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  • 19471 Infected In 17 Days Of Corona Curfew, 4649 In First 15 Days; Chain Of Infection Not Broken In 14 Days

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भास्कर पड़ताल:कोरोना कर्फ्यू के 17 दिन में 19471 संक्रमित, पहले 15 दिन में थे 4649; 14 दिन में नहीं टूटी संक्रमण की चेन

ग्वालियर10 दिन पहलेलेखक: अंशुल वाजपेयी
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शनिवार रात 12 बजे...जेएएच स्थित कोल्ड ओपीडी में आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लगी कतार। - Dainik Bhaskar
शनिवार रात 12 बजे...जेएएच स्थित कोल्ड ओपीडी में आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लगी कतार।
  • 31 मार्च से 14 अप्रैल तक औसतन 310 केस मिले, कोरोना कर्फ्यू के 17 दिनों में आंकड़ा 1145 पर पहुंचा..अब इसकी समीक्षा की दरकार

शहर में कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन काे तोड़ने के लिए लगाया गया कर्फ्यू बेअसर साबित हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो 14 दिन में संक्रमण की चेन टूट जाती है, लेकिन ग्वालियर में कोरोना कर्फ्यू के 17 दिन बाद भी संक्रमण के मामले कम होने की बजाय बढ़ रहे हैं। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को राेकने के लिए शहर में 15 अप्रैल से कोरोना कर्फ्यू लगाया गया था। आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च से 14 अप्रैल के बीच 4649 केस मिले यानी रोजाना औसतन 310 नए संक्रमित सामने आए।

कोरोना कर्फ्यू लगने के बाद 15 अप्रैल से 1 मई के बीच कुल 19471 संक्रमित मिले यानी हर रोज औसतन 1145 लोग संक्रमण की चपेट में आए। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस अवधि में रिकवरी दर पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। 27 नवंबर 2020 को शहर में 107 पॉजिटिव केस मिले थे, इसके बाद से लेकर 30 मार्च तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब संक्रमितों की संख्या 100 के पार रही हो। 31 मार्च को 120 केस मिले थे। इसके बाद से ही शहर में कोरोना वायरस संक्रमण अनलॉक हो गया है। न केवल अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ी है, बल्कि इस दौरान मौतें भी ज्यादा हो रही हैं।

जानिए... इन कारणों से कर्फ्यू का नहीं दिख रहा असर

ट्रेन व हवाई यात्रा कर लौटे लोगों की सैंपलिंग नहीं- वार्ड- 29, 30, 58 व 60 में संक्रमण के काफी मामले सामने आए। वजह- इन क्षेत्रों के कई लोग दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई व अन्य शहरों में नौकरी करते हैं। ट्रेन व हवाई मार्ग से ये लोग आए, लेकिन इनकी जांच नहीं हुई। -रविनंदन तिवारी, इंसीडेंट कमांडेंट

कर्फ्यू में सख्ती नहीं- शहर में कोरोना कर्फ्यू के बाद भी लोग सड़कों पर घूम रहे हैं। जिन क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है, उनमें से अधिकांश में लोगों की आवाजाही हो रही है। कंटेनमेंट जोन में दुकान नहीं खोली जा सकती, इसके बाद भी दुकानें खुल रही हैं। -डॉ. एमएस राजावात, कंसलटेंट डब्ल्यूएचओ

निगरानी नहीं- होम आइसोलेट संक्रमितों की मॉनीटरिंग ठीक से नहीं हो रही है। ये लोग खुले में घूम रहे हैं। इनकी मॉनिटरिंग के लिए एक मोबाइल एप बनाया गया था, लेकिन वह कारगर नहीं है। हाल में कुछ कॉलोनियों के निवासियों ने ऐसी शिकायत दर्ज कराई हैं।
-महेश कुशवाह, इंसीडेंट कमांडेंट

इन 3 उपायों से कम होगा संक्रमण

  • सीटी स्केन सेंटरों की निगरानी: यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि कई लोग जांच के बाद कोविड टेस्ट न कराकर इलाज लेना शुरू कर देते हैं। ऐसे लाेग दूसरों को संक्रमित करते हैं।
  • कर्फ्यू में सख्ती : शहर में कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है, लेकिन इसका उतना असर नहीं दिख रहा। प्रशासन और पुलिस को कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराना चाहिए।
  • टेस्टिंग : जिस रफ्तार से संक्रमित मिल रहे हैं, जरूरत के अनुसार टेस्टिंग भी बढ़ानी चाहिए। जितनी जल्दी संक्रमण का पता लगेगा, उसे रोकने में उतनी ही सफलता मिलेगी।
  • जैसा डॉ. अशोक मिश्रा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन ने बताया

शहर में पॉजिटिविटी रेट 28% तक, जबकि गांवों में सिर्फ 9 फीसदी
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है। यहां अब तक सिर्फ 414 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनमें से 255 एक्टिव केस अभी हैं। जबकि 159 पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रिकवरी रेट शहर से काफी अच्छा अर्थात 38 फीसदी तक हैं। एक दिन पहले के आंकड़ाें के मुताबिक शहर में पॉजिटिविटी रेट 28.11 रही है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह सिर्फ 9 फीसदी। मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्र में शहर जैसी भीड़ न होना है।

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