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रामपुरकलां पंचायत के सरपंच-सचिव का कारनामा:जिंदा रहते मजदूरी नहीं मिली, मौत के 2 महीने बाद मनरेगा में काम भी दिया और भुगतान भी

रामपुरकलां2 महीने पहलेलेखक: राघवेंद्र भदौरिया
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  • खुले प्लॉट में तिरपाल लगाकर रहता है मजदूर, कागजों में पीएम आवास योजना में बना दिया मकान

अपनी व परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी कमाने के लिए दर-दर मजदूरी करने वाला सुशील कुमार चतुर्वेदी दिनभर काम-धंधे की तलाश में भटकता रहता था। कभी भैंस चराता, कभी दुकानों पर नौकरी करता। लाखों रुपए के निर्माण कराने वाली पंचायत ने उसे मनरेगा में काम नहीं दिया।

31 अगस्त 2018 को सुशील ने दम तोड़ दिया। 11 सितंबर 2018 को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया, तब पंचायत की सरपंच सुधा चतुर्वेदी व सचिव वीरभान सिंह जादौन ने फर्जीवाड़ा किया। मृत सुशील चतुर्वेदी का मनरेगा में मस्टर रोल बनाया गया और उससे झरना वाली गुफा पर बने उस चेकडैम में मजदूरी भी की, जिसके अधूरे निर्माण के बाद 14 लाख रुपए से अधिक की राशि पंचायत ने निकाल ली। आपको यह सुनकर थोड़ी हैरत हो रही होगी कि कोई व्यक्ति मरने के बाद मजदूरी कैसे करेगा, लेकिन रामपुरकलां पंचायत के सरकारी रिकॉर्ड में मृतक सुशील के नाम से भरे हुए मस्टर रोल तो यही कहते हैं।

तिरपाल में आशियााना, कागजों में पीएम आवास का मालिक

रामपुरकलां पंचायत में फर्जीवाड़े की एक बड़ी सूची है। गांव में रहने वाला हरीसिंह जाटव का खुद का प्लॉट है, लेकिन उस पर छत नहीं है। सर्दी के मौसम में हरिज्ञान अपने परिवार के साथ इसी प्लॉट में तिरपाल लगाकर रहता है। बारिश की वजह से उसने इस समय अपने भाई के घर में आश्रय ले रखा है लेकिन पंचायत के रिकॉर्ड में पीएम आवास के हितग्राहियो की सूची में सीरियल क्रमांक 110 पर हरिसिंह पुत्र स्व. पतिराम जाटव के नाम आवास स्वीकृत कर 1 लाख 20 हजार की राशि भुगतान कर दिया।

इन 2 उदाहरण से जानिए कैसे सरकारी राशि में हो रहा भ्रष्टाचार

1. रामपुरकलां के मजरा टेलरी में पितु बाबा के नाम से 14.88 लाख का तालाब स्वीकृत हुआ। इसमें 3.90 लाख का मटेरियल लगाया और 3.99 लाख मजदूरों को दिए लेकिन तालाब में एक बोरी सीमेंट नहीं लगी। इसी प्रकार बड़ी खोरी मैं 14.99 लाख से स्वीकृत तालाब पर 10.46 लाख खर्च किए, वहां भी पानी नहीं एकत्रित हो सका।

2. टेलरी गांव में रोज 2 पानी के टैँकर परिवहन के आदेश हैं। लेकिन पंचायत के रिकॉर्ड में गर्मियों में रोज पानी सप्लाई हो रहा है और ग्रामीण आज भी खेतों पर लगे निजी बोरिंग से पानी खरीदकर बैलगाड़ियों से ढो रहे हैं। गंभीर बात यह है कि पेयजल परिवहन के लिए सरकार लाखोंरुपए खर्च कर रही है लेकिन अफसरों ने मौके पर जाकर नहीं देखा कि उन्हें पानी मिल रहा है या नहीं।

पहले भी मिली हैं गड़बड़ी की शिकायतें, जांच कराकर करेंगे कार्रवाई

रामपुरकलां पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायतों की पहले से जांच चल रही है। मृतक के नाम से मजदूरी निकालने, पीएम आवास का फर्जी भुगतान करने की भी जांच करा लेंगे। सचिव दोषी होगा तो उस पर विभागीय कार्रवाई होगी। सरपंच से रिकवरी कराएंगे।
सुनीता शर्मा, सीईओ जनपद सबलगढ़

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