1200 की डीएपी की बोरी 1600 में बेच रहे:सरकार डीएपी खाद दे नहीं पा रही, अपनी फसल बचाने किसान मजबूरी में महंगी खरीद रहे किसान

मुरैना10 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

सरकार किसानों को डीएपी खाद देने में असफल रही है। इसका फायदा मुनाफाखोर व्यापारी उठा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सिंहौनियां में आया है जहां खड़ियाहार के किसान ने 1200 रुपए की डीएपी की बोरी 1600 रुपए में खरीदी है। यह केवल अकेला मामला नहीं है। किसान ने बताया कि उस जैसे न जाने कितने किसानों ने महंगी खाद खरीदी है और आज भी खरीदने को मजबूर हैं।
आपको बता दें, कि खड़ियार गांव निवासी किसान नवनीत तोमर ने बताया कि सिंहौनियां मुख्य मार्ग पर स्थित एक दुकान पर 1200 रुपए की डीएपी खाद की बोरी 1600 रुपए में बेची जा रही है। उन्होंने बताया कि 1600 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से चार बोरी डीएपी खाद की लेकर आए है। इसी प्रकार उनके गांव के सैकड़ों लोग डीएपी खाद की बोरियां इसी रेट पर खरीद कर लाए हैं। इसी प्रकार डोलीपुरा गांव निवासी केशव सिंह ने बताया कि वे उस दुकान से चार बोरी डीएपी की 1600 रुपए प्रति बोरी लेकर आए हैं। इसी प्रकार एएसपी खाद की 7 बोरियां लेकर आए हैं। एएसपी खाद की बोरी उन्हें 1350 रुपए में दी है जबकि उसका शासकीय मूल्य 950 रुपए प्रति बोरी है।
मुनाफाखोर सक्रिय, प्रशासन का नहीं ध्यान
आपको बता दें, कि जिले में खाद की कमी के कारण मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं। जिन व्यापारियों के पास डीएपी खाद का स्टॉक है, वे अब उसे ऊंची रेट पर बेच रहे हैं। उन्हें यह बात भली-भांति मालूम है कि जिले में खाद की किल्लत है तथा किसान उनसे महंगी कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होगा।
अधिकारियों की मिलीभगत
यहां बता दें, कि जिस प्रकार से पूरे जिले में डीएपी खाद को अधिक कीमत पर ब्लैक में बेचा जा रहा है। इस बात से स्थानीय अफसर अनभिज्ञ हैं, ऐसा नहीं है। वह भी इस कालाबाजारी से वाकिफ बताए जाते हैं लेकिन राजनैतिक दवाब व अन्य कारणों से वह उन पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैंं।
पांच दिन लगे कार्रवाई करने में
आपको बता दें, कि कुछ दिन पहले अंबाह क्षेत्र में एक गोदाम में नकली खाद बनाते पकड़ा गया था। वहां से पुलिस को 140 बोरियां नकली खाद की बरामद हुई थीं। इसमें नकली खाद को असली डीएपी खाद की बोरियों में पैक करके बेचा जा रहा था। यह मिलावट का काम पिछले एक सप्ताह से चल रहा था लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। जब किसानों ने स्वयं इस बात की शिकायत स्थानीय पुलिस व अफसरों से की तब उन्होंने कार्रवाई की।
कहते हैं अधिकारी
मुझे मामले की जानकारी नहीं है। इस मामले की जांच कराई जाएगी।

नरोत्तम भार्गव, एडीएम