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पंचायतों में भ्रष्टाचार:स्टाप डैम, तालाब और रपटा के नाम पर करोड़ों हड़पे, कहीं सिर्फ दीवार तो कहीं सीसी कर छोड़ी

मुरैनाएक महीने पहलेलेखक: सुमित दुबे
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रामपुरकलां में जंगल में बना स्टॉप डैम, जिसमें एक बूंद भी पानी नहीं रुका। - Dainik Bhaskar
रामपुरकलां में जंगल में बना स्टॉप डैम, जिसमें एक बूंद भी पानी नहीं रुका।
  • पंचायतों में भ्रष्टाचार की 500 से अधिक शिकायतें, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
  • सीएम हेल्पलाइन पर एल-4 पर पहुंची शिकायतें जबरन बंद कराई, लोग बोले- अफसर जांच तक नहीं कर रहे

जिले में 478 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण फैलने के बाद तय किया था कि जो भी मजदूर बाहर से लौटे हैं, उन्हें उनके गांव में ही रोजगार दिया जाएगा लेकिन जिलेभर की 478 से अधिक पंचायतों के सरपंच-सचिवों ने आपदा के दाैर में भी भ्रष्टाचार का अवसर देखा।

सबलगढ़, कैलारस, पहाड़गढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा तथा खड़ियाहार के सरपंच-सचिव को लॉकडाउन में तालाब खुदवाने, स्टॉप डैम व चेकडैम बनाने का काम सौंपा गया, लेकिन उन्हें खुद ही नहीं मालूम कि उनके यहां मजदूरी किसने की। हालत यह है कि जिला पंचायत को मिली 20 करोड़ से अधिक की राशि पंचायतों को आवंटित कर दी गई। इसमें से 50 प्रतिशत राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

इन 3 उदाहरणाें से जानिए, कैसे पंचायतों में चल रहा भ्रष्टाचार

1. गांव के बजाय जंगल में बना दिया तालाब, वन विभाग ने रुकवाया काम

सलेमपुर की सरपंच गीतादेवी, सचिव गणेशप्रताप गौड़ द्वारा वाटर शेड योजना के तहत चेक डैम एवं तालाब का निर्माण जंगल क्षेत्र में साल 2018-19 फिरंगी एवं कुंवारी खो वाली नारी नामक स्थान पर कराया गया। चेकडैम का निर्माण 14 लाख की लागत से और तालाब का निर्माण 13 लाख की लागत से वन विभाग की भूमि में करा दिया गया लेकिन वन विभाग ने इस काम पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि यह जंगल क्षेत्र की जमीन है। सरपंच-सचिव को पता था कि निर्माण में दिक्कत आएगी लेकिन उन्होंने राशि हड़पने के लिए एेसा जानबूझकर किया।

2. पानी के नाम पर लाखों कमाए

रामपुरकलां क्षेत्र में 14 लाख रुपए की लागत से 2 रपटे स्वीकृत हुए। कहीं जंगल में दीवार बनाई ताे कहीं सीसी की लेयर बिछा दी लेकिन पानी एक भी बूंद भी नहीं रुका। हालात यह हैं कि पूरी राशि सरपंच व सचिव हड़प गए। अब जंगल में अगर आदिवासी पानी लेने के लिए जाते हैं तो उनके ऊपर वन विभाग के कर्मचारी केस दर्ज करने की धमकी देते हैं।

3. वाटरशेड में 15 करोड़ खर्च, पानी संकट

मुरैना के पहाड़गढ़, सबलगढ़, कैलारस व जौरा कस्बे में पानी संकट से जूझ रहे ग्रामीणों को पानी उपलब्ध करने के लिए 10 साल में तकरीबन 18 करोड़ से अधिक की राशि जिला पंचायत के माध्यम से गांवों में खर्च की जा चुकी है। कलेक्टर, एसडीएम सहित कभी किसी अधिकारी ने यह नहीं देखा कि जिला पंचायत में कहां से राशि आती है और कहां खर्च हो रही है।

सीएम हेल्पलाइन में एल-4 पर पहुंची शिकायत जबरन बंद की

जिला पंचायत में जनपदों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे मनरेगा व वित्त विभाग के कामों की तकरीबन 500 से अधिक शिकायतें हो चुकी हैं। इनमें से कई एल-4 पर पहुंचने के बाद जबरन बंद कर दी गईं। इन शिकायतों को बिना सुनवाई के ही बंद कर दिया गया। इस कारण लोगों ने यह शिकायतें दोबारा दर्ज कराईं।

गांव वाले पानी भरते हैं तो वनकर्मी कहते हैं, केस दर्ज हो जाएगा

ग्राम पंचायत सलेमपुर के सरपंच-सचिव के द्वारा वाटरशेड योजना के तहत चेकडैम एवं तालाब का निर्माण जंगल क्षेत्र में 2018-19 फिरंगी एवं कुंवारी खो वाली जगह पर कराया। चेक डैम का निर्माण 14 लाख तथा तालाब का निर्माण 13 लाख की लागत से वन विभाग की भूमि में कराया। हालत यह है कि तालाब से पानी भरने पर वन विभाग के कर्मचारी गांव की रम्मो आदिवासी से कहते हैं कि अगर पानी भरा तो केस दर्ज कर देंगे।

पूरे मामले की जांच कराएंगे

पहाड़गढ़, कैलारस सहित अंचल में जहां भी लॉकडाउन के दौरान गड़बड़ी हुई है, वहां हम जांच कराएंगे। जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई करेंगे।
रोशन कुमार सिंह, सीईओ जिप

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