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चंबल वाटर प्रोजेक्ट:ग्वालियर की जलापूर्ति योजना को शामिल करने से मुरैना में चंबल से पानी लाने का काम अटका

मुरैनाएक महीने पहले
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  • 287 करोड़ के टेंडर जनवरी में हुए लेकिन उनको यह कहकर स्वीकार नहीं किया कि कोई बड़ी कंपनी काम करने नहीं आई

ग्वालियर के जलावर्धन योजना को मुरैना से जोड़ दिए जाने के कारण चंबल वाटर प्रोजेक्ट पर चल रहा काम चार महीने से बंद है। 287 करोड़े के इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए चार कंपनियों ने रुचि दिखाई लेकिन नगरीय प्रशासन विभाग ने उनमें से किसी के टेंडर काे स्वीकृत नही किया। अब कोविड का बहाना बनाकर चंबल से पानी लान की योजना के काम को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

चंबल वाटर प्रोजेक्ट के लिए स्टैंडर्ड इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड बैंगलुरू, वानको ग्वालियर, लार्सन एंड टूब्रो भोपाल समेत एक अन्य कंपनी ने जनवरी 2021 में टेंडर डाले हैं। पहले यह टेंडर 28 दिसंबर को खोले जाने थे लेकिन बाद में तारीख बढ़ाकर 12 जनवरी कर दी गई। 12 जनवरी से पहले केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने ग्वालियर के लिए चंबल से पानी ले जाने का शिगूफा छोड़ दिए जाने से नगरीय प्रशासन विभाग ने चंबल वाटर प्रोजेक्ट के लिए प्राप्त 4 टेंडरों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

अप्रैल बीत जाने के बाद भी मुरैना के लिए चंबी से पानी लाने की कार्ययोजना पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। क्योंकि अब इसके लिए रिवाइज प्रोजेक्ट बनेगा। तब उसके अनुसार काम आगे बढ़ाया जाएगा। यहां बता दें कि चंबल से पानी लाने की योजना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चुनावी घोषणा में शामिल है लेकिन केन्द्रीय मंत्री तोमर के हस्तक्षेप के कारण चंबल वाटर प्रोजेक्ट के लिए कोई भी अधिकारी अब काम बढ़ाने को तैयार नहीं है।

मुरैना शहर की आबादी बढ़ने के कारण मौजूदा जलस्त्रोतों से पानी की समुचित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नागरिकों को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी दिया जाना चाहिए लेकिन नगर निगम अभी 65 से 70 लीटर पानी ही दे पा रही है। चंबल वाटर प्रोजेक्ट के कार्यान्वित होने से लोगों को प्रतिदिन मानकों के अनुरूप 135 लीटर पानी दिया जा सकेगा ।

चंबल के पानी को स्टोर करने के लिए शहर में 7 नए ओवर हैंड टैंक बनाए जाएंगे। पांच पुरानी टंकियों को मिलाकर कुल 12 टैंकों से शहर की 2.90 लाख आबादी के लिए पानी की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए नगर निगम ने वाटर वर्क्स कॉलोनी समेत इस्लामपुरा की पानी की टंकियों काे तुड़वा दिया है। अभी पंचायती धर्मशाला की पानी की टंकी भी तोड़ा जाना प्रस्तावित है। एक टंकी सुभाष नगर में भी डिसमेंटल की जाएगी लेकिन चंबल वाटर प्रोजेक्ट का काम बंद होने से पानी की पुरानी टंकियों को ताेड़ने का काम एक साल से बंद है।

89 करोड़ से 287 करोड़ तक पहुंची प्रोजेक्ट की लागत
चंबल वाटर प्रोजेक्ट की लागत 89 करोड़ से बढ़कर 287 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यूपीए की सरकार में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने चंबल वाटर प्रोजेक्ट के लिए 89.50 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की थी लेकिन नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से एनओसी नहीं मिलने के कारण इस प्रोजेक्ट उस समय काम शुरू नहीं हो सका।

केन्द्र में एनडीए की सरकार आने के बाद चंबल वाटर प्रोजेक्ट का काम बंद हाे गया। उसके बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में इस योजना के लिए विश्वबैंक से 315 करोड़ मंजूर कराने के प्रयास विफल हो गए तब उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए पूर्व विधायक रघुराज कंसाना की पहल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंबल वाटर प्रोजेक्ट के लिए 287 करोड़ की स्वीकृति तो दे दी लेकिन काम अब तक शुरू नहीं कराया।
140 एमएलडी का इंटेकवैल प्रस्तावित
मुरैना शहर के 47 वार्डों में पानी की आपूर्ति के लिए चंबल में 140 एमएलडी क्षमता का इंटेकवैल बनाया जाएगा। इंटेकवैल की अधिक क्षमता का इसलिए बनाया जाएगा ताकि आगामी 30 वर्ष बाद का बढ़ी हुई आबादी की स्थिति में शहर के लोगों को पानी का पानी सहजता से मुहैया होता रहे। इंटेकवैल के पानी के शोधन के लिए भानपुर रेस्ट हाउस के पास 6.5 हेक्टेयर जमीन आरक्षित है वहां प्रोजेक्ट के वर्कआर्डर जारी होते ही निर्माण शुरू कराया जा सकेगा।
23 किमी लंबाई की पाइन लाइन बिछेगी
चंबल राजघाट से मुरैना तक पानी लाने के लिए 23 किमी लंबाई की पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए रूट मैपिंग भी हो चुकी है। इंटेकवैल से शहर तक पानी लाने के लिए पाइप कितने व्यास के लगाए जाएंगे यह भी डीपीआर में स्पष्ट है। इसके अलावा पानी की आपूर्ति के लिए शहर में लगभग 155 किमी लंबाई की नई डिस्ट्रीब्यूशन लाइन भी बिछायी जाएगी।

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