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नहीं काम आई शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की योजना:बिजली विभाग का फेल हुआ शस्त्र लाइसेंस निरस्त करवाने का हथियार, लोगों के जीवन की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर, नहीं दे रहा बिजली कंपनी के आवेदन पर ध्यान

मुरैना5 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • जिले में आए दिन लोगों पर होते रहते हमले

बिजली कंपनी प्रबंधन की जिले के बकायादार बंदूकधारी उपभोक्ताओं की बंदूक छीन कर उनसे बिल राशि वसूल करने का हथियार फेल होता नजर आ रहा है। इस राशि को वसूल करने के लिए बिजली कंपनी प्रबंधन ने बकायादार उपभोक्ताओं के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करवाने की योजना बनाई थी। लेकिन यह योजना अमल में नहीं आ सकी है। इसके पीछे कारण यह है कि जिला प्रशासन उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। इसके साथ ही वह किसी कानूनी पचड़े में नहीं फंसना चाहता है। प्रशासन इस बात को समझ रहा है कि अगर किसी उपभोक्ता का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया और बाद में उसके साथ कोई बड़ी अनहोनी घटित हो गई तो वह न्यायालय की शरण में पहुंच जाएगा। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन क्या जवाब देगा?
यहां बता दें, कि शस्त्र लाइसेंस व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसलिए जिला प्रशासन इस मामले में कदम नहीं उठा रहा है। दूसरी बात यह कि अगर किसी बकायादार का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है तथा उसके बाद उसके साथ कुछ अनहोनी घटित हो जाती है, तो जिला प्रशासन के पास इस बात क्या जवाब रहेगा। फिलहाल इन सब झंझट से बचने के लिए जिला प्रशासन ने इस मामले से हाथ पीछे खींच लिया है।
पहले भी हो चुके ऐसे प्रयोग
यहां बता दें कि वर्ष 2010-11 में ग्वालियर शहर वृत्त के तत्कालीन महाप्रबंधक कप्तान सिंह ने भी इसी प्रकार का प्रयोग किया था। उस समय आचार संहिता के चलते लोगों की बंदूक थानों में जमा थी। उन्होंने बकाया राशि वसूल करने के लिए बकायादार उपभोक्ताओं की बूदंक न देने की गुजारिश जिला प्रशासन से की थी। उनका मकसद था कि बंदूक लेने के लिए लोग बिजली का बिल भर देंगे। लेकिन जिला प्रशासन ने उनके निवेदन पर अमल नहीं किया था। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन को बकायादार उपभोक्ताओं की सूची भेजी थी। बाद में जिला प्रशासन ने यह कहते हुए उनकी योजना पर अमल करने से इंकार कर दिया था कि ऐसा कोई नियम नहीं है, कि बकायादार उपभोक्ता की बंदूक वापस न की जाएं। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने यह भी कहा था कि प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस लोगों की सुरक्षा के लिए दिया है, लिहाजा उनकी सुरक्षा छीन लेने का हक उसे नहीं है। जहां तक कंपनी की बिल राशि वसूल करने का सवाल है, वह कंपनी का आर्थिक मामला है, कंपनी चाहे तो संबंधित उपभोक्ता के सम्पत्ति की कुर्की कर सकती है। हालांकि इस विषय में तत्कालीन प्रबंध संचालक संजय शुक्ला ने भी जिला प्रशासन पर जोर डाला था लेकिन, जिला प्रशासन इस बात के लिए राजी नहीं था। उसके बाद बिजली कंपनी प्रबंधन की यह योजना धरी की धरी रह गई थी।
दो तरफा नीति अपना रही बिजली कंपनी
यह बात देखने में आई है, कि बिजली कंपनी प्रबंधन एक तरफ बकायादार उपभोक्ताओं के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश जिला प्रशासन से कर रहा है। दूसरी तरफ जिले के जो दबंग व ऊंची पहुंच वाले बकायादार उपभोक्ता हैं, उनकी तरफ देख भी नहीं रहा है। जबकि उनके ऊपर भी कंपनी का करोड़ों रुपए बकाया है। इस तरह दो तरफा नीति से उपभोक्ताओं में आक्रोश फैल सकता है। लोगों का कहना है कि कंपनी को चाहिए कि जो बड़े बकायादार हैं, चाहे भले ही वह ऊंची पहुंच वाले हों या दबंग हों, उनके खिलाफ कार्रवाई करे। यहां बता दें, कि कोरोना काल में कई लोगों की नौकरी चली गई। कई लोगों के धंधे मंदे पड़ गए। स्वयं प्रदेश सरकार ने गत वर्ष एक किलो वाॅट विद्युत भार वाले उपभोक्ताओं की तीन माह की बिल राशि को, कोरोना संक्रमण के चलते, फ्रीज किया था जिससे कि, आम उपभोक्ता को राहत मिल सके।
कुर्की क्यों नहीं कर रही बिजली कंपनी
जानकारों का कहना है कि जब बिजली कंपनी को बकायादार की सम्पत्ति कुर्क करने का अधिकार है। कंपनी के पास तहसीलदार स्तर का अधिकारी विशेष रुप से कुर्की के लिए ही दिया गया है, तो कंपनी उसका उपयोग क्यों नहीं करती है। यह मामला उपभोक्ताओं के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए जिला प्रशासन ने इस पर गौर नहीं किया है, ऐसा बताया जाता है।