छौंदा गांव के शमशान से हटेगा अतिक्रमण:नगर निगम शमशान में बनवाएगा चिता जलाने के लिए टीन शेड

मुरैना4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
शमशान में लाश जलाते लोग - Dainik Bhaskar
शमशान में लाश जलाते लोग
  • जिला प्रशासन भेजेगा अधिकारियों की टीम, फैक्ट्रियों के कचरे, गंदे पानी व अतिक्रमण से मिले शमशान को निजात

शहर से सटे छौंदा गांव के निवासियों को अब साफ-सुथरा शमशान मिलेगा। उनके शमशान से अब फैक्ट्रियों द्वारा किया गया अतिक्रमण भी हटाया जाएगा। इसके साथ ही नगर निगम शमशान में एक टीन शेड युक्त चबूतरा बनवाएगा जिससे वहां बारिश में भी शवों को जलाया जा सके।
यहां बता दें, दैनिक भास्कर ने 18 सितंबर को शीर्षक, यहां अंतिम संस्कार एक चुनौती: मुरैना शहर से सटे छौंदा गांव में शव जलाने के लिए नहीं जगह, जहां पचास साल से शव जलते हैं, वहां दो फैक्ट्रियों का भर जाता है पानी, से खबर छापी थी। इस पर नगर निगम ने इस मामले को संज्ञान में लिया है तथा वहां अतिक्रमण हटाने व चबूतरा बनाने का निश्चय किया है। यहां बता दें, कि छौंदा गांव की जनसंख्या 1600 के लगभग है। इस गांव में अगर किसी की मृत्यु हो जाती है तो, उसके शव को जलाना एक चुनौती बन जाता है। इसका कारण यह है कि इस गांव का जो शमशान है उसकी जमीन पर कुछ फैक्ट्री संचालकों ने कब्जा कर लिया है। उन फैक्ट्रियों का गंदा पानी शमशान की जमीन पर भर जाता है। जिसकी वजह से छौंदा गांव के लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गंदे व सकरे रास्ते से निकलते लोग
गंदे व सकरे रास्ते से निकलते लोग

बारिश में घंटों घर में रखे रहते शव
छौंदा गांव के लोगों ने बताया कि बारिश के सीजन में वह शव को घंटो अपने घर में रखे रहते हैं। क्योंकि उन्हें बखूबी पता है कि शमशान में जलाने के लिए न चबूतरा है और न ही टीन शेड। यहां तक कि जलाने के लिए जमीन पहले साफ करना पड़ती है, उसके बाद शव को जलाया जाता है। साफ करने में ही काफी समय लग जाता है। बारिश में शमशान में पानी भर जाता है जिसकी वजह से शव को जलाना एक चुनौती बन जाता है।
बारिश में जलाई थी लाश
दो दिन पहले छौंदा गांव की गुड्‌डी बाथम नाम की एक बुुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी। परिजन उसे जलाने आए लेकिन बारिश होने के कारण उन्हें बहुुत परेशानी हुई। लाश को जलाने में परिजनो को बहुत परेशानी हुई तथा उन्होंने यह बात बताई थी।

इस प्रकार चिंता जलाते लोग
इस प्रकार चिंता जलाते लोग

निकलने तक का नही रास्ता
लोगों ने बताया कि हालत यह है कि गांव में मरने के बाद जब किसी के शव को लेकर लोग जाते हैं तो उन्हें नाले के किनारे, गंदगी में से होकर गुजरना पड़ता है। शमशान से लगी जूता-चप्पल फैक्ट्रियों का सारा कचरा रास्ते पर फैंक दिया जाता है, जिसकी वजह से लोग अर्थी को लेकर निकल नहीं पाते हैं।

नाले के किनारे जलाते लाश
नाले के किनारे जलाते लाश

कहते हैं अधिकारी
हमारे संज्ञान में मामला आया है। हम अधिकारियों की टीम भेजकर इस मामले की जांच करा रहे हैं। जिन फैक्ट्रियों ने शमशान की जमीन पर कब्जा किया है, उस अवैध कब्जे को हटवाया जाएगा। इसके बाद शमशान में सफाई कराकर वहां एक टीन शेड युक्त चबूतरा भी बनवाया जाएगा जिससे शवों को जलाया जा सके।
संजीव जैन, निगमायुक्त, मुरैना

खबरें और भी हैं...