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लालच ऐसा कि, मरे मजदूरों को किया जिंदा:जो मजदूर मर गए, जिन्होंने कभी काम नहीं किया, उनके नाम से पंचायतों ने निकाला पैसा, 40 मरे मजदूरों के नाम से निकालते रहे पैसा

मुरैनाएक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • 1800 से अधिक फर्जी मनरेगा मजदूर बनाए और उनके नाम से भुगतान निकाला

जिले की पंचायतों में मरे हुए मजदूरों, जिन्होंने कभी काम ही नहीं किया उनको जिंदा बताकर उनके नाम से भुगतान प्राप्त करने का मामला सामने आया है। यह फर्जीवाड़ा कुंअरपुरा पंचायत में किया गया बताया जाता है। यहां 12 से 14 साल पहले मर चुके मजदूरों को जिंदा बताकर उनके नाम से भुगतान निकाला गया है। इसके साथ ही अन्य पंचायतों द्वारा लगभग 1800 फर्जी मजदूरों के द्वारा मनरेगा में उनके नाम से भुगतान करने का मामला सामने आया है।
यहां बता दें, कि कई मजदूर तो ऐसे हैं जो कभी मनरेगा के तहत कभी मजदूरी करने ही नहीं गए उनके नाम से भुगतान किया गया है। जिन मजदूरों की इसकी भनक लग गई तो वह अब अपने हक का पैसा लेने के लिए जोर लगा रहे हैं।
इस प्रकार हो रहा फर्जीवाड़ा
जिले के कुंअरपुर ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़ा बताया जाता है। यहां पंचायत की मतदाता सूची में 1250 लोगों के नाम दर्ज हैं, लेकिन पंचायत ने जॉबकार्ड धारी मजदूरों की संख्या 3200 से अधिक कर दी है। लगभग 1800 फर्जी मजदूर बनाकर उनके नाम से हर माह लाखों रुपए का भुगतान किया जा रहा है। उदाहरण के लिए गांव के जगदीश सिंह पुत्र चौबे सिंह गुर्जर, उनकी पत्नी उर्मिला,भाई अमरेश सिंह, वकील सिंह व भाई की पत्नी मिथलेश सिंह कभी भी मनरेगा की मजदूरी करने नहीं गए। इसके बावजूद जगदीश सिंह व उनके परिवार के उपरोक्त सदस्यों के नाम से बीते दो वर्ष में डेढ़ लाख रुपए से अधिक का भुगतान मनरेगा के तहत निकाला जा चुका है। जगदीश सिंह का कहना है कि गांव में दिलीप नाम का कोई व्यक्ति नहीं है, जबकि दिलीप के नाम से जॉबकार्ड बनाया गया है और इस फर्जी जॉब कार्ड से मजदूरी देकर उनकी पत्नी उर्मिला के खाते मेें 40 हजार रुपए डाले गए हैं। इस राशि को सरपंच व सचिव ने निकालकर आपस में बांट लिया है।
नहीं की गई जांच
कुंअरपुरा गांव के निवासी जगदीश सिंह पुत्र चौबे सिंह ने नवंबर 2020 में इस बात को लेकर जनपद पंचायत में शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि सरपंच व सचिव ने धर्मा का पुरा तथा कुंअरपुरा में पंचायत द्वारा कराए गए कार्यों में गड़बड़ी की है। इसके बाद पहाड़गढ़ के तत्कालीन जनपद CEO ईश्वरचंद वर्मा ने 30 दिसंबर को संबंधित एई को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद आधा साल बीत जाने के बाद भी जांच नहीं की जा सकी।
40 मरे मजदूरों के नाम से किया भुगतान
कुंवरपरा पंचायत में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया जाना बताया जा रहा है। यहां 12 वर्ष पहले मर चुके रामेश्वर पुत्र चंदन सिंह गुर्जर, 14 वर्ष पहले मृत हो चुके रवि पुत्र रामलखन गुर्जर, 7 वर्ष पहले मृत हो चुके उम्मेद सिंह पुत्र हरिमोहन गुर्जर के नाम से जॉब कार्ड बनाकर तीन साल तक उन्हें मनरेगा में काम करना बताया गया तथा उनके नाम से हर साल लगभग 20 हजार रुपए भुगतान निकाला जा रहा है। इसी प्रकार बाबू पुत्र किलोल सिंह, शंकर पुत्र हीरा, किशनलाल पुत्र झांगुरिया, सुजान सिंह पुत्र रामभरोसी, जंगजीत पुत्र पंछी, कुंदन पुत्र नकटू, तेजसिंह पुत्र सुखदेव, मोतीराम पुत्र धनपाल, रामप्रसाद पुत्र राजाराम सहित चालीस मजदूरों के नाम से भुगतान कर उस राशि का बंदर बांट किया जा रहा है।

करेंगे सख्त कार्रवाई

मुझे मामले की जानकारी नहीं है। मामला गंभीर है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। जो दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रोशन सिंह, जिला पंचायत, CEO

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