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हीला-हवाली:मिनी स्मार्ट सिटी नहीं बन पाएगा मुरैना, बजट 13.5 कराेड़ का, टैक्स वसूलने की तैयारी नहीं

मुरैना20 दिन पहले
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  • नगर निगम का बाेर्ड नहीं होने के कारण शहर विकास के निर्णय नहीं हो पा रहे हैं

2021-22 में मुरैना को मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए नगर निगम ने 13.5 करोड़ रुपए व्यय करने का संकल्प लिया है, लेकिन इसकी काेई कार्य योजना अब तक निगम ने तैयार नहीं की है। इधर शहर विकास के लिए 50 कराेड़ के टैक्स वसूली के लिए भी नए ठेके देने से लेकर कालातीत टैक्स वसूलने का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इस हालात में इतने गंदे शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कल्पना को कैसे साकार किया जा सकेगा।

नगर निगम ने मुरैना शहर को मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने पर फोकस किया है। इसके लिए नए बजट में 13.5 करोड़ रु. का प्रावधान किया है। इसमें शहर के खास इलाकों को चिह्नित कर उन्हें विकसित किया जाएगा। मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में मुरैना की पुरासंपदा को संरक्षित करने से लेकर उसे सैलानियों के लिए तैयार करने का काम किया जाएगा। शहर के प्रमुख मार्गों की सड़कों को बेहतर बनाने से लेकर उनके किनारे भूमिगत नालों का निर्माण कराने व स्ट्रीट लाइट की व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम ने अभी तक कार्ययोजना नहीं बनाई है।

शहर को मिनी स्मार्ट सिटी बनाने के मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने अभी तक शहर के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों समेत जन प्रतिनिधियों व व्यापारियों से कोई अभिमत नहीं लिया है। प्रशासन के साथ भी सांसद की कोई बैठक अब तक इस मुद्दे पर नहीं हुई है। इस हाल में बजट जब शासन से मंजूर होकर नहीं आएगा तो विकास के लिए निगम के खजाने से पैसा लेना होगा लेकिन आलम है कि निगम कोष में इतना फंड नहीं जिससे शहर काे मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में संजाया व संभारा जा सके। अमृत योजना मद से नगर निगम सूत्र सेवा के तहत इंटरसिटी व इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू कराने की बात कह रहा है। इससे लोगों को नगर निगम सीमा के 5 किमी के एरिया में आवागमन के लिए निगम अनुबंधित बसें उपलब्ध होंगी और इंटरसिटी बसों की सुविधा मिल सकेगी।

कैसे वसूल होगा 50 करोड़ रुपए का टैक्स
ननि ने अपनी आय बढ़ाने के लिए 50 करोड़ रुपए का टैक्स जनता से वसूलने की बात कही है। इसमें संपत्तिकर 6 से 10 फीसदी तक बढ़ाकर वसूल किया जाएगा। अब 6 से 15 हजार के स्लैब वाले कर दाताओं से संपत्ति कर 6 फीसदी बढ़ाकर लेने की बात तो कही गई है, लेकिन इसके लिए कर संग्रहणकर्ताओं की ड्यूटी अब तक तय नहीं की गई है। नए कर में जनता से 23 लाख की वसूली ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन कर के माध्यम से किया जाना है। इसमें नगर निगम की दुकानों से 7 करोड़ का सालाना किराया वसूल किया जाना है। 9 करोड़ की राजस्व वसूली लाइसेंस फीस, भवन निर्माण की अनुमति शुल्क, विकास शुल्क व उपभोक्ता प्रभार से की जाना है।

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