कोरोना का शतक / 61 दिन में 105 संक्रमित, दो की मौत; 19 दिन में 96 नए मरीज, इससे पहले 42 दिन में मिले थे सिर्फ 9 संक्रमित

105 infected in 61 days, two killed; 96 new patients in 19 days, only 9 infected in 42 days before
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105 infected in 61 days, two killed; 96 new patients in 19 days, only 9 infected in 42 days before

  • बाहर से आने वाले लाेगाें की संख्या बढ़ी तो ग्वालियर में संक्रमण ने पैर पसारे
  • पति-पत्नी पॉजिटिव, हॉस्पिटल की जगह गांव में रखा, अब बेटा भी संक्रमित

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:58 AM IST

ग्वालियर. शनिवार काे जिले में कोराेना वायरस के मरीज बढ़कर 105 हाे गए। पिछले महज 19 दिन में 96 नए संक्रमित मिले हैं और दाे लाेगाें (देवा बाई, 106 और गंगाराम रोहिरा, 76 निवासी डबरा) की जान चली गई। जबकि इससे पहले 42 दिन के भीतर महज 9 मरीज ही सामने आए थे। इससे यह सवाल भी खड़ा हाे गया है कि आखिर संक्रमण तेजी से क्याें बढ़ा और क्या आगे भी मरीजाें की संख्या ऐसे ही बढ़ेगी। 

दैनिक भास्कर ने पड़ताल की ताे पता चला कि संक्रमण बढ़ने की मुख्य वजह दूसरे शहराें और राज्याें से आने वाले लाेग हैं। जिले में 24 मार्च काे कोरोना का पहला मरीज चेतकपुरी में मिला था। इसके बाद 4 मई तक सिर्फ 9 लाेग ही काेराेना पॉजिटिव पाए गए, लेकिन मई के पहले सप्ताह से दूसरे राज्यों और रेड जोन से अाने वाले लाेगाें की संख्या बढ़ने लगी। नतीजा ये हुअा कि 5 से 23 मई तक महज 19 दिन में 96 नए संक्रमित पाए गए। 22 मई तक मिले 20 संक्रमित अपने साधन से अहमदाबाद से लौटे। जबकि 13 लोग दिल्ली से आए। गुरुग्राम से 6, मुंबई से 5, भोपाल से 3 और इंदौर से आए 2 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

लापरवाही...पति-पत्नी पॉजिटिव, हॉस्पिटल की जगह गांव में रखा, अब बेटा भी संक्रमित

बेंहट का रहने वाला प्रमाेद अहमदाबाद में काम करता था। वह पत्नी ज्योति तथा तीन बच्चों अजय, आयुष और पीयूष के साथ 18 मई को ग्वालियर लौटा था। 21 मई को जांच में प्रमोद और ज्योति को कोरोना संक्रमण होने की पुष्टि हुई, लेकिन दाेनाें काे हॉस्पिटल में भर्ती कराने की बजाय उनके घर के बगल में ही बने सामुदायिक भवन में क्वारेंटाइन कर दिया गया। प्रमोद और ज्योति के साथ उनके तीनों भी रह रहे थे। यही कारण है कि शनिवार को जीआरएमसी के वायरोलॉजिकल लैब में हुई जांच में प्रमाेद के बड़े बेटे अजय को भी संक्रमण की पुष्टि हुई। हालांकि आयुष और पीयूष की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

नियम क्या है...

किसी शख्स की काेराेना की जांच रिपाेर्ट पॉजिटिव आती है ताे उसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए, लेकिन प्रमाेद और ज्याेति के मामले में ऐसा नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दाेनाें काे तीनाें बच्चाें के साथ गांव के सामुदायिक भवन में क्वारेंटाइन कर दिया। 

लेकिन विभाग का तर्क ये...

सीएमएचओ डॉ. एसके वर्मा ने कहा कि प्रमाेद अाैर ज्याेति का बेटा चार माह का है इसलिए उसे उन्हें गांव के ही सामुदायिक भवन में रखा गया था। नई गाइडलाइन के हिसाब से मरीज में लक्षण नहीं हैं तो बच्चे छोटे हैं उन्हें घर में भी क्वारेंटाइन किया जा सकता है। क्वारेंटाइन का पालन कराना इंसीडेंट कमांडर का काम है।

आशमा की पहली रिपाेर्ट आई थी निगेटिव, 7 दिन बाद निकली पॉजिटिव
घोसीपुरा निवासी नजमा की बेटी आशमा 16 मई को आई रिपोर्ट में कोरोना होने की पुष्टि नहीं हुई थी। सिर्फ नजमा बेगम ही कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। नजमा के परिजन के बीते रोज हुए सैंपल की जांच में आशमा पॉजिटिव पाई गई हैं। इसके अलावा उनकी भाभी भी पॉजिटिव आई हैं। वायरोलॉजिकल लैब में शनिवार को 270 सैंपलों की जांच हुई जिसमें 6 पॉजिटिव तथा 264 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। शनिवार को 112 लोगों के सैंपल हुए। अबतक 10213 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें सेे 9919 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में भर्ती काेरोना संक्रमित 7 मरीजों को शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। अब तक जिले के 41 मरीज ठीक हो चुके हैं।

शहर के 90% संक्रमितों में बीमारी  के लक्षण नहीं, हर शख्स से खतरा
सैंपलिंग को लेकर इंडिय़न काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च द्वारा बनाई गई नई गाइडलाइन कोरोना संक्रमण को आमंत्रण देती दिख रही है। 19 मई से ग्वालियर में बाहर से आ रहे केवल उन्हीं लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं, जिनमें संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं। 18 मई को इस संबंध में आईसीएमआर ने गाइडलाइन जारी की थी। इस कारण पहले जहां जेएएच स्थित कोल्ड ओपीडी पहुंच रहे 60 फीसदी से अधिक लोगों की सैंपलिंग हो रही थी। वहीं अब ये संख्या घटकर आधी रह गई है। ग्वालियर की बात करें तो यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक हैं क्योंकि शहर में बाहर से आए जितने भी लोग कोरोना वायरस से संक्रमित निकले, उनमें से 90 फीसदी में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे। चूंकि, वह रेड जोन से आए थे, इस कारण कोल्ड ओपीडी में इलाज कर रहे डाक्टरों ने सावधानी बतौर उनके सैंपल कराए थे। लेकिन अब गाइडलाइन के अनुसार ही सैंपलिंग की जा रही है। नई गाइडलाइन के बाद जिला अस्पताल मुरार में 15 व 17 मई को एक भी सैंपल नहीं लिया गया। 16 को 4 जबकि 18 व 19 को 162-162 सैंपल लिए गए। जबकि 20 को 104 और 21 को 153 सैंपल लिए गए थे।

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