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  • 100 Percent Lung infected, Oxygen level Ramsidevir Injection And Two Units Of Plasma Did Not Rest, But Willfully Conquered The Corona

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:100 प्रतिशत फेफड़े हुए संक्रमित, ऑक्सीजन लेवल 35 पर आया रेमडेसिविर इंजेक्शन और दो यूनिट प्लाज्मा से भी आराम नहीं मिला, लेकिन इच्छाशक्ति से कोरोना पर विजय पाई

ग्वालियर2 महीने पहले
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कोरोना वायरस से जंग जीतने के बाद विनीत तिवारी। - Dainik Bhaskar
कोरोना वायरस से जंग जीतने के बाद विनीत तिवारी।
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • पढ़िए आज सातवीं कड़ी- 9 दिन वेंटीलेटर पर रहने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और एक मिसाल कायम की

मुझे 2 अप्रैल को ललितपुर में बुखार आया। लैब में काेराेना टेस्ट कराया ताे स्टाफ ने कहा कि आपकाे टाइफाइड लग रहा है। जांच में इसकी पुष्टि हुई। 7 अप्रैल तक इसकी दवा ली, लेकिन आराम नहीं मिला। 5 से 7 अप्रैल को तो बुखार 103 से 104 डिग्री पहुंच गया। तब मुझे यकीन हो गया कि कोरोना वायरस ने शरीर में प्रवेश कर लिया है।

8 अप्रैल को मैंने बिना समय गंवाए रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया और रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही रिश्तेदार ऋषि को फोन किया। पहले सोचा कि भोपाल जाकर इलाज कराएं, लेकिन वहां की स्थिति को देखते हुए ग्वालियर जाने का निर्णय लिया। 9 अप्रैल को मुझे केडीजे मुरार में ऑक्सीजन पलंग मिल गया। 10 अप्रैल को एचआरसीटी-चेस्ट किया गया, जिसका स्कोर 17/25 रहा। तभी से मेरी तबीयत बिगड़ने का क्रम शुरू हुआ। 42 साल की उम्र में मेरी इस हालत को देखते हुए डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए।

16 अप्रैल को जब फिर से एचआरसीटी हुई तो स्कोर 25/25 रहा। मुझे समझ नहीं आया कि हालत सुधरने की जगह बिगड़ कैसे गई? डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि वायरस की तीव्रता ज्यादा होने के कारण ऐसा हो सकता है। ऑक्सीजन लेवल 35 पर आ गया था। सांस लेने में परेशानी होने के कारण डॉक्टर ने बिना समय गंवाए मुझे वेंटीलेटर (बाई-पेप सपोर्ट) पर रखा और प्लाज्मा थैरेपी शुरू की। दो दिन बाद से मेरी हालत में सुधार आना शुरू हो गया।

इलाज कर रहे डॉ. भूपेंद्र सिंह मेरे पास आए और कहा कि अब हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। मैंने इशारे से बताया कि बीमार होने से पहले हर रोज 2 घंटे बैडमिंटन खेलता था। मेरी सांस इतनी जल्दी नहीं फूलेगी। इस पर वो मुस्कुरा दिए। 9 दिन वेंटीलेटर पर रहने के बाद मुझे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन बिना ऑक्सीजन सपाेर्ट के ही मेरा ऑक्सीजन लेवल 96-97 आ रहा था। इस कारण डॉक्टर ने मुझे 24 अप्रैल को सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया। सावधानी बतौर चार दिन और वहीं भर्ती रहा और 29 अप्रैल को मुझे वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया। अब घर पर आराम कर रहा हूं। हर रोज चार से पांच कोरोना संक्रमित या उनके परिजनों का फोन मेरे पास आता है।

कोरोना वॉरियर विनीत तिवारी

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