पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • Morena
  • Retired Bills Of His Own Employee Were Not Paid, Girl Had To Get Married, Father Did Not Have Money, Heart Attack In Sorrow, Death

वन विभाग की लापरवाही चरम पर:अपने ही कर्मचारी के सेवानिवृत्त देयकों का नहीं किया भुगतान, लड़की की शादी करना थी, पिता के पास पैसा नहीं था, गम में आया हार्ट अटैक, मौत

मुरैनाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मृतक ओमप्रकाश का शव ले जाते लोग - Dainik Bhaskar
मृतक ओमप्रकाश का शव ले जाते लोग
  • अपनी बेटी के हाथ पीले करने का सपना आंखों में लिए चल बसे ओमप्रकाश शांडिल्य

वन विभाग की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के रिटायर कर्मचारी ओमप्रकाश शांडिल्य एक साल पहले ही सेवानिवृत्त हो गए थे। विभाग ने उनके देयकों का भुगतान नहीं किया। घर में बैठी जवान बेटी की शादी करना थी। पैसा पास नहीं था। हर वक्त चिंता में रहते थे। आज, उसी चिंता में उन्हें हार्ट अटैक आया और मौत हो गई। अपनी बेटी की शादी की तमन्ना लिए वह इस संसार से विदा हो गए।
जिस विभाग के अधिकारियों की जीवन भर सेवा की। उन्हें पानी पिलाया। उनके हर हुकुम को सर आंखों पर लिया। हुक्म उदूली की। उसी विभाग ने रिटायरमेंट के बाद उनकी तरफ से आंखे फेर लीं। यहां तक कि सेवानिवृत्ति के बाद प्राप्त होने वाले देयकों तक का भुगतान नहीं किया। पेंशन प्रकरण तक नहीं बनाया। घर में जवान बेटी की शादी करना थी। शादी के लिए पैसा चाहिए था। पैसा विभाग दे नहीं रहा था। इसी सोच में वह जी रहे थे। बार-बार विभाग से भुगतान के लिए कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आज दोपहर सोचते-सोचते हार्ट अटैक आ गया। मुंह खुला का खुला रह गया। परिजन जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने कहा यहां क्यों लाए हो, यह तो चल बसे हैं।
दो बेटियों व एक बेटे के बिलखता छोड़ गए ओमप्रकाश
सबलगढ़, निवासी ओमप्रकाश शांडिल्य के चार बच्चे हैं। एक बेटा व तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी की शादी वह नौकरी में रहते ही कर चुके थे। बीच वाली बेटी की शादी करना थी। शादी के लिए लड़का देख लिया था। लड़के वाले कह रहे थे कि, शादी कब करोगे। बेचारा बाप, भला क्या कहे। पैसा पास नहीं था। मजबूरी में शादी को टाल रहा था। जिस विभाग की उसने जिंदगी भर सेवा की, उसी ने उसके देयकों को लटका रखा था। दिन भर इसी सोच में रहता था। कभी किसी साथी कर्मचारी के यहां जाता तो कभी दूसरे कर्मचारी के यहां। एक ही बात कहता, देयकों का भुगतान हो जाता तो, बेटी के हाथ पीले कर देता। लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। सोचते-सोचते उसकी आंखे मुंद गई और अपनी बेटी के हाथ पीले करने का सपना लिए वह इस संसार से विदा हो गया।
20 कर्मचारियों के लटके हैं देयक
अकेले ओमप्रकाश शांडिल्य नहीं। बल्कि विभाग के ऐसे 20 कर्मचारियों के देयक अधर में लटके हैं, जिन्हें एक साल से अधिक सेवानिवृत्त हुए हो गया है। विभाग ने उनके देयकों का भुगतान नहीं किया है, न ही पेंशन प्रकरण बनाए। बेचारे कर्मचारी अपने ही विभाग में अपने ही अधिकारियों के सामने अपने देयकों व पेंशन प्रकरणों के लिए हाथ पसारे भटक रहे हैं।
इनका भी नहीं किया भुगतान
परशुराम कॉलोनी निवासी मुरारी, विभाग मे वाहन चालक थे। एक वर्ष पहले रिटायर हो गए। अभी तक उनके पेंशन प्रकरण व देयकों का भुगतान नहीं हुआ। विभाग के क्लर्क रामनिवास दण्डौतिया 30 जून 2020 को रिटायर हुए थे। आज तक वह भी पेंशन व देयकों के लिए भटक रहे हैं। राजेन्द्र प्रसाद कटारे भी एक माह से पेंशन व देयकों के लिए भटक रहे थे। जब, आज ओमप्रकाश शांडिल्य की मौत हुई और परिजनों ने कहा तो डीएफओ ने तुरंत उनके देयकों का भुगतान करने के आदेश दे दिए।
ब, डीएफओ की सुुनें

मृतक ओमप्रकाश​​ शांडिल्य को क्लेम का कितना भुगतान हुआ है। इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इतना पता है कि उसका पेंशन प्रकरण नहीं बना था। मेरे सामने उसके पेंशन प्रकरण को पुटअप नहीं किया गया था। इसमें विभाग के कर्मचारियों की गलती है। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा। उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
अमित निकम, डीएफओ