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पीएम यानि ‘प्राइम मैनेजमेंट’ आवास:‘गरीब’ पूर्व नपाध्यक्ष-सीएमओ, रिटायर्ड अकाउंट ऑफिसर के बेटे और पूर्व पार्षदों के परिजन को दे दिए पीएम आवास

मुरैना13 दिन पहलेलेखक: सुमित दुबे
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  • 2016 में तैयार सूची में अधिकांश रसूखदार, न जांच न पड़ताल, सीधे दिल्ली भेज दी सूची
  • 1069 लोगों को स्वीकृत किए आवास, उनमें 50% अपात्र, किराए के घरों में रहने वाले प्रतीक्षा सूची में
  • रोचक...पिता के नाम से गली, खुद पूर्व पार्षद फिर भी स्वयं व परिजन पीएम आवास के दावेदार

गरीबों को खुद का घरौंदा मिल सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना के तहत सस्ते घर बनाकर देने का जो प्लान तैयार किया था, उसे रसूखदारों ने पीएम यानि ‘प्राइम मैनेजमेंट आवास’ स्कीम में तब्दील कर दिया।

हालात यह है कि जो गरीब किराए के घरों में रह रहे हैं और दो-दाे साल पहले सस्ते मकान के नंबर लगाए, उनके नाम आज तक सूची में नहीं आए और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष, रिटायर्ड अकाउंट ऑफिसर, वर्तमान सीएमओ के निगम कर्मचारी पुत्र, पूर्व पार्षद व पूर्व मंडी अध्यक्ष के परिजन सहित सरकारी कर्मचारी, रिटायर्ड पेंशनर्स के बेटों, पत्नी को आवास आवंटित कर दिए गए।

पात्रता श्रेणी में शामिल होने बीपीएल कार्ड तक बनवा लिए

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे लोग जिनके पास खुद की कोई जमीन-मकान नहीं, बीपीएल कार्ड धारक हैं और किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। वहीं सरकारी नौकरी, पेंशनर्स धारक इस सूची में शामिल नहीं हो सकते लेकिन ऐसे लोगों ने अपनी पति-पत्नी व बच्चों के नाम से फर्जी शपथ पत्र लगाकर आवास हासिल कर लिए।

न जांच न पड़ताल, सीधे दिल्ली भेज दी सूची

पीएम आवास योजना में 2016 में जब सूची तैयार की गई, तब अपना निकाय-अपनी सरकार वाली कहावत पर अमल किया गया। जिसने भी आवेदन कर अपनी जुगाड़ लगा ली, उनके नाम सूची में शामिल कर लिए गए। जबकि जरूरतमंद गरीब आज भी नगर निगम के दफ्तर में चक्कर लगाकर पूछते हैं कि साहब हमारा नंबर कब आएगा।

जानिए कैसे जरूरतमंद गरीब आवास के लिए भटक रहे

  • 1. शहर के गणेशपुरा में किराए के घर में रहने वाली मीना पत्नी सूर्यकुमार श्रीवास्तव व उनकी बेटी स्वीटी श्रीवास्तव ने पीएम आवास के लिए इस उम्मीद में 2 फॉर्म डाले कि शायद एक नंबर लग जाए। लेकिन 2 साल बीतने के बाद भी आज पूरा परिवार निगम के चक्कर लगा रहा है।
  • 2. शहर के गणेशपुरा गोस्वामी रोड पर ही रहने वाले चिरोंजी पुत्र कप्तान बाथम मजदूरी करते हैं। किराए के मकान रहने वाले चिरोंजी के पिता रिक्शा चलाते थे और 30 साल से किराए के मकान मे रह रहे हैँं। हालात यह है कि 2 साल पहले आवेदन जमा करने के बाद भी उनके नाम पीएम आवास की सूची में नहीं आए।

पिता के नाम से गली, खुद पूर्व पार्षद, फिर भी नाम पीएम आवास की सूची में

शहर के गोपालपुरा में रहने वाले हरिभान सिंह भदौरिया पार्षद रह चुके हैं। इनके पिता स्व. माधौसिंह भदौरिया के नाम पर ही गली का नाम है। फिर गरीब लोगों के लिए बनाए गए पीएम आवास योजना की सूची में इनका नाम 939 नंबर पर दर्ज है। इनके ही परिजन सहदेव सिंह भदौरिया ने अपनी पत्नी संगीतादेवी का नाम पीएम आवास की सूची में दर्ज करवा लिया।

सूची देखकर निरस्त करेंगे आवंटन

पीएम आवास की सूची 2016 में तैयार हुई थी। अगर उसमें रसूखदार व अपात्र हितग्राहियों के नाम हैं तो उस सूची की जांच कराते हैं। जो भी अपात्र होंगे उनके नाम इस सूची से हटाकर पात्रों को जोड़ेंगे। -अमरसत्य गुप्ता, आयुक्त नगर निगम

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