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चंबल उतराई पर दोहरी नीति:एक घाट पर लगता पैसा, दूसरे घाट पर नहीं, यात्रियों को चुकाना पड़ रहा किराया

मुरैना2 महीने पहले
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पांटून पुल जिससे होता आवागमन - Dainik Bhaskar
पांटून पुल जिससे होता आवागमन
  • ठेकेदार मनमानी करके वसूलते किराया

अटार घाट पर पांटून पुल और स्टीमर को दिया जाता है ठेके पर, स्टीमर संचालन को नहीं हो सका ठेका
जिले में दो घाट हैं जिनसे चंबल नदी को पार किया जाता है। इसमें पांटून पुल व स्टीमर की मदद से नदी पार की जाती है। प्रतिदिन सैकड़ों यात्री उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश व मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश में आते-जाते हैं। अटार घाट पर मध्य प्रदेश सरकार का लोक निर्माण विभाग पांटून पुल बनाता है। दूसरे उसैद घाट पर उत्तर प्रदेश सरकार का लोकनिर्माण विभाग पांटून पुल बनाता है। इन दोनों में अन्तर यह है कि मध्य प्रदेश की ओर से जो पुल निर्माण होता है, या स्टीमर चलाया जाता है, उसके लिए यात्रियों को किराया देना पड़ता है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार का पुल व स्टीमर यात्रियों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क हैं। नुकसान यह होता है कि अटार घाट से गुजरने वाले यात्रियों को अलग से किराया खर्च करके राजस्थान की सीमा में प्रवेश करना पड़ता है।
यहां यह बता दें, कि चंबल नदी पर सबलगढ़ के अटार घाट व अंबाह के उसैद घाट पर 15 अक्टूबर से लेकर 15 जून तक पांटून पुल से तथा 15 जून से 15 अक्टूबर तक स्टीमर से लोग चंबल नदी को पार करते हैं। अटार घाट पर पुल और स्टीमर दोनो का ही ठेका दिया जाता है। ठेका होने पर ठेकेदार नदी उतरने वाले वाहनों से किराया लेता है। सरकारी किराया दर बहुत कम होता है लेकिन यहां आए दिन ठेकेदार द्वारा यात्रियों से अधिक किराया लेने के आरोप लगते रहे हैं। शासन के अनुसार यहां किराया 20 से 30 रुपए तक है लेकिन ठेकेदार 100 से 150 तक वसूल करते हैं। पांटून पुल पर यह अवैध वसूली की जाती तथा स्टीमर से उतराई पर भी। इस बात को लेकर कई बार यात्रियों ने शिकायत की है। एक बार तो इस अवैध वसूली की शिकायत टैटरा थाने पर भी की जा चुकी है। इस पर टैटरा थाना पुलिस ने कार्यवाही भी की थी। यात्रियों को इस पुल को पार करने पर खासा किराया देना पड़ रहा है। दूसरी तरफ अंबाह से उसैद घाट पर उत्तर प्रदेश सरकार का लोकनिर्माण विभाग पाटूंन पुल और स्टीमर का संचालन कराता है। यहां भी लगभग तीन साल पहले तक ठेका दिया जाता था। लेकिन बीते तीन सालों से इस पुल को यात्रियों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क कर दिया गया है। चाहे पांटून पुल हो या स्टीमर, यात्रियों को बिना किराया चुकाए चंबल पार करा दी जाती है। इससे यहां अवैध वसूली के आरोप नहीं लग पाते हैं।
अटार पर नहीं हो सका स्टीमर चालू
अटार घाट पर हर साल की तरह इस बार भी स्टीमर का संचालन नहीं किया जा सका है। इसके पीछे टेंडर प्रक्रिया को पूरी न होना बताया जा रहा है। स्टीमर के लिए टेण्डर 15 जून को हुए थे लेकिन ठेकेदारों ने शासकीय दर से भी कम दर लगाई तो टेण्डर नहीं हो सके। घाटा देखते हुए इस प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया। स्टीमर का संचालन जनपद पंचायत सबलगढ़ टेण्डर जारी करता है। अब जनपद पंचायत फिर से इसके लिए नई प्रक्रिया शुरु करेगा, जिससे सरकार को घाटा न हो।
उसैद घाट पर स्टीमर चालू, अटार घाट पर पांटून पुल बंद
उसैद व अटार दोनों ही घाटों पर पांटून पुल से अावागमन कराया जाता है। यह आवागमन 15 जून तक ही कराया जाता है। बारिश से पहले इन पुलों को खोल दिया जाता है। उसैद घाट पर समय पर पुल खुल गया और स्टीमर भी चलने लगा। लेकिन अटार घाट पर न तो पुल खोला गया और न ही ठेका न होने से स्टीमर संचालन शुरु हो सका। फिलहाल एक सप्ताह तक और इसी पांटून पुल से आवागमन कराए जाने की बात कही जा रही है। बारिश होने पर जल स्तर बढ़ने से पुल से आवागमन नहीं हो सकेगा, इसलिए इसे हटा दिया जाएगा।