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नवाचार:मुरैना के 3 मिडिल स्कूलों में शुरू होगा व्यावसायिक शिक्षा का कोर्स

मुरैना24 दिन पहले
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  • एक शाला-एक परिसर मिडिल स्कूलों में जुलाई से किए जाएंगे नए कोर्स में दाखिले

नवमीं से बारहवीं के बाद अब छठवीं से आठवीं के छात्र भी स्कूल में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई करेंगे। यानी स्कूल में विद्यार्थियों को व्यवसाय के बारे में भी सिखाया जाएगा। इसके लिए मुरैना के 3 मिडिल स्कूलों का चयन किया गया है। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत एक शाला एक परिसर के ऐसे स्कूल जहां नर्सरी से 12वीं व छठवीं से आठवीं तक के स्कूल संचालित हैं, वहां छठवीं व आठवीं तक के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

मुरैना जिले में एक शाला-एक परिसर वाले 291 हायर सेकंडरी स्कूल हैं। लेकिन इनमें मुरैना के महारानी लक्ष्मी बाई गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल, गोठ के हायर सेकंडरी स्कूल व सबलगढ़ के गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल में व्यवसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम संचालित होने के कारण उक्त 3 स्कूलों को व्यवसायिक शिक्षा के लिए चुना गया है।

नए पैटर्न के स्कूल वहां खोले जाएंगे जहां स्कूल में स्मार्ट क्लास की सुविधा हो। ऐसे मिडिल स्कूलों में ही व्यवसायिक शिक्षा का कोर्स पढ़ाने की व्यवस्थाएं लॉकडाउन बाद शुरू होंगी। राज्य शिक्षा केंद्र ने कलेक्टर को भेजे परिपत्र में कहा है कि जिले के हर ब्लाक से ऐसे स्कूलों का चयन कर वहां व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत की जाए। मुरैना जिले में प्रत्येक ब्लाक के उत्कृष्ट स्कूलों का चयन कर सूची राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को भेज दी गई है। वर्तमान में व्यावसायिक पाठ्यक्रम कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है।

व्यावसायिक शिक्षा में कौन से विषय शामिल
पोल्ट्री फार्मिंग, एग्रीकल्चर इकोनामिक्स एंड फार्म मैनेजमेंट, हार्टीकल्चर, रिपेयर ऑफ रेडियो एंड टीवी, ऑफिस मैनेजमेंट, बुक कीपिंग एंड एकाउंटेंसी, बैकरी, गारमेंट मेकिंग, स्टोर कीपिंग, फोटोग्राफी, प्रीटिंग ब्राइडिंग एंड पेपर कंवर्टिंग, कंप्यूटर एप्लीकेशन, वेल्डिंग टेक्नोलॉजी एंड फेब्रीकेशन समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम सिखाए जाएंगे।
हर ब्लाॅक से एक स्कूल का होगा चयन
^नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक ब्लाक से 6वीं से 8वीं तक के एक स्कूल का चयन करना है। हमने जिले के हर ब्लाॅक से एक उत्कृष्ट स्कूल का चयन किया है। ताकि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत एक शाला एक परिसर के इस व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत हो सके।
मुन्ना सिंह तोमर, जिला परियोजना समन्वयक

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