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आयोजन:भगवान जिनेंद्र की वाणी ही जिनागम है: मुनिश्री

मुरैना15 दिन पहले
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भगवान जिनेन्द्र की वाणी ही जिनागम है और जिनागम में जो श्रमण एवं श्रावक के आत्महित का पंथ वर्णित है वही जिनागम पंथ है। भगवान जिनेन्द्र की वाणी को सुनने का एवं सुनाने का पात्र हर कोई नहीं हो सकता है। यह वाणी साक्षात तीर्थंकर भगवंतों के मुख से शोभित होती है। लेकिन इस पंचम काल में साक्षात तीर्थेश भगवंतों का इस भरत क्षेत्र में विरह है, अब उनके विरहकाल में उनकी वाणी को कहने का अधिकारी कौन हो सकता है। इसीलिये आचार्य भगवत कहते हैं। यह प्रवचन स्थानीय दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चतुर्मास करने आए जैन संत ज्ञेय सागर महाराज बुधवार काे धर्मसभा के दौरान दिए।

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