• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • 561 Children Hit By Corona, They Got Infected But There Was No Chance Of Hospitalization, Defeated Corona From Home

खेलते कूदते निकल गया कोरोना...:कोरोना की चपेट आए 561 बच्चे, यह संक्रमित तो हुए पर हॉस्पिटल में भर्ती की नौबत नहीं आई, घर से ही दी कोरोना को मात

ग्वालियर7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले बच्चों की सैंपलिंग करते हुए - Dainik Bhaskar
रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले बच्चों की सैंपलिंग करते हुए
  • 3 से चार दिन में बच्चे हो रहे ठीक

कोरोना से जहां पूरा देश भयभीत है वहीं ग्वालियर के बच्चों ने खेलते कूदते इस वायरस को मात दे दी है। ग्वालियर में तीसरी लहर के बीच 24 दिन में 561 बच्चे संक्रमित मिले हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से किसी को भी हॉस्पिटल में भर्ती नहीं करना पड़ा है। इनमें 50 फीसदी बच्चे 3 से 4 दिन में घर पर खेलते कूदते ही ठीक हो गए हैं।

कुछ होम आइसोलेशन में हैं पर उनको भी कोई परेशानी नहीं है। डाक्टरों का कहना है कि राहत की बात यह है कि वायरस इस बार गले तक ही जा पा रहा है। गले में ही जाकर वायरस खत्म हो रहा है यदि यह गले से नीचे फेफडों पर असर डालता तो चिंता जनक हालत बन जाते। पर ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण बच्चे जल्दी कोरोना को मात दे रहे हैं।
ग्वालियर में कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा था, क्योंकि बच्चे 1 से 17 साल तक के बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी थी। इस कारण बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार, स्वास्थ्य विभाग व परिजन सभी चिंतित थे, लेकिन अभी तक 24 दिन में तीसरी लहर का जो ट्रेंड सामने आया है उसमें बच्चों ने कोरोना को मात दे दी है। 24 दिन में ग्वालियर में 1 से 17 साल के बीच के 561 बच्चे संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर 10 से 17 साल के बीच के हैं। यह वह हैं जो बच्चों से किशोर अवस्था में आ चुके हैं या आ रहे हैं। छोटे-छोटे कामों और स्कूल, कोचिंग के लिए इनका बाहर जाना होता है। पर राहत की बात यह है कि एक भी बच्चे को हॉस्पिटल में भर्ती करने की नौबत अभी तक नहीं आई है।
75 प्रतिशत को कोई लक्षण नहीं
- ग्वालियर में तीसरी लहर में अभी तक 561 बच्चे संक्रमित हुए हैं, लेकिन बात करें लक्षण की तो यहां बच्चों को कोई भी लक्षण नहीं है। JAH (जयारोग्य अस्पताल), जिला अस्पताल मुरार, सिविल अस्पताल हजीरा व निजी अस्पतालों की OPD में 1 से 17 साल उम्र के बच्चे भी पहुंच रहे हैं। इनमें से 75 फीसदी को कोई लक्षण नहीं है, सिर्फ 25 प्रतिशत बच्चों को सर्दी,जुकाम, खांसी व बुखार के लक्षण हैं। ऐसे बच्चों को डॉक्टर घर में ही आइसोलेट करने की एडवाइज दे रहे हैं।
बच्चों को भर्ती करने की जरुरत नहीं पड़ रही
- गजाराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर प्रोफेसर व बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय गौर का कहना है तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक बताई जा रही थी। बच्चे संक्रमित तो हो रहे हैं, लेकिन इनमें से किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। बच्चों की इम्यूनिटी पाॅवर अच्छी होने के कारण वह जल्दी ठीक हो रहे हैं।
आक्सीजन तो दूर, एक्सरा तक नहीं कराया
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके श्रीवास्तव का कहना है कि बच्चे बीमार तो पड़ रहे हैं, उन्हें तेज बुखार व कफ के साथ खांसी की शिकायत भी आ रही है। पर 25 प्रतिशत बच्चों में यह लक्षण आ रहे हैं। बच्चों को अस्पताल में भर्ती की नौबत नहीं आ रही है। अभी तक किसी भी बच्चे का सिटी स्कैन या एक्स-रे की जरुरत नहीं पड़ी है।
यह सावधानी भी रखें
- बच्चों में बीमारी के लक्षण आने पर तत्काल डॉक्टर के पास जाएं और परामर्श लें
- पेरेंट्स बिना परामर्श के बच्चों को कोई भी दवा नहीं दें, यह खतरनाक हो सकता है
- बच्चों को सर्दी से बचाएं, खुले मैदान में जाने से रोकें
- चेहरे पर मास्क जरूर लगाएं, सैनिटाइजर का उपयोग हमेशा करें
- बच्चों को सिखाएं सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें

ऐसे ठीक हो रहे हैं बच्चे
केस-1

- थाटीपुर कुम्हारपुरा निवासी 12 वर्षीय सोनल (बदला हुआ नाम) 14 जनवरी को कोविड पॉजिटिव आई थी। बच्ची को मामूली सर्दी, खांसी थी। डॉक्टर के परामर्श पर सैंपल कराया था। इसके बाद उसे होम आइसोलेशन में रखा गया। 19 जनवरी को बच्ची पूरी तरह स्वस्थ्य है और अब उसे कुछ नहीं है। उसने घर में खेलते कूदते ही वायरस को मात दे दी।
केस-2
- शहर के अनुपम नगर निवासी 11 वर्षीय सलोनी (बदला हुआ नाम) 14 जनवरी को संक्रमण की चपेट में आई थी। छात्रा परिजन के साथ बाहर से लौटी थी और उसे खांसी, बुखार था। इसके बाद जब उसकी सैंपलिंग कराई तो कोविड की पुष्टि हुई। कोई गंभीर लक्षण नहीं होने पर डॉक्टरों ने घर में ही आइसोलेट किया। इसके बाद 18 जनवरी तक वह पूरी तरह फिट हो गई है।