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  • Adequate Government Resources, Consultancy Are Also Deployed, Still Checking The Quality Of Roads In Private Labs Where Contractors Get Samples Changed.

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भ्रष्टाचार:पर्याप्त सरकारी संसाधन, कंसल्टेंसी भी तैनात फिर भी निजी लैब में करा रहे सड़कों की गुणवत्ता की जांच जहां ठेकेदार सैंपल ही बदलवा लेते हैं

मुरैना3 दिन पहले
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  • ठेकेदार खराब सड़क बनाने के बाद जांच में भी कर रहे गड़बड़ी

जिले के सरकारी विभाग में पदस्थ अधिकारी खुद ही भ्रष्टाचार को पनपने के लिए रास्ता दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क याेजना का दफ्तर हो या पीएचई विभाग या जिला पंचायत। सरकारी सिस्टम में बैठे लोग ही ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियम विरुद्ध काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क याेजना (पीएमजीएसवाय) की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्र में बनने वाली सड़कों की क्वालिटी व मजबूती चेक करने के लिए जो सैंपल इंजीनियर भरते हैं, उनकी जांच के लिए विभाग के पास खुद की लैब है। जो मशीनें विभाग पर नहीं है, उसके लिए कंसल्टेंसी भी नियुक्त है। फिर भी ठेकेदारों की इच्छा से सैंपल जांच के लिए निजी लैब भेजे जा रहे हैं जहां से ठेकेदार या तो सैंपल ही बदल देते हैं या जांच रिपोर्ट मनमाने ढंग से बनवा लेते हैं।

कोर-क्यूब के जरिए होती है क्वालिटी चेक
क्यूब टेस्टिंग: सड़क बनाते समय उसमें उपयोग होने वाले रेत-सीमेंट के अनुपात का पता लगाने के लिए 100 मीटर लंबी सड़क से लगभग 8 से 10 क्यूब भरे जाते हैं। इन क्यूब को एक दिन सुखाकर 28 दिन तक पानी में डुबोकर रखा जाता है। इसकी क्वालिटी जांचने के लिए मशीन विभाग के पास है लेकिन उसे हमेशा खराब बताया जाता है। जनवरी तक कंसल्टेंसी की मशीन भी खराब थी, ऐसे में निजी लैब में सैंपल भेजना इंजीनियरों की मजबूरी है।
कोर टेस्टिंग: जब सड़क बन जाती है तो उसकी गुणवत्ता (दबाव सहने की क्षमता) जांचने के लिए प्रत्येक 100 मीटर पर एक कोर काटा जाता है जिसकी जांच लैब में मशीन से होती है। इससे तय होता है कि सड़क निर्धारित मानक के अनुसार है या नहीं और वह रोज कितने वाहनों का लोड कितने वजन तक उठा सकेगी। यह मशीन भी विभाग व कंसल्टेंसी के पास नहीं है।

सब इंजीनियर ने भरे कोर, निजी लैब में सैंपल ही बदलवा दिए
200 मीटर लंबी माता बसैया रोड ठेकेदार सोनेराम डंडौतिया ने बनाई थी। विभाग की सब इंजीनियर हिमांचली मिश्रा ने 16 फरवरी को 2 कोर कटवाए, वहीं एक कोर ठेकेदार ने अपनी इच्छा से कटवाया। यह कोर ग्वालियर स्थित लैब में भेजे गए। मार्च महीने में जब सब इंजीनियर लैब में पहुंचीं तो वहां कोर बदल दिए गए और उनके हस्ताक्षर की जगह फर्जी हस्ताक्षर थे। इसकी शिकायत उन्होंने विधिवत अपने विभागीय अधिकारियों से भी की।
निजी लैब, फिर भी भेज रहे सैंपल
पीएमजीएसवाय के पास यूं तो खुद की लैब है, लेकिन यहां कभी सड़कों के सैंपल चेक नहीं होते। सवाल यह है कि जब कंसल्टेंसी के पास पर्याप्त मशीनें नहीं है तो फिर विभाग ने उसके साथ अनुबंध कैसे कर लिया। वहीं निजी लैब की जांच पर विभाग विश्वास कैसे कर लेता है।

ब्लैकमेल कर रही हैं इंजीनियर

  • मेरी सड़क का आधा भुगतान हो चुका है। इसके बाद सब इंजीनियर कमीशन के लिए ब्लैकमेल कर रही है। मैने इसकी अधिकृत शिकायत पुलिस अधीक्षक से भी की है। - सोनेराम डंडाैतिया, ठेकेदार पीएमजीएसवाय

इंजीनियर ने बिना बताए भेजे थे सैपल

  • हमारे विभाग की लैब व कंसल्टेंसी पर कोर काटने के लिए इक्विपमेंट नहीं हैं। ग्वालियर की लैब भारत सरकार से अधिकृत है, जो राज्य शासन का नियम है। साथ ही सब इंजीनियर ने बिना हमारी सहमति के सैंपल भेजे, वहा क्या हुआ हमें नही पता। सब इंजीनियर व ठकेदार के बीच क्या विवाद है, इससे विभाग को कोई लेनादेना नहीं। हमने कलेक्टर साहब को पूरे मामले से अवगत करा दिया है। - आरएन कोरी, महाप्रबंधक पीएमजीएसवाय
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