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बाढ़ प्रभावितों का दर्द:गांव में 40 बच्चे ऐसे जो शिक्षा से महरूम हैं, क्योंकि गांव से 4 किमी दूर है स्कूल

मुरैना6 दिन पहले
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बाढ़ से प्रभावित हाेने पर चंबल किनारे टापू पर बसाया गया नदुअापुरा गांव।
  • बीहड़ में बसाए नदुआपुरा में न बिजली का इंतजाम न शिक्षा और न दूसरी मूलभूत सुविधाएं

साहब! हम लोग एक साल पहले चंबल में आई बाढ़ के कारण बर्बाद हो गए। क्योंकि बाढ़ के पनी में हमारे घर डूब गए तथा गांव में लगे तीन हैंडपंप खराब हो गए, वहीं कुआं नष्ट हो गया। बाढ़ से प्रभावित होने के बाद हमें गांव से ऊपर टापू बसाया गया। जहां हमारी मांग पर तात्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास ने हैंडपंप भी लगवाया। लेकिन यह हैडपंप खराब होने पर मल्लाह समुदाय के 41 परिवारों को खार (नदी से जुड़ने वाले बीहड़ी नाले) व चंबल नदी से पानी लाकर आपूर्ति करनी पड़ती है।

यह पीड़ा नदुआपुरा गांव के लोगों ने उस समय व्यक्त की जब दैनिक भास्कर टीम बाढ़ प्रभावित लोगों के हालचाल जानने रविवार को उनके बीच पहुंची। इस दौरान महिलाओं ने अपनी वेदना सुनाते हुए यह भी बताया कि उनके गांव में 40 बच्चे ऐसे हैं, जो शिक्षा से महरूम हैं। कारण यह है कि नदुआपुरा से स्कूल की दूरी 4 किलोमीटर (नायक पुरा) है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाना संभव नहीं है।

40 बच्चे वंचित हैं शिक्षा से :मुरैना शहर से 17 किलोमीटर दूर चंबल नदी के बीहड़ में स्थित नदुआपुरा गांव में स्कूल नहीं है। जबकि यहां 40 से अधिक बच्चे पढ़ने योग्य हैं। पांचों देवी पत्नी मोहन सिंह ने बताया कि गांव में स्कूल नहीं होने के कारण उन्हें अपने तीन बच्चों को राजाखेड़ा (धौलपुर राजस्थान) में किराए का कमरा लेकर पढ़ाना पड़ रहा है। हालांकि अब पांच महीने से स्कूल बंद होने के कारण बच्चे घर बैठे हैं। पढ़ाई-लिखाई की सुविधा नहीं होने से नदुआपुरा गांव के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।

ग्रामीण बोले, सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं बच्चे, बीमारी फैलने का खतरा
चंबल नदी में आई बाढ़ के कारण नदुआपुरा से विस्थापित होकर बीहड़ के टापू पर झोंपड़ी बनाकर रह रहे ग्रामीणों ने बताया कि उनके अधिकांश बच्चे इन दिनों सर्दी-जुकाम व बुखार से पीड़ित हैं। इसके अलावा हैंडपंप खराब होने पर खार व नदी का पानी पीने से बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। क्योंकि एक हफ्ते पहले ही बस्ती में लगा हैंडपंप सुधरा है। इससे पहले वे चंबल नदी से पानी लाकर घरों में आपूर्ति कर रहे थे। आवागमन के साधना नहीं होने के कारण इलाज के लिए मुरैना जिला अस्पताल जाने में न केवल परेशानी होती है, बल्कि पूरा दिन निकल जाता है। इलाज के फेर में कई बार मजदूरी पर नहीं पहुंच पाते तथा हाथ में पैसा भी नहीं रहता।

रतियापुरा गांव के 155 परिवार भी पी रहे चंबल नदी का पानी
पिछली साल चंबल नदी में आई बाढ़ के कारण सबलगढ़ क्षेत्र के रतियापुरा गांव में लगे हैंडपंप व कुंए भी खराब हो गए। ऐसे में यहां रहने वाले 155 परिवारों को चंबल नदी से पानी लाकर घरों में आपूर्ति करनी पड़ रही है। जिससे ग्रामीणों का समय दिनभर पानी लाने में चला जाता है।

बिजली का प्रबंध नहीं, अंधेरे में मनेगी दीवाली
बाढ़ से विस्थापित हुए नदुआपुरा के 41 परिवार बीहड़ में स्थित एक टापू पर झौपडिय़ों में गुजारा कर रहे हैं। जहां बिजली का कोई प्रबंध नहीं है। ऐसे में यह लोग एक साल से रात के समय अंधेरे में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उजाला नहीं रहने से कारण ग्रामीणों को जंगली जीव-जंतुओं के हमले का भय बना हुआ है। यहां बता दें कि एक साल पहले चंबल नदी में आई बाढ़ से नदुआपुरा के अधिकांश घर न केवल तहस-नहस हो गए, बल्कि वे रेत के ढेर में तब्दील होकर नष्ट हो गए।

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