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किसान बिजली का पैसा नहीं भर सके:बिजली कंपनी ने पहले शस्त्र लायसेंस निरस्त कराने की कोशिश की, अब बैंक खाते सीज कराने की कर रही तैयारी

मुरैनाएक महीने पहले
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किसानों के ट्रांसफार्मर उतार� - Dainik Bhaskar
किसानों के ट्रांसफार्मर उतार�
  • किसानों से पैसा वसूलने हर तरह के हथकंडे अपना रहा बिजली कंपनी प्रबंधन

लॉकडाउन में किसानों की हालत खराब रही है। किसान बिजली का पैसा नहीं भर सके हैं। पैसा न भरने पर, अब बिजली कंपनी हर वो हथकंडा अपना रही है, जिससे किसान मजबूर होकर उसकी बकाया राशि अदा कर दे। पहले कंपनी ने बकायादारों के ट्रांसफार्मर उतार लिए, फिर भी बात नहीं बनी तो शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने जिला प्रशासन पर दबाब डाला। अब, बकायेदारों से वसूली का कोई फंडा नहीं दिखाई दिया तो उनके बैंक खाते सीज कराने की तैयारी की जा रही है। दूसरी तरफ बिजली कंपनी प्रबंधन की माने तो राजस्व वसूली करना उनकी मजबूरी है। कंपनी मुख्यालय से सख्त आदेश हैं कि हर हाल में राजस्व वसूली की जाए। कंपनी प्रबंधन की माने तो कंपनी का जिले के उप भोक्ताओं पर 1050 करोड़ रुपए बकाया है। जिले में 2 लाख, 65 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें से मात्र 15 हजार उपभोक्ता ही बिजली का बिल भर रहे हैं। बाकी 2 लाख, 40 हजार उपभोक्ताओं पर 1025 करोड़ रुपए बकाया राशि है। कंपनी की इस राशि में हर महीने इजाफा हो रहा है।

प्रबंध संचालक ने व्यक्त की थी नाराजगी
विगत 6 जून को बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक गणेश शंकर मिश्रा मुरैना समीक्षा बैठक लेने आए थे। बैठक में जब उन्हें बताया गया कि राजस्व वसूली बहुत पिछड़ी है तो उन्होंने सख्त नाराजगी जताई थी। कंपनी के मौजूदा महाप्रबंधक पीके शर्मा नियमित महाप्रबंधक नहीं है। वह उप महाप्रबंधक हैं तथा महाप्रबंधक पद का लुक ऑफ्टर उन्हें दिया गया है। लुक ऑफ्टर देना पूरी तरह से अस्थाई व्यवस्था है। यह उन परिस्थितियों में दिया जाता है जब तक खाली पद पर उसके योग्य कोई अधिकारी नहीं आ जाता है। ऐसे में प्रबंध संचालक की नाराजगी उन्हें भारी पड़ सकती है। लिहाजा राजस्व वसूली के लिए अब, किसानों पर हर प्रकार का दवाब डाला जा रहा है।
चार किसानों के बैंक खाते कराए सीज
कंपनी प्रबंधन ने कार्यवाही का भय दिखाने के लिए फिलहाल चार किसानों के बैंक खाते सीज करवा दिए हैं जिससे वह उनमें लेन-देन नहीं कर सकें। कंपनी उन किसानों के बैंक खाते सीज करवा रही है जिन पर पांच लाख रुपए या उससे अधिक राशि बकाया है। इसी क्रम में कंपनी ने शहर के दो बड़े बकायेदारों के चार खाते सीज करवा दिए हैं। खाते सीज होने का असर यह हुआ कि उसी दिन एक बकायेदार बकाया राशि लेकर कंपनी में जमा कराने पहुंच गया। राशि जमा करने के बाद उसके बैंक खाते को बहाल कर दिया गया।

बंदूक लाइसेंस निरस्त कराने दिया जा चुका आवेदन
इससे पहले कंपनी प्रबंधन ने 160 किसानों के शस्त्र लायसेंस निरस्त कराने का आवेदन 15 जून को ही अपर कलेक्टर के पास भेज दिया था। इन 160 बंदूकधारी उपभोक्ताओ पर कंपनी का 1 करोड़, 87 लाख, 13 हजार रुपए बकाया है।

उपभोक्ताओं के साथ दोहरी नीति अपना रहा कंपनी प्रबंधन
बिजली कंपनी अभी तक लगभग एक सैकड़ा बकाएदार किसानों के खेतों से उनके ट्रांसफार्मर उठवा चुकी है। बिजली कंपनी प्रबंधन का दूसरा चेहरा यह देखने में आया कि एक तरफ कंपनी किसानों पर लगातार कार्यवाही कर रही है। दूसरी तरफ शहर के दबंग बकायेदारो के खिलाफ कंपनी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। इन बकाएदारों पर कंपनी का करोड़ों रुपए बकाया है। नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की उधारी वाले 6992 उपभोक्ता हैं। इन पर 200 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं एक लाख रुपए से अधिक उधारी वाले 16823 उपभोक्ता हैं। इन पर 71 करोड़ रुपए बकाया हैं। अकेले मुरैना शहर में ही पांच हजार से अधिक बंदूकधारी दबंग उपभोक्ता हैं। यह उपभोक्ता बिजली का बिल भरते ही नहीं हैं, लेकिन इनके खिलाफ कंपनी ने अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है।

इस संबंध में कंपनी के महाप्रबंधक पीके शर्मा का कहना है कि बकायेदारों के शस्त्र लायसेंस निरस्त करने का अनुमोदन एडीएम के पास भेजा है। बड़े बकायेदार बार-बार कहने के बावजूद बिल अदा नहीं कर रहे हैं। उनके बैंक खाते सीज करवा दिए जाएंगे।

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