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कोरोना के साथ ये सेवाकाल भी है...:हम खाएं और दूसरे भूखे रहें, यह हम नहीं देख सकते, इसलिए घर-घर पहुंचा रहे राशन

मुरैनाएक महीने पहले
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एक गरीब के यहां पहुंचाया गया राशन का सामान( - Dainik Bhaskar
एक गरीब के यहां पहुंचाया गया राशन का सामान(
  • गरीबों का दर्द देखकर सामने आ रहे लोग

हम भोजन करते हैं, तो मुंह तक आते-आते हाथ यह सोचकर रुक जाता था कि अन्य लोग भी खाना पा रहे हैं कि नहीं। बस, यही सोचकर अन्य लोगों को साथ लिया और पैसे इकट्‌ठे किए। बाजार से सामान लाए और घर-घर जाकर बांटना शुरू कर दिया।

कस्बे के आकाश शर्मा व दयालु गुर्जर ने बताया, कोरोना काल में कई परिवारों के यहां भोजन के लाले हैं। जिनके पास पैसा है, वे तो चोरी-छिपे किराने वालों से सामान खरीद रहे हैं, लेकिन जो रोज-कमाने खाने वाले हैं, उन्हें तो भूखा ही रहना है। वे अपने बच्चों को भूख से तड़पते कैसे देखते होंगे। यही सोचकर हम लोगों ने एक समूह बनाया है। घर-घर जाकर लोगों को राशन दे रहे हैं।

25 परिवारों को दे चुके राशन
आकाश शर्मा व दयालु गुर्जर ने बताया कि अभी तक उनके समूह द्वारा 25 परिवारों को राशन दिया जा चुका है। उनका लक्ष्य है कि इसे बढ़ाकर 200 तक किया जाए। उसके बाद उन पर दोबारा नजर रखी जाएगी। उन्हें जब तक लॉकडाउन नहीं खुलता है, लगातार राशन दिया जाए।

सामने आ रहे दानदाता
दोनों ने बताया कि इसके बाद कस्बे के अन्य समाजसेवी उनके साथ आ गए हैं। वे लगातार उनकी आर्थिक मदद कर रहे हैं। खुलकर दान दे रहे हैं। उनके साथ समूह में रामनरेश शशिकांत शर्मा, शेखर माथुर, चंद्रकांत शर्मा (बिट्टू), सचिन तोमर सहित अन्य युवा सहयोग कर रहे है। उन्होंने बताया कि कुछ दानदाता तो ऐसे हैं कि कह रहे हैं कि उनका नाम सामने न आए। वह उसे गुप्त दान समझ कर दान कर रहे हैं।