शारदीय नवरात्र आज से:300 पंडाल सजेंगे, कॉलोनियों में होंगे गरबा के छोटे आयोजन

ग्वालियर11 दिन पहले
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तैयार हुईं देवी प्रतिमाएं। - Dainik Bhaskar
तैयार हुईं देवी प्रतिमाएं।
  • इस बार 8 दिन होगी देवी की आराधना

शारदीय नवरात्र का प्रारंभ गुरुवार को चित्रा नक्षत्र, कन्या राशि स्थित चंद्र में होगा। दुर्गा नवमी 14 अक्टूबर को होने के कारण नवरात्र इस वार 8 दिन के होंगे। शहर में 300 पंडालों में देवी प्रतिमा स्थापित की जाएंगी। ज्योतिषाचार्य पं. विजयभूषण वेदार्थी के अनुसार, प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ बुधवार शाम 4:34 बजे से हो गया।

यह तिथि दूसरे दिन गुरुवार को दोपहर 1:46 बजे तक रहेगी इसलिए प्रतिपदा गुरुवार के दिन सूर्योदय व्यापिनी होने के कारण शारदीय नवरात्र गुरुवार से प्रारंभ होंगे। इस बार तृतीया और चतुर्थी तिथि का योग शनिवार 9 अक्टूबर को होने और चतुर्थी तिथि का क्षय होने से नवरात्र आठ ही दिन मनाई जाएगी।

दुर्गा जी के नौ स्वरूपों की पूजा के अनुसार शनिवार के दिन मां चंद्रघंटा और मां कुष्माण्डा की पूजा एक साथ की जाएगी। नवरात्र में पिछले साल कोरोना के कारण गरबा महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था, इस बार भी कोई बड़ा आयोजन नहीं होगा, लेकिन कॉलोनी व सोसायटी में बच्चों के कार्यक्रमों के साथ गरबा करने की योजना बनाई गई है। वहीं जहां पंडाल स्थापित किए जा रहे हैं, वहां भंडारे कराने की योजना बनाई जा रही है। भंडारों का स्वरूप क्या होगा, इसे लेकर आयोजक योजना बना रहे हैं।

1. सांतऊ शीतला माता: ग्वालियर से 20 किमी दूर स्थित सांतऊ मंदिर की स्थापना 352 साल पहले 1669 में की गई थी। यहां रहने वाले गजाधर बाबा गायों को लेकर गोहद के खरौआ गांव के जंगल में जाते थे। वहां पर देवी का मंदिर स्थापित था। वह गायों की देखभाल के साथ देवी आराधना करते थे। उनकी सेवा और भक्ति से देवी सांतऊ गांव आईं।

2. नहर वाली माता : नाका चंद्रबदनी क्षेत्र में नहरवाली माता का मंदिर है। 250 साल पहले उनके ओझाराम भगत मां की प्रतिमा को नगरकोट से लाए थे और यहां पाटौर में स्थापित की थी। पाटौर के नजदीक ही नहर बहती थी इसलिए यह मंदिर नहरवाली माता के नाम से प्रचलित हो गया। मंदिर में बाघंबरी देवी की प्रतिमा स्थापित है।

3. पहाड्य वाली माता : नई सड़क पर पहाड्य वाली माता का मंदिर है। देवी की प्रतिमा राजस्थान के डीडवाना गांव से लाकर स्थापित की गई थी। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि राजस्थान के जिला नागौर के पास डीडवाना गांव है। यहां पर सेठ धन्नादास रहते थे। उन्हें देवी मैया ने प्रतिमा स्थापित करने का सपना दिया था। सेठ ने वैसा ही किया।

4. मांढ़रे की माता: आमखो पहाड़ी पर स्थापित मांढ़रे की माता का मंदिर हैं। माता की प्रतिमा को महाराष्ट्र के मांढर गांव से पुजारी अशोक राव मांढरे के पूर्वज आनंद राव मांढरे संवत 1930 में लाए थे। उन्हें माता ने यहां पर स्थापना के लिए सपना दिया था। तत्कालीन शासक जयाजीराव सिंधिया ने मंदिर की स्थापना के लिए जमीन दी थी। मंदिर के पास ही जयारोग्य अस्पताल स्थित है।

5. काली माता : ओल्ड हाईकोर्ट वाली गली स्थित मां काली का मंदिर 300 साल पुराना है। यह मंदिर मां काली हाई कोर्ट वाली के नाम से भी जाना जाता है। सन् 1725 में मां काली की प्रतिमा स्थापित की थी। इसके साथ ही इस मंदिर प्रांगण में हनुमान जी की भी प्रतिमा है। मान्यता है कि शनिवार के दिन मां काली के दर्शन करने से मनोकामना पूरी होती है।

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