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