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निर्वाचन आयोग की वेबसाइट हैक मामला:आज, के ही दिन यूपी पुलिस आई थी अंबाह, लेकिन पुलिस की पकड़ से अब तक दूर है मास्टर माइंड

मुरैना9 दिन पहले
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अंबाह पुलिस थाना - Dainik Bhaskar
अंबाह पुलिस थाना
  • आज, पूरा एक माह बीत गया, पकड़ में नहीं आ सका अहम केस का अहम आरोपी हरिओम सखवार

केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की वेबसााइट हैक करने के मामले पर धूल जमती जा रही है। आज, रविवार को इस मामले को पूरा एक माह बीत गया है लेकिन हरिओम सखरवार अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस इस मामले के मास्टर माइंड हरिओम सखवार को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही है, उसके बावजूद सफलता नहीं मिली है। हरिओम सखवार के माता-पिता व भाई माइकल व मामा सभी अंबाह पुलिस के संपर्क में हैं। माता-पिता अंबाह में ही रहते हैं। बता दें कि मामला ही दबता जा रहा है।

बता दें, मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इसके पीछे कई सफेदपोश लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश में यह काम किन्ही राजनैतिक सफेदपोश लोगों के इशारे पर हो रहा था।

यह है पूरा मामला
यहां बता दें, कि अंबाह निवासी हरिओम सखवार नाम के युवक ने केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट को हैक कर लिया था। उसके साथ इस काम में अन्य युवक शामिल हैं। केन्द्र सरकार की वेबसाइट के हैक करने के मामले का जब खुलासा हुआ तो पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। आनन-फानन में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ने इस केस में विपुल सैनी तथा हरिओम सखवार व उसका साथ देने वाले अन्य युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने इस गैंग के मुख्य सरगना विपुल सैनी को सहारनपुर में ही गिरफ्तार कर लिया है। 12 अगस्त को दोपहर तीन बजे उत्तर प्रदेश पुलिस मुरैना आई तथा वह सीधा अंबाह थाने पहुंची थी। वहां उसने एसडीओपी अशोक सिंह जादौन से मुलाकात की तथा पूरे मामले से अवगत कराया। एसडीओपी जादौन ने अंबाह थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया तथा यूपी पुलिस को उनके साथ कर दिया।

क्यों की गई केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट हैक
यहां बता दें कि फर्जी आधार कार्ड बनाना और बात है, लेकिन फर्जी वोटर आईडी या वोटरों का डाटा चुराना और बात है। यह दोनों ही चीजें अलग-अलग हैं। यहां मामला वोटरों से जुड़ा है और सवाल यह है कि कौन लोग हैं जो वोटरों की आईडी में सेंध लगाना चाहते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि यूपी में फर्जी वोटरों का फर्जीवाड़ चल रहा हो। फिलहाल इस मामले में पुलिस केवल यह अंदेशा लगा रही है। सही बात का बता तब चलेगा जब हरिओम सखवार उनके हाथ आ जाएगा और वह उन्हें इस मामले से जुड़ी हर उस कड़ी को बताएगा जो उसके सम्पर्क में हैं।

एफआईआर तक नहीं दिखाई यूपी पुलिस ने
यहां बता दें, कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने अंबाह पुलिस को इस मामले की एफआईआर तक नहीं दिखाई है। सहारनपुर से आई पुलिस ने अंबाह पुलिस से केवल हरिओम सखवार मांगा है। अंबाह पुलिस को कहा गया है कि वे केवल हरिओम को पकड़कर उनके हवाले कर दें। फिलहाल अंबाह पुलिस को यूपी पुलिस द्वारा दिया गया होमवर्क मिला है। अंबाह पुलिस का भी मानना है कि यूपी पुलिस उन्हें मामले से अवगत नहीं कराना चाहती है। यही वजह है कि उसने अंबाह थाना पुलिस को कुछ नहीं बताया है।

नाम बदलकर रहता था सहारनपुर में हरिओम
अंबाह पुलिस ने बताया कि हरिओम सखवार सहारनपुर में अपना नाम बदल कर रहता था। वह वहां पर हर्षा के नाम से जाना जाता था। वह नाम बदलकर क्यों रह रहा था, इसका जवाब फिलहाल पुलिस के पास नहीं है।

एसडीओपी अशोक सिंह जादौन
एसडीओपी अशोक सिंह जादौन

अंबाह में मौजूद ऐजेंट देता था आधार कार्ड बनाकर
यहां बता दें, कि हरिओम सखवार का अंबाह में एक एजेंट है जिसका नाम है आकाश जैन। पुलिस ने उसे पकड़कर पूछताछ की। उसमें उसने कबूला था कि हरिओम सखवार उसे लिंक देता था जिससे वह उस लिंक वाले व्यक्ति का आधार कार्ड निकालता था। उस आधार कार्ड को वह हरिओम सखवार को वाट्सएप पर भेज देता था। इसके बदले में हरिओम सखवार उसे प्रति आधार कार्ड 100 रुपए मेहनताना देता था।

लोगों का मानना है कि आखिर हरिओम सखवार उस लिंक को कहां से निकालता था और उस लिंक के आधार पर निकाले गए आधार कार्ड का क्या करता था? क्योंकि मामला केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट हैक करने का है तथा आधार कार्ड से वोटर आईडी निकालने का है। अगर इस वोटर आईडी व आधार कार्ड का बैंक आदि में फर्जीवाड़ा करके पैसे निकालने का मामला होता तो हरिओम सखवार व विपुल सैनी के खिलाफ कभी न कभी बैंक से पैसा निकालने का मामला दर्ज हुआ होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

घरवालों से पूछताछ कर चुकी पुलिस
अंबाह थाना पुलिस ने इस मामले में अभी तक हरिओम के पिता दिनेश सखवार, भाई माइकल सखवार तथा मामा नवल सखवार से पूछताछ की लेकिन सभी ने एक सुर में यही बताया कि उन्हें नहीं मालूम की हरिओम कहां छिपा हुआ है। अंबाह थाना पुलिस की माने तो हरिओम के पिता व भाई इस बात को कह रहे हैं कि हरिअोम का मामा नवल सखवार ही उसे गलत काम सिखाता है तथा हरिओम की आखिरी लोकेशन नवल के साथ मिली है, जबकि नवल का कहना है कि हरिओम उससे केवल एक बार मिला है, उसके बाद नहीं मिला और अब वह कहां हैै उसे नहीं पता।

कहती है पुलिस
हरिओम सखवार को हम लगातार खोज रहे हैं, लेकिन वह हमें नहीं मिल पा रहा है। उसके घरवालों को बुलाकर लगातार पूछताछ कर चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी उसका पता नहीं लग सका है। हम उसे खोजने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
अशोक सिंह जादौन, एसडीओपी, अंबाह

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