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ऐसे तो लेट होगा प्रोजेक्ट:अटल प्रोग्रेस-वे, सर्वे कंपनी ने फीता डाला तो किसान बोले- किस अधिकार से नाप रहे, ये बताओ जमीन के बदले जमीन कितनी मिलेगी

मुरैना6 दिन पहले
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अटल प्रोग्रेस वे का सांकेतिक चित्र। - Dainik Bhaskar
अटल प्रोग्रेस वे का सांकेतिक चित्र।
  • एनएचएआई मई बीतने तक कंसलटेंट एलएन मालवीय से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं बनवा सका

अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा किसानों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कभी जमीन के बदले दोगुना जमीन देने तो कभी एनएचएआई एक्ट के माध्यम से जमीनों के अधिग्रहण की चर्चा सुनकर किसान असमंजस में हैं। रविवार काे गुस्साए किसानों ने सर्वे कंपनी की टीम के प्रतिनिधियों से यहां तक कह दिया कि हमारी जमीन पर फीता किस अधिकार से लगा रहे हो। पहले मुख्यमंत्री या कलेक्टर का आदेश लाओ तब पुश्तैनी जमीन पर पैर रखना। जमीन के बदले जमीन कहां और कितनी दाेगे।

दरअसल, मार्च 2022 से पहले अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सबलगढ़ के बरौठा से पोरसा के चापक गांव तक शुरू करना है। प्रोग्रेस-वे निर्माण के लिए 72 गांव के 1300 किसानों की 489 हैक्टेयर जमीन उपयोग में ली जाना है इसलिए राजस्व विभाग की प्राथमिकता किसानों की निजी जमीन के अधिग्रहण की है। दाे दिन पहले भोपाल के कंसलटेंट एलएन मालवीय ग्रुप के सर्वेयर एलाइनमेंट चेक करने के लिए सबलगढ़ के बरोठा गांव पहुंचे तो उन्होंने किसानों की निजी जमीन की नाप-तौल की।

जमीन पर फीता देखकर किसान हरिनंदन ने आपत्ति लेते हुए कहा कि उनसे बिना पूछे जमीन की नाप-जोख क्यों की जा रही है। किसानों को बताया गया कि अटल प्राेग्रेस-वे के लिए रूट की लाइन तैयार की जा रह है। प्रोग्रेस-वे किसानों के खेतों के बीच से निकलेगा इसलिए जमीन को नाप कर देखा जा रहा है। इस पर किसानों ने कहा कि पुश्तैनी जमीन तब तक नहीं देंगे जब तक यह खुलासा नहीं हो जाएगा कि जमीन के बदले कितनी जमीन कहां मिलेगी।

बरोठा से चापक तक निकलेगा प्रोग्रेस-वे: श्याेपुर से भिंड तक जाने वाला अटल प्रोग्रेस-वे मुरैना जिले के सबलगढ़ बार्डर के गांव बरोठा से शुरू होकर कैमाराकलां, अटार, डिगवार खेरा, चिन्नौनी, खांडौली, मसूदपुर, गोरखा, ऐसाह, जौंहा, डडौली, रिठौना, रछेड़, रुधावली व चापक होता हुआ भिंड पहुंचेगा।

चंबल के बीहड़ाें को समतल करने पर किसानों के लाखों रुपए खर्च, जमीन के अधिग्रहण को लेकर मुख्यमंत्री ने अब तक काेई नीति राजस्व अफसरों को नहीं भेजी, इससे असमंजस में किसान

जानिए... इन 3 उदाहरणों से किसान कैसे कर रहे विरोध

सबलगढ़ के घुर्र गोदोली के किसान पंचम सिंह का कहना है कि वह बीहड़ में पट्‌टे की जमीन 20 साल से जाेत रहे हैं। हाईवे उनके खेतों से निकलेगा इसके लिए जमीन के बदले जमीन देने की बात की जा रही है। लेकिन अधिकारी हमारी जमीन तो चिह्नित कर रहे हैं लेकिन सरकारी जमीन कहां देंगे, यह बताने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में बिना जाने हम अपनी जमीन कैसे व क्यों दें । खांडौली के किसान सरवन सिंह ने बीहड़ की जमीन को समतल करने पर दो लाख रुपए व्यय किए हैं। उनकी जमीन को प्रोग्रेस-वे के लिए अधिग्रहित करने की बात चल रही है। किसान का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उपचुनाव में कहा था कि जमीन के बदले किसानों को दो गुना जमीन दी जाएगी। यदि दूनी समतल जमीन मिलेगी तो ही इस जमीन को सड़क बनाने के लिए दिया जाएगा अन्यथा नहीं। क्योंकि बदले में मिलने वाली जमीन को समतल कराने का खर्चा कौन वहन करेगा। ऐसा अंबाह के किसान भीकम सिंह तोमर का कहना है कि गांव से सड़क निकलेगी हमें क्या खास फायदा होगा इसे बताने कोई नहीं आया। राजस्व अधिकारी जमीन देने के लिए सहमति लेने के लिए चर्चा जरूर कर रहे हैं। हमारी एक हैक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो गया तो हमारे पास बचेगा क्या। हम तो कुछ 2 हैक्टेयर जमीन के काश्तकार हैं। जमीन के दाम अच्छे मिलेंगे तो जमीन देने पर विचार करेंगे। नकद पैसा मिलेगा उससे ओर-पास में कोई दूसरी सिंचित जमीन खरीद लेंगे।

अधिग्रहण को लेकर किसान चिंतित
अटल प्रोग्रेस-वे के लिए किसानों की निजी जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई को लेकर सबलगढ़ से जौरा विधानसभा क्षेत्र के वह किसान चिंतित हैं जो बीहड़ की सरकारी जमीन पर बरसों से काबिज होकर खेती कर रहे हैं। उनकी जमीन गई तो बिना कागजाताें के ऐसे किसानों को एक्सचेंज में दूसरी जमीन मिलने पर संकट खड़ा होगा। इसलिए किसान अटल प्राेग्रेस-वे के लिए जमीन देने के मुद्दे पर विरोध की मुद्रा में हैं।

भोपाल से आदेश के इंतजार में अफसर, फिर किया जाएगा अधिग्रहण

309 किमी लंबाई के अटल प्रोग्रेस-वे के लिए पहला काम किसानों की 489 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश हैं कि प्रोग्रेस-वे के लिए किसानों से एक्सचेंज में जमीन ली जाए। किसान जमीन देने की सहमति नहीं देते हैं तो जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाए। राजस्व व एनएचएआई के अफसरों का कहना है कि भोपाल से बीते एक साल से अटल प्रोग्रेस-वे को लेकर कोई आदेश नहीं आया। आदेश आए तो उसका पालन क्रियान्वयन शुरू कराएंगे। संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के संबंध में शासन के आदेश का इंतजार है। उसी के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

कंसलटेंट से तैयार करा रहे डीपीआर
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रबंधक (तकनीकी) संजय वर्मा का कहना है कि अटल प्रोग्रेस-वे डवलपमेंट का काम एनएचएआई को देखना है। जमीन उपलब्ध कराने के लिए राज्य शासन को एजेंसी बनाया गया है। प्राेग्रेस-वे का एलाइनमेंट तैयार करने व डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का जिम्मा भोपाल की कंसलटेंसी एलएन मालवीय काे दिया है। कंसलटेंसी के लोग सर्वे के काम में लगे हैं। जल्द ही डीपीआर तैयार हो जाएगी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट सबमिट होने के बाद ही प्रोग्रेस-वे की प्रक्रिया शुरू होगी।

शासन के आदेश का इंतजार है
^अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई के संबंध में शासन के आदेश का इंतजार है। जो भी गाइडलाइन व टाइम लाइन मिलेगी उसका पालन कराया जाएगा। जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई तो एनएचएआई के नियमों के मुताबिक की जाएगी।
आशीष सक्सेना, आयुक्त चंबल संभाग मुरैना

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