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परेशानी:आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बोलीं- ईद निकली, रक्षाबंधन आज, 5 माह से नहीं मिला मानदेय, कैसे मनाएंगे त्योहार

मुरैना2 महीने पहले
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  • 5 महीने से राज्य व 3 महीने से केंद्र से आने वाला मानदेय नहीं मिलने से कार्यकर्ता-सहायिका मायूस
  • जिले की 2600 कार्यकर्ता व सहायिकाओं के छोटे-छोटे बच्चे त्योहार पर भी रहेंगे भूखे

ईद निकल गई, आज रक्षा बंधन का त्यौहार है। पांच महीने से हमें मानदेय नहीं दिया गया है। हाथ में पैसा नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रक्षा बंधन का त्यौहार कैसे मनाएं। यह पीड़ा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने रविवार को भास्कर से व्यक्त की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की व्यथा है कि वे महामारी के इस संकट में लोगों की सुरक्षा के लिए प्राण-प्रण से जुटी हैं। बावजूद इसके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनकी फिक्र नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मानदेय के रूप में प्रतिमाह 10 हजार रुपए मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। जिसमें 4500 रुपए की राशि केंद्र सरकार की ओर से तथा 5500 की राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाती है। इसी प्रकार सहायिका को 5000 रुपए का मानदेय मिलता है। जिसमें 2700 रुपए राज्य तथा 2300 रुपए केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते हैं। लेकिन जिले भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिसम्बर 2019, अप्रैल, मई, जून, जुलाई 2020 का मानदेय राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया है, वहीं मई, जून व जुलाई का मानदेय केंद्र सरकार द्वारा नहीं भेजा गया है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अप्रैल से भवन किराया नहीं दिया गया है। जिससे मकान मालिक कमरा खाली करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाब बना रहे हैं। भवन किराया नहीं मिलने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संकट में हैं, क्योंकि मकान मालिकों का कहना है कि अगर उन्हें जल्दी किराया नहीं दिया तो वे अपने मकान में आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन नहीं करने देंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि भवन किराया निर्धारित करने में सुपरवाइजरों ने मनमानी है तथा किसी को किराए के रूप में 500 तो किसी को तीन हजार रुपए तक दिए जा रहे हैं।

समीक्षा बैठक में सुपरवाइजर नहीं करतीं सोशल डिस्टेसिंग का पालन नाम न छापने की शर्त पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि हर दूसरे-तीसरे विभागीय समीक्षा बैठक में अनेक प्रकार की जानकारी ली जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर होने वाली इन बैठकों में सुपरवाइजर सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं करतीं। जबकि इनमें कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंटेनमेंट जोन से आती हैं। यहां बता दें कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक सरकारी बैठकों में सोशल डिस्टेंस का पालन करना जरूरी है, लेकिन सुपरवाइजर सोशल डिस्टेंस को ताक पर रखे हुए हैं। जिससे कार्यकर्ता व सहायिकाओं में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका है।

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