आप छोड़कर बसपा के साथ:आम आदमी पार्टी से पिछला विस चुनाव लड़ चुके राजौरिया फिर बसपा में आए

मुरैनाएक वर्ष पहले
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  • वर्ष 2013 में बसपा व 2018 में आम आदमी पार्टी से मुरैना विस से लड़ चुके हैं चुनाव

वर्ष 2013 में बहुजन समाज पार्टी व वर्ष 2018 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर मुरैना विधानसभा से चुनाव लड़ चुके रामप्रकाश राजौरिया ने मंगलवार को भाजपा का साथ छोड़कर बहुजन समाज पार्टी ज्वाॅइन कर ली। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर उन्हें मान-मनौव्वल कर भारतीय जनता पार्टी में ले आए थे। लेकिन उन्होंने आगामी उपचुनाव को देखते हुए दोबारा बसपा का दामन थाम लिया है। यहां बता दें कि ब्राह्मण समाज के रामप्रकाश राजौरिया वर्ष 2013 में भाजपा के पूर्वमंत्री रुस्तम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़े थे और मात्र 1400 वोटों के अंतर से हार गए थे। वहीं वर्ष 2018 में बसपा से उनकी टिकट की दोबारा दावेदारी थी। लेकिन एन वक्त पर पार्टी ने उनके ही समधी बलवीर सिंह डंडौतिया को मुरैना विधानसभा से प्रत्याशी बना दिया था। इससे खफा होकर रामप्रकाश राजौरिया ने आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। आगामी उपचुनाव के मद्देनजर उन्होंने मंगलवार को अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ बसपा जॉइन कर ली। इस दौरान उनके साथ जिला संगठन मंत्री बैजनाथ बौद्ध, जिला महासचिव इंजी. दीपेंद्र बौद्ध, विजय सोलंकी सहित अनेक बसपा पदाधिकारी मौजूद थे।

बसपा से चुनाव लड़े तो बिगड़ेंगे भाजपा-कांग्रेस के समीकरण
रामप्रकाश राजौरिया मुरैना विधानसभा में होने वाले उपचुनाव में बसपा से टिकट लेकर चुनाव मैदान में कूंद सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ आए पूर्व विधायक रघुराज सिंह कंषाना व कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे प्रत्याशियों के लिए राजौरिया परेशानी खड़ी कर सकते हैं। क्योंकि बसपा के टिकट पर उन्हें अनुसूचित जाति के साथ-साथ ब्राह्मण व क्षत्रिय वोट का लाभ मिल सकता है।

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