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अनदेखी:दिमनी व रिठौरा में काॅलेज की घोषणा को भूली सरकार, कैलारस-बानमौर में नहीं मिली जमीन

मुरैना2 महीने पहले
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गर्ल्स कॉलेज का छात्रावास 9 साल से अनुपयोगी पड़ा है। - Dainik Bhaskar
गर्ल्स कॉलेज का छात्रावास 9 साल से अनुपयोगी पड़ा है।
  • गर्ल्स कॉलेज का छात्रावास बजट के अभाव में अनुपयोगी पड़ा
  • मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पहले 4 काॅलेज खोलने की घोषणा उनमें से दो पर काम नहीं

मुरैना जिले में चुनावी घोषणा की उच्च शिक्षा का बोल-बाला इन दिनों परवान पर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा उपचुनाव में दिमनी व रिठौरा में कॉलेज खोलने की घोषणाएं कीं लेकिन उन पर अब तक कोई काम शुरू नहीं कराया। इससे पहले कैलारस व बानमोर में शुरू किए गए डिग्री कॉलेजों के लिए भी प्रशासन ने सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं कराई है। इस हाल में इंटर पास बच्चों को उच्च शिक्षा कैसे मिलेगी इस पर सरकार व प्रशासन गंभीर नहीं है।

नवंबर 2020 में विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि अगले शैक्षणिक सत्र में दिमनी व रिठौरा में सरकारी कॉलेज शुरू हाे जाएंगे। 15 जून से कॉलेजों में प्रवेश का नया सत्र शुरू हाे गया है लेकिन दिमनी व रिठौरा के छात्रों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए कॉलेज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लीड कॉलेज का कहना है कि उक्त दोनों कॉलेजों के संचालन के संबंध में शासन ने अब तक कोई पत्राचार नहीं किया है। इससे जाहिर है कि मुरैना व दिमनी सीट पर भाजपा के हारने के बाद सरकार ने दोनों स्थानों पर कॉलेज शुरू करने की घोषणा को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

2018 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कैलारस व बानमोर में डिग्री कॉलेज शुरू कराए थे। लेकिन उक्त दोनों काॅलेजों के लिए प्रशासन ने अभी तक सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं कराई है। उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में कलेक्टर को पत्र लिख चुका है लेकिन प्रशासन ने शासन के पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया है। इस हाल में कैलारस के कॉलेज हायर सेकंडरी स्कूल के दो कमरों में संचालित हो रहा है और बानमोर कॉलेज का संचालन बामौर के प्राइमरी स्कूल भवन के दो कक्षों में किया जा रहा है। सुविधा व संसाधन के अभाव में छात्र-छात्राएं एडमिशन के लेने के बाद उक्त दोनों कॉलेजों में पढ़ने के लिए नहीं पहुंचे। इस स्थिति अतिथि विद्वानों को दिया गया मानदेय किसी काम नहीं आया। जौरा में कॉलेज का नया भवन बनाने के लिए शासन ने 4.91 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। हाउसिंग बोर्ड ने 17 फरवरी को 3 करोड़ 99 लाख रुपए के टेंडर की फायनेंशियल बिड स्वीकृति के लिए राज्य शासन को भेजी थी जिसे अभी तक स्वीकृत नहीं किया गया है। इस हाल में कॅालेज का नया भवन बनाने का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

मुरैना में 6 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से बना शासकीय लॉ काॅलेज का भवन बनकर मार्च में तैयार हाे चुका हे लेकिन निर्माण की खामियों के कारण पीआईयू ने इस बिल्डिंग काे अभी तक अपनी हैंडओवर नहीं लिया है। शहर से 10 किमी दूर हाईवे पर बनाए गए लॉ कॉलेज की सुरक्षा के लिए प्राचार्य डा.सीएल गुप्ता ने उच्च शिक्षा आयुक्त से एक चौकीदार व एक चपरासी का पद स्वीकृत करने के लिए पत्र लिखा है। लॉ काॅलेज की बाउंड्रीवॉल बनाने के लिए भी 55 लाख का एस्टीमेट बनाकर आयुक्त उच्च शिक्षा को भेजा है। पोरसा कॉलेज के नए भवन की प्रक्रिया भी अभी ठीक से शुरू नहीं हुई है।

पीजी कॉलेज की जमीन पर कब्जा

एक्सीलेंस पीजी कॉलेज परिसर की जमीन पर प्रेमनगर के लोगों का अतिक्रमण है। मामला 2014 से हाईकोर्ट में चल रह है इसके चलते कॉलेज की बाउंड्रीवॉल बनाने का काम बंद है। चारदीवारी नहीं बनाए जाने से काॅलेज की सुरक्षा को खतरा है। एक्सीलेंस पीजी कॉलेज के प्रथम तल पर 25 अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने 4.41 करोड़ मंजूर किए हैं इसमें से 25 लाख रुपए की राशि कॉलेज बिल्डिंग के मेंटीनेंस कार्य पर व्यय की जाना है। निर्माण कार्य के लिए अशोकनगर के ठेकेदार ने 29 प्रतिशत कम रेट पर टेंडर डाला। इसलिए उसे टेंडर तो मिल गया लेकिन घाटा जाने की आशंका के चलते ठेकेदार काम शुरू नहीं करा पा रहा है।

गर्ल्स कॉलेज का छात्रावास अधूरा

मुरैना में गर्ल्स कॉलेज कैम्पस में 2012 में 90 लाख की लागत से बने 100 सीटर छात्रावास का निर्माण कार्य 9 साल बाद भी अधूरा है। कॉलेज प्रशासन ने शेष निर्माण कार्य के लिए 1.65 करोड़ का एस्टीमेट आयुक्त उच्चशिक्षा को भेजा है लेकिन 4 महीने बाद भी बजट स्वीकृत नहीं किया गया है। हॉस्टल नहीं बनने से ग्रामीण क्षेत्र की इंटर पास छात्राएं मुरैना में रहकर उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पा रही हैं।

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