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चंबल वाटर प्रोजेक्ट:2022 में काम शुरू हो गया तो शहर को 2024 में मिल सकेगा फिल्टर्ड पानी

मुरैना11 दिन पहले
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चंबल से शहर की जरूरत के लिए प्रतिदिन 75 एमएलडी पानी लिया जाना प्रस्तावित है। - Dainik Bhaskar
चंबल से शहर की जरूरत के लिए प्रतिदिन 75 एमएलडी पानी लिया जाना प्रस्तावित है।
  • देरी वाला प्रोजेक्ट... अभी तो शहरी विकास कंपनी ने सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी से अनुबंध तक नहीं किया
  • राज्य शासन ने चंबल से पानी लाने के लिए ठेकेदार को दिया है 24 महीने का समय

शहरवासियों को साल 2024 से पहले चंबल का फिल्टर्ड पानी नहीं मिल सकेगा क्योंकि अब तक सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी से चंबल वाटर प्रोजेक्ट का अनुबंध तक नहीं हुआ है। शहरी विकास कंपनी ने ठेकेदार को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय दिया है। ठेकेदार ने अनुबंध नहीं किया तो 268 करोड़ रुपए लागत के इस प्रोजेक्ट के टेंडर फिर से होंगे।

मुरैना शहर की नई जलावर्धन योजना के लिए शहरी विकास कंपनी ने ग्वालियर की सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी का 208 करोड़ रुपए का टेंडर मंजूर कर लिया है लेकिन ठेकेदार अशोक भारद्वाज अभी इस प्रोजेक्ट पर काम करने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। कारण है कि 268 करोड़ के टेंडर को उन्होंने 208 करोड़ रुपए में ले लिया। लगभग 60 करोड़ की कटौती के चलते न तो वे गुणवत्तापूर्ण काम कर पाएंगे न उन्हें इस प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान बड़ा मुनाफा होगा। बड़े घाटे से बचने के लिए ठेकेदार सुरक्षा निधि को छोड़ना मुनासिब समझेगा। यहां बता दें कि टेंडर मंजूर होने के 25 दिन बाद भी ठेकेदार ने शहरी विकास कंपनी से अनुबंध नहीं किया है। ठेकेदार ने यह प्रोजेक्ट छोड़ा तो चंबल वाटर प्रोजेक्ट के टेंडर दोबारा से करने होंगे।

इस टेंडर पर काम करने के लिए 24 महीने का समय ठेकेदार को मिलेगा

जानकारों का कहना है कि चंबल वाटर प्रोजेक्ट पर सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम शुरू कराया तो अगस्त में अनुबंध के बाद निर्माण एजेंसी 3 महीने की समयसीमा में इस प्रोजेक्ट का सर्वे कराकर अपने स्तर से चंबल से मुरैना तक पानी लाने की ड्राइंग व डिजायन तैयार करेगी। नई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसका सत्यापन शहरी विकास कंपनी द्वारा 20 से 25 दिन की समयावधि में किया जाएगा। इस प्रकार नवीन डीपीआर फायनल होने में नवंबर तक का समय लगेगा, तब जाकर जनवरी 2022 में अलग-अलग साइट पर काम शुरू हो सकेगा। चूंकि इस टेंडर पर काम करने के लिए 24 महीने का समय ठेकेदार को मिलेगा इसलिए चंबल का पानी शहर के लोगों को 2024 से पहले नसीब नहीं हो सकेगा।

बड़ा प्राेजेक्ट, शहर की उम्मीदें, लेकिन काम धीमा

  • मुरैना शहर के लिए यह बीते 70 सालों का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें 208 करोड़ खर्च कर चंबल से 23 किमी दूर मुरैना में फिल्टर्ड पानी लाया जाएगा।
  • शहर के 60 हजार घरों को स्वच्छ पेयजल की सप्लाई किए जाने से नगर निगम का बिजली का व्यय बचेगा। अभी पंप कनेक्शनों का बिजली का बिल 20 लाख रुपए आ रहा है।
  • शहर की 20 से ज्यादा बस्तियों में अभी पीने के पानी की किल्लत है। चंबल वाटर प्रोजेक्ट कंपलीट होने के बाद 2.32 लाख आबादी को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी।

इस प्रोजेक्ट में यह काम कराए जाने हैं

  • चंबल में 140 एमएलडी क्षमता का इंटेकवेल बनाया जाएगा। इससे मुरैना काे 65 एमएलडी व ग्वालियर को 75 एमएलडी पानी मिलेगा।
  • अतरसुमा में 65 एमएलडी क्षमता का जलशोधन संयंत्र बनाया जाना है। वहां से स्वच्छ जल शहर को भेजा जाएगा।
  • शहर के 60 हजार घरों में जलापूर्ति के लिए 502 किमी लंबाई की पाइप लाइन बिछायी जाएगी और नवीन नल कनेक्शन दिए जाएंगे।
  • शहर की कुल खपत के पानी का एक तिहाई हिस्सा पानी 12 ओवरहैड टैंकों में स्टोर किया जाएगा। इसके लिए पानी की नई टंकियाें का निर्माण कराया जाएगा।
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