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  • When Gabbar Singh Reached The Hospital From Mavai Village, The Oxygen Level Remained At 75 Percent, Doctors Said, Take It Home, The Bed Is Not Empty, The Angels Brought Oxygen To The Hospital Gate, Admitted, Healthy Today

मुरैना अस्पताल के दरवाजे पर खड़े 'देवदूत':जिन मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे, नेकी की दीवार के सदस्य उन्हें उपलब्ध कराते हैं ऑक्सीजन, पलंग भी दिलवाते हैं

मुरैना2 महीने पहले
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मरीज गब्बर मावई की जान नेकी की दीवार के सदस्य की वजह से बच सकी। - Dainik Bhaskar
मरीज गब्बर मावई की जान नेकी की दीवार के सदस्य की वजह से बच सकी।
  • परिवार की चिंता छोड़, सामाजिक सेवा में जुट गए लोग

गब्बर सिंह मावई गांव से गंभीर हालत में जिला अस्पताल मुरैना पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उनका ऑक्सीजन लेवल नापा, जो 75 % निकला। अस्पताल के डॉ. एनएस गुर्जर ने यह कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया कि जब कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन नहीं है, तो उन्हें कहां से देंगे, घर वापस ले जाओ। इसके बाद वहां मौजूद नेकी की दीवार संस्था के सदस्य ने तुरंत अपने मारुति वैन में ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए और अस्पताल के गेट पर ही गब्बर सिंह को ऑक्सीजन दी। बाद में डॉक्टरों से मिलकर उन्हें पलंग दिलवाकर भर्ती कराया। आज वह स्वस्थ हैं। घटना गुरुवार की है।

अरुण परमार
अरुण परमार

तीन दिन पहले अंबाह निवासी खूबचंद का ऑक्सीजन लेवल 48 % रह गया था। उन्होंने जब नेकी की दीवार संस्था के सदस्यों को फोन किया तो, वे तुरंत ऑक्सीजन वाली मारुति वैन लेकर गए और उन्हें ऑक्सीजन दी। जिला अस्पताल में डॉक्टर उन्हें भर्ती नहीं कर रहे थे। वे गेट पर स्ट्रेचर पर लेटे थे। संस्था के सदस्य अस्पताल के आरएमओ धर्मेन्द्र गुप्ता से मिले और उन्हें ऑक्सीजन दिलाकर अस्पताल में भर्ती कराया।

मनोज जैन
मनोज जैन

शुक्रवार को जिला अस्पताल में केशव गुर्जर पहुंचे। वे और उनका बेटा दोनों बीमार थे। उनको भी अस्पताल में डॉक्टर भर्ती नहीं कर रहे थे। उन्होंने नेकी की दीवार, संस्था के सदस्यों को फोन किया। सदस्य तुरंत अपनी एम्बुलेंस लेकर पहुंचे, उन्हें ऑक्सीजन पहुंचाई और अस्पताल में भर्ती कराया।

कीर्ति चौहान ने सुबह संस्था के सदस्यों को फोन करके व्हील चेयर की मांग की। उनकी मां को अस्पताल में शौच आदि के जाने के लिए व्हील चेयर नहीं मिल रही थी। संस्था के सदस्य पहुंचे और व्हील चेयर दी।

'नेकी की दीवार' संस्था की शुरुआत मनोज जैन, अरुण परमार और चरुकृष्ण दण्डौतिया ने की। बाद में धीरे-धीरे इससे अन्य सदस्य भी जुड़ते चले गए। संस्था द्वारा लगातार मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। ऑक्सीजन फ्लो मीटर दिए जा रहे हैं। जिन मरीजों को अस्पताल में पलंग नहीं मिल रहा है, उनके लिए बेड की व्यवस्था करवाई जा रही है। यही नहीं, कैंसर जैसी गंभीर मरीजों के लिए घर पर ही ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई जा रही है। इसके साथ ही गरीबों को भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चरुकृष्ण दण्डौतिया
चरुकृष्ण दण्डौतिया

दानदाता कर रहे सहयोग
संस्था के सदस्य अरुण परमार ने बताया, उनके नेक काम में कई दानदाता बुलाकर सहयोग कर रहे हैं। लोग उन्हें फोन कर घर बुलाकर पैसे देते हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर के दीपक अग्रवाल ने उन्हें 25 हजार रुपए दिए। प्रमिला सेंगर ने पेंशन में से पांच हजार रुपए घर बुलाकर दिए। पंकज गुप्ता ने अपने पिता स्व. रामसेवक गुप्ता की स्मृति में मारुति वैन ही दे डाली। उसमें अब ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर उसे एम्बुलेंस का रूप दिया है। उन्होंने बताया कि दानदाता इतने उत्साहित हैं कि उनकी देने की क्षमता नहीं है, फिर भी घर बुलाकर मदद कर रहे हैं।