विडंबना:सिविल हॉस्पिटल में विशेषज्ञ नहीं, ऑपरेशन छोटा हो या बड़ा, जिला अस्पताल में ही मिलेगी सुविधा

मुरैना9 महीने पहले
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  • अंबाह अस्पताल में डॉक्टर न होने से रैफर हो रहे मरीज, जनप्रतिनिधि व अफसरों का ध्यान सिर्फ बेड बढ़ाने पर
  • सीएम ने सिविल हॉस्पिटल के उन्नयन की घोषणा तो की लेकिन एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट सालों से नहीं, कंपाउंडर की भी कमी

सिविल अस्पताल अंबाह की हालत आवश्यक सुविधाओं और चिकित्सकों के अभाव में दिनों-दिन बिगड़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 100 बिस्तर का अस्पताल बनाने की घोषणा करने के बाद भी इस योजना पर अमल नहीं हुआ है।

इसके चलते हालात खराब है। अस्पताल से प्रतिदिन 10 से 12 ऐसे मरीज रैफर किए जाते हैं, जो किसी दुर्घटना में घायल होकर इलाज के लिए अस्पताल आते हैं। मरीजों को रैपर करने के पीछे जो वजह बताई जाती है वह है पिछले सात साल से एनेस्थीसिया (बेहोशी) विशेषज्ञ को पदस्थापना न होना।

दो वर्ष पूर्व बाँड पर एनेस्थेटिक डा. अनिल कुमार की पदस्थापना भी की गई लेकिन उन्होंने अभी तक ज्वाइन नही किया। जिसके चलते यहां पर तैनात सर्जन डॉक्टर घायल मरीज का इलाज करने की रिस्क नहीं लेते और उन्हें जिला मुख्यालय पर रैफर कर देते हैं। इससे मरीजों का समय खराब होने के साथ-साथ किराए-भाड़े का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है और इलाज में भी देरी होती है। सिविल अस्पताल अंबाह में गंभीर मरीजों का इलाज करने के लिए न केवल आधुनिक ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध हैं बल्कि ऑपरेशन के लिए सर्जन डॉक्टर के रुप में डॉक्टर सतीश यादव भी पदस्थ हैं।

इतना ही नहीं इलाज के दौरान विभिन्न जांच करने के लिए यहां आधुनिक मशीनें भी लगी हैं। लेकिन बेहोशी के चिकित्सक के नहीं होने से मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। मरीजों को छोटे-मोटे ऑपरेशन के लिए भी जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जा रहा है। वही इस्तेमाल ना होने से ऑपरेशन थिएटर के उपकरणों में भी जंग लग रही है। सिविल अस्पताल अंबाह में ड्रेसिंग रूम में घायल मरीजो की देखभाल व मल्हम-पट्‌टी सहित ड्रिप लगाने के लिए चार कंपाउंडर पदस्थ हैं। जबकि अस्पताल में 6 कंपाउंडरो की जरूरत है। कंपाउंडर की संख्या कम होने के कारण मरीजों को उपचार में दिक्कत आती है। ज्ञात रहे कि सिविल अस्पताल अंबाह की प्रतिदिन की ओपीडी 400 तक पहुंच जाती है। लेकिन स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है।

2 लाख की डेंटल चेयर मशीन भी पड़ी है अनुपयोगी
सात साल पूर्व सिविल अस्पताल अंबाह को शासन द्वारा लगभग दो लाख रुपए कीमत की डेंटल चेयर मशीन उपलब्ध कराई गई थी। शासन की मंशा थी इस सिविल अस्पताल में आने वाले दंत संबंधी समस्या के मरीजों का अस्पताल में ही उपचार हो सके। लेकिन दंत रोग विशेषज्ञ ना होने के कारण यह मशीन भी अनुपयोगी है। जिसके चलते दांतों की बीमारी संबंधित मरीजों को उपचार के लिए या तो मुरैना जाना पड़ रहा है या फिर ज्यादा पैसे देकर प्राइवेट चिकित्सकों पर इलाज कराना पड़ रहा है।
शासन से ही होगी निश्चेतना विशेषज्ञ की पदस्थापना

  • सिविल अस्पताल में जो भी स्टाफ सहित अन्य कमी है, उस संबंध में समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया जाता है। निश्चेतना विशेषज्ञ सहित अन्य सभी इंतजाम शासन स्तर का कार्य है। वहीं से व्यवस्था होने पर ऑपरेशन थिएटर का संचालन किया जा सकता है। - डॉ. डीएस यादव, बीएमओ सिविल हॉस्पिटल अंबाह
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