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  • Milk Product Factories Reduced The Price By Rs 11.50 Per Liter, Arbitrary Due To The Price Not Being Fixed Here Like In Maharashtra.

फैक्टरियों की मनमानी:दुग्ध उत्पाद की फैक्टरियों ने 11.50 रुपए प्रति लीटर घटाए दाम, महाराष्ट्र की तरह यहां मूल्य तय न होने से मनमानी

मुरैना2 महीने पहलेलेखक: रजनीश दुबे
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दूध के रेट गिरने से कंपनियाें का दूध बाजार की डेयरियाें पर अधिक आ रहा है। - Dainik Bhaskar
दूध के रेट गिरने से कंपनियाें का दूध बाजार की डेयरियाें पर अधिक आ रहा है।
  • पहली बार गर्मियों के सीजन में दूध के दाम घटे, फैक्टरियों का बहाना- लॉकडाउन के कारण डिमांड घटी
  • पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव बोले- दुग्ध संघ को 40-42 रुपए लीटर में बेचें दूध, निजी कंपनियों के लालच में न आएं किसान

गर्मियों में दूध की किल्लत हाेने पर दाम बढ़ जाते हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि पिछले 20 दिनों में दुग्ध पदार्थ निर्माता कंपनियों ने दूध के दाम प्रति लीटर 11.50 रुपए तक कम कर दिए हैं। दूध कारोबारियों का कहना है कि महाराष्ट्र की तरह मध्यप्रदेश सरकार को भी दूध का समर्थन मूल्य तय करना चाहिए। इधर, किसानों के सामने दूध के अच्छे दाम के लिए सांची भी विकल्प है लेकिन यहां पर भुगतान में देरी की शिकायत होने के कारण यहां दूध बेचने से कतराते हैं।

मालनपुर, धौलपुर व अलीगढ़ समेत फर्रुखाबाद की दुग्ध पदार्थ निर्माता कंपनी इस समय 35 रुपए लीटर के हिसाब से चिलर सेंटरों से दूध खरीद रही हैं। कुछ दिन पहले तक दूध के अधिकतम रेट 47 रुपए लीटर चल रहे थे। लेकिन दुग्ध पदार्थ निर्माता कंपनियों ने दूध के रेट में 1 रुपए लीटर की कटौती से शुरूआत की और अब सीधे 11.50 रुपए लीटर तक की कमी कर दी। दूध के रेट 35 रुपए लीटर रह जाने से चिलर सेंटर दूध सप्लायरों से 33 रुपए लीटर के रेट से दूध क्रय कर रहे हैं। सप्लायर भी दूध देने वाले पशु पालकाें से अब 30 से 31 रुपए लीटर के भाव से दूध खरीदकर ला रहे हैं।

उत्पादन कम होने के बाद भी दाम 47 रुपए से घटाकर 35.50 रुपए लीटर कर दिए

लॉकडाउन से दूध का स्टॉक फंसा
मालनपुर की नोवा कंपनी के मिल्क प्रोक्योरमेंट महेन्द्र कुमार थापक का कहना है कि गर्मी में दुग्ध पदार्थों की मांग कम हो जाता है इसलिए कंपनी में दूध का उपयोग भी कम हो जाता है इसलिए कंपनी ने दूध के रेट 47 रुपए से घटाकर 37 रुपए कर दिए हैं। लॉकडाउन भी दूध के रेट कम करने का एक कारण है। चूंकि लॉकडाउन से पहले कंपनियों से अधिक रेट का दूध खरीदकर मिल्क प्रॉडक्ट का स्टॉक कर लिया लेकिन बिक्री कम हो जाने के कारण बिजनेस में घाटे की स्थिति बन रही है।

20 हजार दूध प्रदाताओं पर असर
दूध के रेट 47 रुपए लिटर से कम होकर 35 रुपए रह जाने का असर जिले के 20 हजार दूध प्रदाताओं की जेब पर पड़ा है। क्योंकि कंपनियों के लिए मिक्स दूध सप्लाई किया जा रहा है। मिक्स दूध में भैंस के अलावा गाय का दूध भेजा जा रहा है। 12 हजार से ज्यादा भैंस व 8 हजार से ज्यादा गाय के पशुपालक दूध बेचकर अपने परिवार की आजीविका चला रहे हैं लेकिन 11 दिन में साढ़े ग्यारह रुपए लिटर की गिरावट ने दूध कारोबारियों की कमर को तोड़ दिया है।

दुग्ध संघ को इसलिए दूध बेचने से कतराते हैं किसान

  • प्रदेश के पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया का कहना है कि मध्यप्रदेश में सरकार ने तो नहीं लेकिन सहकारी दुग्ध संघों ने दूध के रेट तय किए हैं। किसान बढ़ी हुई रेट के लालच में आकर सीजन पर प्राइवेट कंपनियों को दूध प्रदाय करता है। यही कंपनियां बाद में दूध के रेट कम कर देती हैं। किसान को चाहिए कि वह दुग्ध संघ को 40 से 42 रुपए लीटर के रेट में दूध प्रदाय करें।
  • ग्वालियर दुग्ध संघ के सीईओ अनुराग सिंह सेंगर का कहना है कि इस समय हमें दूध का जरूरत है लेकिन दुग्ध संध किसान से सीधे दूध खरीदेगा, ठेकेदारों के माध्यम से नहीं। दुग्ध संघ प्लांट में 23 से 24 प्रकार के टेस्ट लगाकर अच्छा दूध लिया जाता है। भुगतान भी अब 30 दिन के फेर में किए जाने की व्यवस्था बनाई गई है।
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