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मनमानी:अजा छात्रावास और मिनी स्टेडियम के लिए आरक्षित 4 करोड़ की जमीन पर बने मकान

मुरैना4 दिन पहले
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मिनी स्टेडियम के लिए आरक्षित जमीन पर बन रहे मकान। - Dainik Bhaskar
मिनी स्टेडियम के लिए आरक्षित जमीन पर बन रहे मकान।
  • सरकारी जमीन बेचने वाले पूर्व सरपंचों की आधा दर्जन शिकायतें, कार्रवाई करने नहीं पहुंच रहे तहसीलदार
  • हाइवे किनारे शनि मंदिर रोड पर 1 हजार स्क्वेयर फीट सरकारी जमीन पर भी निर्माण जारी

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वालों पर राजस्व विभाग के अधिकारी मेहरवान हैं। नूराबाद में अजा छात्रावास के लिए आरक्षित 7 बीघा तथा मिनी स्टेडियम के लिए आरक्षित 12 बीघा जमीन के 80 प्रतिशत हिस्से को तीन-तीन पूर्व सरपंचों ने बेच दिया। यहां कई मकान बन गए और कई का निर्माण जारी है। गांव के ही लोगों ने सीएम हेल्पलाइन सहित जनसुनवाई में तीन-तीन बार शिकायतें कलेक्टर बी. कार्तिकेयन से की लेकिन तहसीलदार कार्रवाई करने ही नहीं पहुंचे। नतीजा भू-माफिया अभी भी जमीनें बेचने पर आमादा है।

जानकारी के अनुसार नूराबाद में सर्वे क्रमांक 412 के 1.54 रकवा (7 बीघा) जमीन 17 मार्च 2008 को अजा छात्रावास के लिए आरक्षित की गई थी। इस जमीन के 10 बिस्वा हिस्से पर छात्रावास की बिल्डिंग बन गई और शेष जगह बाउंड्रीवाल करके घेराबंदी करनी थी, ताकि छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चे उसमें खेलकूद आदि क्रियाएं कर सकें। लेकिन छात्रावास के शेष हिस्से पर गांव के ही पूर्व सरपंच कप्तान सिंह गुर्जर, वीरेंद्र सिंह गुर्जर एवं सीताराम गुर्जर ने बेच दी।

सरकारी जमीन पर लोगों ने अपने-अपने घर बना लिए, जिससे छात्रावास चारों तरफ से घिर गया।इस संबंध में बानमोर तहसीलदार रत्नेश शर्मा ने बताया कि नूराबाद में मिनी स्टेडियम, हरिजन छात्रावास की जमीन सहित शनिचरा रोड पर जिस जगह जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत जनसुनवाई में की गई है, वह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। हमने इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर आला अफसरों को दे दी है।

मिनी स्टेडियम की जमीन पर कब्जा, निर्माण करने आए ठेकेदार को खदेड़ा
नूराबाद में ही सर्वे नंबर 411 पर 2.44 रकबा पर 12 बीघा जमीन 12 जनवरी 2010 को कलेक्टर ने मिनी स्टेडियम के लिए आरक्षित किया था। 2 करोड़ कीमत की इस सरकारी जमीन पर आज तक स्टेडियम तो नहीं बना लेकिन पूर्व सरपंचों पर आरोप है कि उन्होंने इस आरक्षित जमीन को पंचायत में ठहराव प्रस्ताव पास करके अपने परिजन के नाम करवा ली। इस जमीन पर भी दर्जनों मकान बन चुके हैं और कई निर्माण अभी भी जारी हैं। गांव में रहने वाले सतेंद्र सिंह, पवन सिंह, भीम सिहं आदि ने बताया कि मिनी स्टेडियम न होने की वजह से गांव के ऐसे युवा, जो फौज आदि की तैयारी के लिए दौड़ लगाते हैं, उन्हें हाईवे पर प्रेक्टिस करनी पड़ रही है। जिसकी वजह से उनके साथ हादसे की आशंका बनी रहती है।

सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई में शिकायतें, कार्रवाई नहीं
नूराबाद में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन को बेचकर खुर्दबुर्द करने की शिकायत 31 दिसंबर 2020 को सीएम हेल्पलाइन पर की गई। इसके बाद 5 जनवरी को रविंद्र सिंह गुर्जर ने जनसुनवाई में इसकी शिकायत की। गांव में रहने वाले सतेंद्र सिंह गुर्जर, पवन सिहं, भीम सिंह ने 16 फरवरी को इसकी शिकायत जनसुनवाई में दोबारा कलेक्टर से की। इसके बाद 23 फरवरी को तीन अलग-अलग शिकायतें की गईं, लेकिन तहसीलदार रत्नेश शर्मा इस मामले की जांच के लिए गए और खानापूर्ति करके लौट आए। सरकारी जमीनों पर भवन व दुकानें बनाने का काम अभी जारी है।

1 हजार स्क्वेयर फीट सरकारी जमीन पर बना रहे दुकानें
नूराबाद क्षेत्र में ही शनि मंदिर रोड पर पंचायत की 1 हजार स्क्वेयर फीट जमीन है। इस जमीन पर भी वर्तमान में दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। जबकि इस जमीन पर शनिश्चरा पर लगने वाले मेले के लिए वीआईपी पास बनाने का कैंप लगता है और श्रद्धालुओं के लिए भोजन पानी का प्रबंध होता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन पर पंचायत भवन बनना चाहिए। क्योंकि पुराना पंचायत भवन जर्जर हो चुका है।

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