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असर:इटेलियन पद्धति से बारहमासी सब्जी की पौध उगाने 18 करोड़ का प्रोजेक्ट 4 साल पहले मंजूर, उत्पादन अब तक शुरू नहीं

मुरैना15 दिन पहले
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नूराबाद की नर्सरी में क्षतिग्रस्त नेटहाउस की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। - Dainik Bhaskar
नूराबाद की नर्सरी में क्षतिग्रस्त नेटहाउस की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
  • उद्यानिकी विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते 5 जिलाें के 5 लाख किसानों को नहीं मिल पा रही कम कीमत में पौध

चंबल व ग्वालियर संभाग के 5 जिलों के किसानों को सस्ती रेट पर सब्जियों की पौध उपलब्ध कराने के लिए नूराबाद में उद्यानिकी विभाग का प्रोजेक्ट 4 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। 18 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में इटैलियन पद्धति से सब्जी की पौध उगाने का काम शुरू किया जाना था लेकिन भोपाल की आर्सेनिक कंपनी के काम छोड़कर भाग जाने से किसानों काे इस परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

अब तक छह करोड़ खर्च
उद्यानिकी विभाग इस प्रोजेक्ट पर अब तक छह करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च कर चुका है। तीन करोड़ रुपए से से अधिक के काम हाउसिंग बोर्ड ने नर्सरी परिसर में कराए हैं। प्रोजेक्ट 18 करोड़ रुपए का है। इसके बाद भी मुरैना, भिंड, श्योपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोक नगर व गुना के किसानों को बेमौसम की सब्जियों की पौध सरकारी रेट 1.48 रुपए पर नहीं मिल पा रही है।

8 जिलों के 5 लाख किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास
नर्सरी प्रोजेक्ट के माध्यम से उद्यानिकी विभाग छोटे व मध्यम किसानों की आय बढ़ाना चाहता है। इसके लिए मुरैना जिले के नूराबाद में 18 करोड़ रुपए की लागत से वातानुकूलित नर्सरी काे विकसित कराया लेकिन चंबल व ग्वालियर जिले के पांच लाख किसानों काे इस प्रोजेक्ट का काेई लाभ नहीं मिल सका।

छोटे किसानों को इस प्रोजेक्ट से लाभ
इटैलियन पद्धति से सब्जी की पौध उगाने में कम समय लगता है। पौध की लागत से लेकर अन्य कोई खर्च बारहमासी सब्जी की पैदावार में नहीं आता है। केन्द्र सरकार का मानना है कि खरीफ व रवी सीजन की फसलें अतिवृष्टि, ओला व बाढ़ के कारण नष्ट हो जाती है जिससे उन्हें फसल की लागत का मूल्य भी नहीं मिल पाता है। इसलिए दो हैक्टेयर जमीन के मालिक किसानों को कैश क्रॉप के रूप में अपने खेतों में उद्यानिकी की फसलों की उत्पादन बढ़ाना चाहिए ताकि फसल बेचने के साथ ही उनकी जेब में पैसा सीधे आ सके।

अनुबंध का किया उल्लंघन
उद्यानिकी विभाग ने नर्सरी प्रोजेक्ट के लिए आर्सेनिक कंपनी से जो अनुबंध किया था, कंपनी के कारिंदों ने उसका पालन नहीं किया। कंपनी को तीन साल की अवधि में एक करोड़ 20 लाख पौध नर्सरी में तैयार करना थी लेकिन कंपनी के लोगों ने पौध उगाने के काम में कोई रुचि नहीं ली। इस कारण चंबल व ग्वालियर संभाग के आठ जिलों के किसान बेमौसम की सब्जियां उगाकर अपनी आय काे नहीं बढ़ा पाए। प्रोजेक्ट फेल होने की दशा में उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने एक हैक्टेयर क्षेत्र में भिंडी व आठ हैक्टेयर खुली जमीन पर मटर, भिंडी, लौकी व बैगन का बीज तैयार किया गया था।

जानिए...ये तीन बातें जो किसानों के लिए जरूरी

  • बारहमासी सब्जियां उगाकर किसान उन्हें महानगरों व मॉल में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इसके लिए किसानों को बारहमासी सब्जियों की पौध सस्ती रेट पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
  • नर्सरी से मिलने वाली पौध बाजार की पौध की तुलना में ढाई रुपए प्रति पौध के मान से सस्ती है। इस कारण यदि पौध खराब होकर नष्ट भी जाती है ताे किसानों को बड़े नुकसान की स्थिति नहीं बनेगी।
  • सब्जियों की पौध कम समय में उत्पादन देने लगती है, इसलिए सब्जी की फसल को कैश क्रॉप भी कहा जाता है। किसान इधर मॉल में बारहमासी सब्जी बेचे, उधर दूसरे काउंटर से उसे नकद भुगतान की सुविधा मिलती है।
  • फार्म के नवनिर्मित पाली हाउस की हाईटेक नर्सरी में सब्जियों के पौधे तैयार हो सकते हैं जिनका वितरण किसानों में किया जाएगा। इसके लिए पौध तैयार करने का ठेका उद्यानिकी विभाग को बड़े स्तर पर देना होगा। इसके लिए पॉली नेट हाउसों की मरम्मत कराना होगी।
  • हर मौसम की सब्जी के पौधे नूराबाद नर्सरी में तैयार मिल सकेंगे। टमाटर, बैगन, लौकी, फूलगोभी, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च की नर्सरी में सिर्फ 20 दिन में पौधे निकलकर बाजार के लिए तैयार हो जाएंगे। यह पौधे कम मूल्य के तथा रोग मुक्त होंगे।
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