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मुरैना में बाढ़ में फंसे लोगों की कहानी:पानी में डूब गया घर, सड़क पर डेरा, दो दिन से कुछ नहीं खाया, सहायता भी नहीं मिली

मुरैनाएक वर्ष पहले
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ट्रक में बैठा अंगूरी का पूरा - Dainik Bhaskar
ट्रक में बैठा अंगूरी का पूरा

मुरैना में चंबल नदी में पानी लगातार चढ़ता जा रहा है। इसके कारण आसपास के गांवों में पानी भर गया है। जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर भानपुर में भी पानी भर गया है। यहां करीब 25 परिवार रहते हैं। गांवों के सभी लोग सामान भरकर इधर-उधर पलायन कर चले गए हैं। लोग ट्रकों में सामान भरकर पलायन कर चुके हैँ। भास्कर टीम ने बुधवार को गांव का जायजा लिया।

गांव के बाहर ट्रक में सामान भरकर बाहर जाते हुए एक परिवार दिखा। ट्रक में परिवार के साथ मौजूद अंगूरी देवी ने बताया, कोई नहीं पूछ रहा, दो दिन बीत गए। भूखे-प्यासे सड़क के किनारे डले हैं। कोई नहीं पूछने आया। दो दिन से कुछ नहीं खाया। बच्चे भी भूख से बिलबिला रहे हैं। उनका कहना था कि गांव में बाढ़ से घर डूब गया, जो कुछ था। जल्दी से ट्रक में भरा और एबी रोड के हाईवे पर आकर रुक गए।

भानपुर में पानी में डूबे घर।
भानपुर में पानी में डूबे घर।

गांव की राजाबेटी ने बताया, उसका पूरा घर डूब गया है। वह अब पति और बच्चों के साथ सड़क किनारे डेरा डाले हैं। उनके पास थोड़ा सा अनाज है और कुछ पैसे हैं। बाकी सब सामान गांव में मौजूद घर में डूब गया है। जब बाढ़ खत्म हो जाएगी। पानी उतर जाएगा, तब देखेंगे कि क्या बचा और क्या बह गया। उनकी एक ही पीड़ा थी, उन्हें कोई पूछने नहीं आया, दो दिन बीत गए आपने कुछ खाया? बच्चों ने क्या खाया?

गांव की अन्य महिला सीमा को प्रशासन से नाराजगी थी। सड़क किनारे सास के साथ बैठी सीमा ने कहा, बड़े आदमियों के यहां सब कोई पहुंच जाता है। हम गरीबों पर विपदा आई है, तो कोई पूछने तक नहीं आ रहा। गांव के बारेलाल ने बताया, उसने मेहनत से बच्चों के लिए गृहस्थी जोड़ी थी, जो अब पानी में डूब गई है। घर भी पूरी तरह डूब चुका है। वह लोग अब सड़क पर आ गए हैं। उनके पास खाने के खाना तक नहीं है।

अंगूरीदेवी ने कहा कि पिछले दो दिन से बच्चों ने भी कुछ नहीं खाया।
अंगूरीदेवी ने कहा कि पिछले दो दिन से बच्चों ने भी कुछ नहीं खाया।

सहायता तो दूर फोन तक नहीं लग रहे अधिकारियों के

सीमा ने जब कोई सहायता न मिलने की बात कही तो दैनिक भास्कर ने संबंधित क्षेत्र के सहायता अधिकारी तहसीलदार अजय शर्मा को फोन लगाया जो बंद था। उसके बाद एडीएम नरोत्तम भार्गव से बात की तो उन्होंने सहायता भेजने की बात कही। सवाल यह है कि ऐसे समय में जब लोगों का सब कुछ डूब गया हो तथा वे सड़क पर आ गए हों, उस समय जिला प्रशासन की उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है। जिला प्रशासन के अधिकारियों के मोबाइल तक बंद जा रहे हैं। तब, सवाल उठता है कि यह कैसी व्यवस्था है?

सीमा बाई ने बताया कि प्रशासन का कोई नुमाइंदा पूछने भी नहीं आया।
सीमा बाई ने बताया कि प्रशासन का कोई नुमाइंदा पूछने भी नहीं आया।

राजघाट पर भरा पानी, डूब गया पुल

बता दें, धौलपुर रोड पर राजघाट पर चंबल का पानी उफन रहा है। यहां पुराना पुल पूरी तरह डूब चुका है। इसके साथ ही मंदिर, बिजली के खंभे, बिजली की लाइन डूब चुकी हैं। लोगों के मकान डूब चुके हैं। जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। गांवों में मौजूद शासकीय स्कूल व पानी की टंकी आदि डूब गई है।

चंबल में हिलोरे मारता पानी
चंबल में हिलोरे मारता पानी
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