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वन अमले पर फायरिंग में नया खुलासा:45 मिनट में 7 किलोमीटर की दूरी तय करके नहीं पहुंच सकी पुलिस, फोन लगाते रहे अफसर

मुरैना10 महीने पहले
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धमाके के बाद कुछ इस तरह धुआं छा जाता। - Dainik Bhaskar
धमाके के बाद कुछ इस तरह धुआं छा जाता।

ग्राम पढ़ावली में माफिया की ताबड़तोड़ फायरिंग से उलटे पैर भागे वन अमला की कहानी में नया मोड़ आया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। अमले के सदस्यों ने बताया कि जिस जगह एलएनटी मशीनों से अवैध खनन हो रहाा था वहां से रिठौरा थाने की दूरी महज 7 किलोमीटर है। जान फंसती देख उन्होंने लगातार पौन घंटे तक रिठौरा थाना पुलिस को फोन लगाया। उसके बावजूद पुलिस वहां नहीं पहुंची। इसके बाद जब उन्होंने पुलिस से कहा कि कम से कम उनकी तरफ से एफआईआर तो दर्ज कर लें, लेकिन पुलिस ने माफिया के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की।

ग्राम पढ़ावली एक पर्यटन स्थल है। यहां ग्राम पढ़ावली उससे लगे ग्राम भरावली तथा पुर गांव में दिन रात ब्लािस्टंग करके खदानों से अवैध रुप से पत्थर का खनन किया जा रहा है। यहां पर माफिया द्वारा सरेआम अवैध खनन किया जा रहा है। ब्लॉक पत्थर को काटकर उसे राजस्थान व उत्तर प्रदेश ले जाया जाता है जहां उसकी अधिक कीमत मिलती है।

इस प्रकार बारूद लगाकर फाड़ा जाता पत्थर
इस प्रकार बारूद लगाकर फाड़ा जाता पत्थर

सात किलोमीटर की दूरी तय करने में लगे घंटों
आपको बता दें, कि जब वन विभाग का अमला माफिया द्वारा की गई ताबड़तोड़ गोलीबारी में फंस गया तो अमले के प्रभारी केशव शर्मा ने रिठौरा थाने के प्रभारी संजय किरार को फोन लगाकर कहा कि वे लोग यहां फंस गए हैं तथा माफिया द्वारा उनके ऊपर लगातार फायरिंग की जा रही है। हमने एक एलएनटी मशीन जब्त कर ली लेकिन,आप फोर्स लेकर आ जाएं तो हमारी मदद हो जाएगी। हम जब्त की गई एलएनटी मशीन यहां से निकाल सकेंगे। इसके बावजूद थाना प्रभारी ने न फोर्स भेजा और न स्वयं वहां पहुंचे।

लिहाजा, इंतजार करने के बाद जब वन अमले के सदस्यों ने बखूबी समझ लिया कि एलएनटी मशीन निकालकर ले जाना संभव नहीं है, तो उन्होंने एलएनटी मशीन को वहीं छोड़ा अौर उलटे पैर अपनी दोनों गाड़ियों में अमले के सदस्य सवार हुए और भाग आए।

बारूद के धमाके के बाद इस प्रकार फटती चट्‌टानें
बारूद के धमाके के बाद इस प्रकार फटती चट्‌टानें

नहीं लिखी पुलिस ने एफआईआर
आपको बता दें, कि जब वन अमला वापस लौट कर थाना पहुंचा तो वहां थाना प्रभारी नहीं थे। वन अमले के प्रभारी केशव शर्मा ने जब वहां मौजूद मुंशी व स्टॉफ से कहा कि उनकी तरफ से माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लें तो पुलिस ने साफ मना कर दिया।

प्रभारी केशव शर्मा ने जब थाना प्रभारी संजय किरार को फोन लगाया तो वह बोले कि एफआईआर तब लिखी जाएगी जब आप यहां मौके पर आकर उपस्थित हों। इस पर केशव शर्मा ने कहा कि अब वे लोग दोबारा जान जोखिम में डालकर वहां वापस नहीं जाएंगे, उनकी जान को खतरा है, लेकिन थाना प्रभारी नहीं माने।

यह निकलता ब्लाक पत्थर
यह निकलता ब्लाक पत्थर

कहते हैं अमला प्रभारी
पुलिस ने हमारा बिल्कुल सहयोग नहीं किया। जिस जगह हम लोगों पर फायरिंग की जा रही थी वहां से थाने की दूरी मात्र 7 किलोमीटर थी। हम पौन घंटे तक पुलिस को फोन से कहते रहे कि आप लोग यहां आ जाएं लेकिन वो नहीं आए। जब कोई चारा बचने का नहीं देखा तो हम लोगों को मशीन छोड़कर वहां से भागना पड़ा।
केशव शर्मा, अमला प्रभारी

कहती है पुलिस
यह सही है कि केशव शर्मा प्रभारी का फोन हमारे पास आया था। उन्होंने हमसे कहा कि दो-चार पुलिस वाले भेज दो, हमने कहा कि हमारा फोर्स अभी काम में लगा है, हम आते हैं। उसके बाद हम वहां पहुंचे थे लेकिन तब तक वे लोग जा चुके थे। जहां तक एफआईआर की बात है तो जब थाने पर कोई था ही नहीं तो एफआईआर कौन करता। वह झूठ बोल रहे हैं। एलएनटी मशीन को ले जाने के लिए ट्राला चाहिए था जब कि उनके पास ट्राला नहीं था। उन्होंने एलएनटी मशीन नहीं पकड़ी थी। वह तो खदान के पास गए तक नहीं, बल्कि 300 मीटर दूर ही खड़े रहे थे।
संजय किरार, थाना प्रभारी, रिठोरा थाना

जांच के बाद होगी कार्रवाई
अगर केशव शर्मा यह कह रहे हैं कि हमने पुलिस को बुलाया और पुलिस नहीं आई तो इस मामले की जांच की जाएगी। जांच में अगर यह सही पाया जाता है तो थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रायसिंह नरवरिया, एडिशनल एसपी, मुरैना