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ऐसे नहीं टूटेगी कोरोना की चेन:शहर में फर्राटे भर रहे वाहन, कई जगह पर लोगों की भीड़ तक हो जाती है जमा, मूकदर्शक बनी पुलिस

मुरैना6 महीने पहले
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सड़क पर बेरोकटोक दौड़ रहे वाहन। - Dainik Bhaskar
सड़क पर बेरोकटोक दौड़ रहे वाहन।

राज्य सरकार प्रदेश में कर्फ्यू बढ़ाकर 10 मई करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराने के आदेश कलेक्टरों व पुलिस को दे दिए हैं। बावजूद मुरैना में गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। गुरुवार को शहर में वाहनों का आना-जाना होता रहा, कहीं-कहीं तो लोगों की भीड़ तक जमा हो गई। पुलिस ने खानापूर्ति के लिए बेरिकेड्स जरूर लगाए हैं।

सड़क पर फर्राटा भर रहे वाहन
सड़क पर फर्राटा भर रहे वाहन

जिले में कोरोना संक्रमण पैर पसार चुका है। लोगों को न इलाज मिल रहा है और न ही ऑक्सीजन। लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। जिला व अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। प्रशासन के अधिकारी संक्रमित व मरने वालों के आंकड़े छिपा कर नौकरी बचाने की कोशिश में लग गए हैं।

दूसरी तरफ शहर में कोई-रोक-टोक नहीं है। लोग दिन भर इधर से उधर वाहनों से फर्राटा भर रहे हैं। शहर का स्टेशन रोड हो या बैरियर चौराहा, बस स्टैंड हो या स्टेशन के बगल वाला सदर बाजार, सभी जगह वाहन बिना रोक-टोक के फर्राटे भर रहे हैं। लोग एक तरफ से यह भूल चुके हैं कि जिले भर में लॉकडाउन है।

बेरीकेट्स लगाकर खानापूर्ति कर रही पुलिस
पुलिस ने शहर भर में जगह-जगह बेरीकेड्स लगा दिए हैं। इन बेरीकेड्स को लगाने के बाद पुलिस कर्मचारी इधर-उधर छांव में बैठकर ड्यूटी करर रहे हैं। दोपहर में पुलिस अधिकारी निकलने में परेशानी महसूस करते हैं। सुबह व शाम को गाड़ियां मुख्य मार्गों पर होर्न बजाते हुए निकल जाती हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों को बैठकों से नहीं फुर्सत
शहर पुलिस के भरोसे हैं, लेकिन पुलिस ध्यान नहीं दे रही है। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन पर अंकुश रखने के लए जो प्रशासिन अधिकारी हैं, वे पूरे दिन बैठकों में व्यस्त रहते हैं। कलेक्ट्रेट कार्यालय में दिन भर बैठकें चलती रहती हैं।

पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पांडे ने बताया कि यह जनता कर्फ्यू है, पुलिस कर्फ्यू नहीं है। हम केवल उन्हीं लोगों को आने-जाने दे रहे हैं, जो किसी काम से आ-जा रहे हैं, या फिर उन्हें अनुमति है। बसें व ट्रेन चल रही हैं तो, लोग तो आएंगे-जाएंगे ही, हम उन्हें नहीं रोक सकते। हमारा काम भीड़ को एकत्रित होने से रोकना है, तो उसे हम रोक रहे हैं।