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  • The Archaeological Department Could Recover Only Eight Copper Coins, The Department Had To Be Satisfied With The Coins Of 1300 AD.

मुरैना में खेत से मिले सिक्के:केवल आठ तांबे के सिक्के बरामद कर सका पुरातत्व विभाग, 1300 ईस्वी के सिक्कों से संतोष करना पड़ रहा विभाग को

मुरैना10 दिन पहले
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खेत पर पुरातत्व अधिकारी व पुलिस - Dainik Bhaskar
खेत पर पुरातत्व अधिकारी व पुलिस
  • पुरातत्व विभाग का आरोप नगरा थाना पुलिस ने नहीं किया सहयोग, पुरातत्व अधिकारी के साथ तक नहीं गए थाना प्रभारी

पोरसा के इन्नीखेरा गांव में निकले 1300 ईस्वी के बेशकीमती सोने के सिक्के वसूल करना अब दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने खेत मालिक पर जब बहुत दबाव डाला तो उसने केवल 8 सिक्के पकड़ा दिए, वह भी तांबे के। सोने के सिक्के उसने अभी तक नहीं दिए हैं। पुरातत्व अधिकारी का कहना है कि नगरा थाना पुलिस ने इस मामले में उनकी मदद नहीं की। विभाग का आरोप है कि अगर नगरा थाना पुलिस चाहती तो मौके पर ही सिक्के बरामद कर लेती, लेकिन पुलिस ने न तो तुरंत सिक्के बरामद किए और न ही वे वहां पहुंचे तो नगरा थाना प्रभारी वहां आए। कुल मिलाकर अब यह मामला पेचीदा हो गया है।

खेत पर मौजूद पुरातत्व अधिकारी
खेत पर मौजूद पुरातत्व अधिकारी

यहां बता दें कि जिस किसान के खेत में सिक्के निकले थे, वह दिन-रात हाथ में हसिया लिए पहरा देता रहा। गांव के अन्य लोग भी सिक्के खोजने के लिए लगातार उसके खेत पर नजर गड़ाए रखे रहे लेकिन खेत मालिक ने उनकी दाल नहीं गलने दी। फिलहाल इस मामले में थक-हारकर पुरातत्व विभाग ने कलेक्टर के यहां जांच प्रतिवेदन दे दिया है। इस प्रतिवेदन में विभाग ने कलेक्टर से कहा है कि वह एसपी को आदेशित कर पुलिस फोर्स उपलब्ध कराए जिससे किसान से सोने के सिक्के बरामद किए जा सकें।

गांव वालों के बीच पुरातत्व अधिकारी
गांव वालों के बीच पुरातत्व अधिकारी

यह था पूरा मामला
पोरसा कस्बे के इन्नीखेरा गांव में किसान रामलखन के खेत में तांबे के कुछ सिक्के निकले थे। इसकी खबर पूरे जिले में फैल गई। अगले दिन जिला पुरातत्व अधिकारी अशोक शर्मा, नगरा थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे तथा खेत मालिक से पूछताछ की। जब वे खेत मालिक से पूछताछ करने गए तो, खेत मालिक रामपाल अपने उस 6 बीघा खेत की रखवाली कर रहा था। उसके पास डंडा व हंसिया था। जैसे ही उसने पुलिस को देखा, उसके चेहरे का रंग उड़ गया था। पुलिस को देखकर वह घबराया तो पुरातत्व अधिकारी अशोक शर्मा ने उसको तसल्ली देते हुए कहा कि हम तुम्हारा अहित करने नहीं आए हैं। हमें तो तुम यह बता दो कि कितने सिक्के निकले थे और वे अब कहां हैं। इस पर वह रोनी सी सूरत बनाकर कहने लगा कि हम तो वैसे ही बहुत परेशान हैं। बाढ़ ने हमारी बाजरे की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। हमारी भूखों मरने की नौबत आ गई है। सरकार ने कुछ नहीं दिया है, वगैरह, वगैैरह। उसकी बातों पर ध्यान न देते हुए पुरातत्व अधिकारी व पुलिस ने उससे पूछा कि तुम्हारे घर के अन्य सदस्य कहां हैं। जब उसने घर की तरफ इशारा किया तो अशोक शर्मा व साथ में गए पुलिस के एसआई व सिपाही उसके घर गए तथा घर के लोगों से पूछताछ की थी। पूछताछ में किसी ने कुछ नहीं बताया थी। केवल 8 सिक्के जो कि तांबे के हैं उन्हें निकाल कर थमा दिए थे।

घटिया पर खेत मालिक
घटिया पर खेत मालिक

1300 ईस्वी के हैं सिक्के
पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि तांबे के दिए गए सभी 8 सिक्के 1300 ईस्वी के हैं। सिक्के मुस्लिम शासनकाल के हैं। उस समय दिल्ली में मुगलकॉलीन शासन था। किसी व्यक्ति ने सिक्कों का घड़ा दबा दिया होगा। बाढ़ के पानी में घड़ा फूट गया होगा तथा सिक्के बाहर निकल आए। सिक्कों पर फारसी भाषा में कुछ लिखा हुआ है।
पुलिस की लापरवाही है
इस मामले में नगरा थाना पुलिस की घोर लापरवाही है। पुलिस चाहती तो जिस दिन सिक्के निकले थे उन्हें तुरंत बरामद कर लेती। जब हम वहां गए तो नगरा थाना प्रभारी पहले कहते रहे कि हम आपके साथ आ रहे हैं, लेकिन वहां पहुंचने पर भी नहीं आए। हमें केवल 8 तांबे के सिक्के किसान ने दे दिए थे। हमने कलेक्टर के यहां जांच प्रतिवेदन लगाया है। वह एसपी साहब को आदेशित करेंगे तथा हमें पुलिस फोर्स उपलब्ध कराएंगे तभी जांच हो सकेगी और सोने के सिक्के जो अभी किसान के पास हैं, बरामद हो सकेंगे।
अशोक शर्मा, जिला पुरातत्व अधिकारी, मुरैना

गांव वाले नहीं बता रहे कुछ
हमने किसान को कई बार थाने में बुलाकर पूछताछ की लेकिन वह कुछ नहीं बता रहा है। हमने अन्य गांव वालों से भी पूछताछ की तो वह भी नहीं कुछ बता रहे हैं। अगर कोई कुछ बताए तो मामले की तह तक पहुंचे। हम कड़ाई से पूछताछ कर नहीं सकते हैं। फिर भी हम और पूछताछ करेंगे और सिक्के बरामद करवाने की कोशिश करेंगे।
धर्मेन्द्र मालवीय, नगरा थाना प्रभारी

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