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जनता की आवाज पर केंद्र सरकार की मुहर:रेलवे ने दिया 150 करोड़ रुपए का बजट, मिट्टी का ट्रैक और छोटे पुल-पुलिया का काम शुरू हो सकेगा

मुरैना2 महीने पहलेलेखक: रजनीश दुबे
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  • अब बजट 25 करोड़ से बढ़कर हुआ 175 करोड़ रुपए
  • पुणे की कंपनी को निर्माण शुरू करने से पहले नैरोगेज ट्रैक हटाना है, अब रेलवे बोर्ड को जल्द से जल्द रेलवे ट्रैक उखाड़ने की अनुमति जारी करनी होगी

ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज रेल प्रोजेक्ट के लिए रेलवे बोर्ड ने 150 करोड़ का बजट और जारी कर दिया है। इस प्रकार अब 25+150=175 करोड़ रुपए के फंड से बानमोर से सबलगढ़ के बीच बड़ी रेल लाइन के लिए मिट्‌टी का ट्रैक तैयार करने व बड़े-छोटे पुल बनाने का काम शुरू कराया जा सकेगा। इस परियोजना पर काम कर रहीं पुणे व झांसी की कंपनियों को उम्मीद है कि इस साल और भी बजट मिल सकेगा।

175 करोड़ रुपए की फंडिंग से रेलवे अब जमीन अधिग्रहण के बदले प्रशासन को मुआवजा के लिए भी पैसा जमा कराएगी। प्रशासन ने 100 करोड़ का बजट मुआवजा के लिए रेलवे से मांगा है लेकिन अफसरों का कहना है कि फिलहाल जितना पैसा देना संभव होगा उतना राजस्व विभाग को दिया जाएगा। शेष राशि से मिट्‌टी का ट्रैक तैयार कराने का काम तेज कराया जाएगा। चूंकि रायरू से लेकर सबलगढ़ तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का ठेका पुणे की आईएससी कंपनी व झांसी की घनाराम इंजीनियरिंग को दिया गया है इसलिए दोनों ठेकेदारों से अर्थवर्क शुरू कराने के लिए कहा गया है।

किस कंपनी को क्या काम करना है

पुणे की आईएससी निर्माण एजेंसी को बानमोर से सबलगढ़ तक 80 किमी लंबाई में नैरोगेज ट्रैक हटाने, उसके स्थान पर बड़ी लाइन का अर्थट्रैक तैयार करने व सुमावली से सबलगढ़ तक 55 किमी लंबाई में 106 छोटी पुलिया बनाने का काम करने के लिए 244 करोड़ रुपए के टेंडर पर कार्यादेश दिया गया है। यह कंपनी ग्वालियर से सबलगढ़ के बीच 10 बड़े पुलों का निर्माण भी कराएगी। इसके लिए 180 करोड़ के टेंडर पर काम कराया जाएगा। जिसमें बानमोर के पास बड़े पुल का निर्माण कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। झांसी की घनाराम इंजीनियरिंग कंपनी रायरू से सुमावली तक बड़ी रेल लाइन के लिए अर्थट्रैक तैयार करने का काम कर रही है। इस रूट पर नैराेगेज ट्रेक से 4 से 6 मीटर की दूरी पर नया ट्रैक बिछाया जाएगा। इसलिए घनाराम कंपनी अर्थट्रैक तैयार करने के काम को अब गति प्रदान करेगी क्योंकि भुगतान के लिए अब बजट संकट जैसी स्थिति नहीं रहेगी।

रेलवे ने अब तक नहीं दी ट्रैक हटाने की अनुमति

ब्रॉडगेज रेल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अफसरों से लेकर रेलवे के ठेकेदारों का कहना है कि बजट बढ़ाकर 175 करोड़ कर दिया लेकिन काम करने के लिए सबसे पहले नैरोगेज रेल ट्रैक हटाने की जरूरत है। मध्यप्रदेश शासन की अनापत्ति के 10 महीने बाद भी रेलवे बोर्ड ने बानमोर से सबलगढ़ तक नैरोेगेज ट्रैक डिसमेंटलिंग की अनुमति अब तक जारी नहीं की है। जब तक पुरानी रेल लाइन हटाई नहीं जाएगी तब तक ठेकेदार उस एलाइनमेंट पर नया काम शुरू नहीं हो सकेगा क्योंकि नैरोगेज रेल लाइन की जगह ही बड़ी रेल लाइन बिछाई जाएगी। पुणे की निर्माण एजेंसी का कहना है कि नैराेगेज ट्रैक हटाने की अनुमति मिलने के 3 दिन बाद उनकी कंपनी छोटी रेल लाइन को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।

ब्रॉडगेज रेल लाइन होने से आएंगे उद्योग, बढ़ेगा राेजगार

ग्वालियर से श्योपुर के बीच बड़ी रेल लाइन तैयार होने के बाद उद्योगपति अपनी इंडस्ट्री लगाने के लिए मुरैना आने का मन बनाएंगे। 2004 में नागपुर की कंपनी कैलारस के कुटरावली में सीमेंट फैक्टरी लगाने का एमओयू साइन कर गई लेकिन ट्रांसपोर्टेशन की बेहतर सुविधा न होने के कारण कंपनी ने सीमेंट उद्याेग नहीं लगाया। मुम्बई महाराष्ट्र की पारले एग्रो कंपनी बानमोर क्षेत्र में पेयपदार्थ का बड़ा प्लांट स्थापित करना चाहती है। ग्वालियर से श्योपुर ब्रॉडगेज ट्रैक का काम शुरू होने की दशा में यह कंपनी 350 करो़ड़ की देश की सबसे बड़ी सॉफ्ट ड्रिंक यूनिट मुरैना जिले में शुरू करने का मन बनाएगी। नए उद्योग आने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

यहां बनेंगे बड़े 10 पुल

  • बानमोर में सांक नदी पर
  • सुमावली से पहले पतियार नदी पर
  • सुमावली से जौरा के बीच आसन नदी पर
  • जौरा स्टेशन से पहले मुरैना ब्रांच कैनाल पर
  • जौरा में प्रवेश से पहले रेलवे क्रासिंग पर
  • जौरा से सिकरौदा के बीच सोन नदी पर
  • कैलारस में प्रवेश से पहले 5 एल नहर पर
  • कैलारस-सेमई के बीच नेंपरी में क्वारी नदी पर
  • सबलगढ़ स्टेशन से पहले बड़ी नहर पर
  • सबलगढ़ स्टेशन के बाद खार नाला पर।
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