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अंबाह में परेशानी:बारिश होते ही गांवों के रास्तों पर भरा पानी, लोग बोले- कब मिलेगी घरों में कैद होने से मुक्ति

मुरैना18 दिन पहले
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  • चबंल नदी किनारे बसे गांव में बीहड़ के कच्चे रास्तों में बारिश का पानी भर जाता है जिससे घरों से नहीं निकल पाते ग्रामीण
  • पक्के सड़क मार्ग बनाने के लिए ग्रामीणों ने कलेक्टर से लेकर विधायक, सांसद को दिए ज्ञापन, हुआ कुछ नहीं

अंबाह विधानसभा क्षेत्र में छह गांव ऐसे हैं जहां रहने वाले लोगों को बारिश के मौसम में एक-एक माह तक घरों में कैद रहना पड़ता है। हालात यह हैं कि बेमौसम बारिश के दौरान ही उनके गांवों में पहुंचने वाले रास्तों पर कीचड़ व दलदल जमा हो गया हे, जिसकी वजह से उनके गांवों का संपर्क कस्बे से कट गया है। ग्रामीणों का दर्द है कि हमने इस समस्या के लिए सांसद, विधायक से लेकर अफसरों को भी ज्ञापन सौंपे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। यहां बता दें कि चंबल नदी के किनारे बसे छह गांवों तक पहुंचने का रास्ता बीहड़ो से होकर गुजरता है। बारिश के सीजन में जब जलस्तर बढ़ता है तो यह गांव पानी से घिर जाते हैं लेकिन इन गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते भी बदहाल हैं।

हर साल बाढ़ की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने भास्कर को बताया कि मानसून आते ही मालवा, राजस्थान व मप्र में तेज बारिश होने लगती है तब राजस्थान स्थित कोटा बैराज बांध का जलस्तर बढ़ जाता है और बांध का पानी चंबल नदी में छोड़ा जाता है, कोटा बैराज बांध का पानी छोड़ने से अंबाह क्षेत्र के इंद्रजीत का पुरा (आबादी 1000), रामगढ़ (600), सुखध्यान का पुरा(800) गांव न केवल चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं, बल्कि आवागमन ठप्प होने से इन गांव में रह रही लगभग ढाई हजार से अधिक की आबादी को घरों में कैद रहना पढ़ता है।

इन गांव का बंद हो जाता है आवागन
आवागमन के लिए बीहड़ी क्षेत्र के रास्ते केवल तीन या चार फुट ही चौड़े हैं। हल्की बारिश के पानी से ही दुपहिया वाहन की बात तो छोड़िए इन रास्तों पर पैदल चलने में भी भारी मशक्कत करनी होती है। क्योंकि काली व चिकनी मिट्‌टी होने के कारण फिसलन अत्यधिक बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में अंबाह क्षेत्र के जिन गांव में आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है उनमें होलापुरा, सुखध्यान का पुरा, इंद्रजीत का पुरा, चुस्सलई, खिरेंटा, पचौरी पुरा, रामगढ़, डंडोली, नौहरो, नया बांस, बीच का पुरा, बिंडवा,आदि नाम शामिल हैं, पिछले वर्ष आई बाढ़ में इन इन गांवों में लगभग एक माह तक आवागमन बंद रहा था इसके साथ ही यहां की फसल नष्ट हो गयी थी और अनेक मकान भी इसमें ढह गए जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ था

बीमार होने पर ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाते हैं मरीज
आवागमन के रास्ते नहीं होने के कारण समस्याग्रस्त इन गांव में जननी एक्सप्रेस नहीं पहुंच पाती। इस हाल में संबंधित परिजन को गर्भवती महिला का प्रसव दाई एवं गांव की बुजुर्ग महिला की देखरेख में घर पर ही कराना पड़ता है। बारिश के मौसम में गांव में अगर कोई भी व्यक्ति बीमार हो जाता है, तो भी ग्रामीण उसे अस्पताल नहीं पहुंचा पाते। हां इतना जरुर है कि स्थानीय प्रशासन को जानकारी मिलने पर इन गांव में आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टरों की टीम व दवाईयां अवश्य भेजी जाती हैं।
कभी कभार आती है लाइट, मिट्‌टी तेल से करते हैं रोशनी
अंबाह जनपद क्षेत्र में स्थित इन बीहड़ी इलाके के गांवो मे बिजली तो पहुंच गयी है किंतु बरसात के दिनों में यहाँ बिजली व्यवस्था भंग हो जाती है जिसके चलते ग्रमीणों को कैरोसिन से घरों में उजाला करना पड़ता है बरसात के दिनों में बिजली के अभाव में यहां रहने वाले लोग टीवी, फ्रिज, पंखा-कूलर जैसे बिजली उपकरणों का उपयोग नहीं कर पाते और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के लोग देश दुनियां के समाचारों से बेखबर रहते हैं।
सरकार तक पहुंचा चुके प्रस्ताव
^समस्याग्रस्त गांव में पुलिया, सड़क बनाए जाने के लिए मैने मुख्यमंत्री महोदय से मिलकर समस्या के निराकरण की बात रखी है जल्द ही समाधान की उम्मीद है।
कमलेश जाटव, विधायक अंबाह।

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