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ज्योतिष:59 साल बाद षडग्रही योग 9 को राजनीतिक उथल-पुथल संभव

ग्वालियर19 दिन पहले
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  • 1962 में 4 और 5 फरवरी को बना था अष्टग्रही योग

आकाशमंडल में 9 फरवरी की रात से षडग्रही योग बन रहा है। यह गोल योग भी कहलाता है। इस योग में मकर राशि में 6 ग्रह एक साथ मौजूद रहते हैं। इससे पहले 1962 में 4 और 5 फरवरी को अष्टग्रही योग बना था यानि 8 ग्रह एक साथ थे।

राहु अलग था क्योंकि राहु और केतु कभी एक साथ नहीं हो सकते हैं। इसलिए यह भी कहा जा सकता है कि 4 और 5 फरवरी 1962 को सभी ग्रह एक साथ मकर राशि में थे। इस योग में मौसम पर विपरीत असर पड़ेगा। इसके साथ ही बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की भी संभावना है।

ज्योतिषाचार्य पं. विजय भूषण वेदार्थी के अनुसार 4 फरवरी को रात 10.39 बजे बुध ग्रह वक्री होकर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं, यहां पर इनकी उपस्थिति 11 मार्च तक रहेगी। मकर राशि में पहले से ही गुरु, शुक्र, शनि, सूर्य स्थित हैं। बुध के पहुंचते ही पंचग्रही योग शुरू हो गया।

9 फरवरी को रात 8.29 बजे से 11 फरवरी सुबह 2.10 बजे तक चंद्र के मकर राशि में आ जाने से षडग्रही योग की उत्पत्ति होगी। सूर्य ग्रह का कुंभ राशि में प्रवेश 12 फरवरी सुबह 9.11 बजे होते ही पंचग्रही योग की समाप्ति हो जाएगी और मकर राशि में 4 ग्रह सूर्य, शुक्र, शनि,बुध रह जाएंगे। यह चतुर्ग्रही योग भी 21 फरवरी सुबह 2.22 बजे शुक्र के कुंभ में प्रवेश करते ही समाप्त हो जाएगा।

हानिप्रद रहेगा यह योग
खास बात यह भी है कि इस माघ चंद्रमास में 5 शुक्र एवं 5 शनिवार के साथ पंचग्रही योग, षडग्रही योग बन रहे हैं। इसके परिणाम हानिप्रद रहेंगे। किसी विशिष्ट व्यक्ति का निधन, उग्रवाद जन्य उपद्रव, प्राकृतिक आपदा से देश में कष्टप्रद स्थिति रहेगी। बहुमूल्य धातुओं में तेजी, खाद्य पदार्थों में मंदी के साथ बाजार में अस्थिरता रहेगी।

माघी गुप्त नवरात्र 12 से
श्री वेदार्थी के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शुक्रवार, 12 फरवरी से माघी गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो जाएगा। इस वर्ष यह नवरात्रि 10 दिन की होंगी, क्योंकि छठवीं तिथि की वृद्धि हुई है, यह तिथि 17 और 18 फरवरी को रहेगी। जिसके कारण 20 फरवरी शनिवार के दिन भीष्माष्टमी एवं 21 फरवरी रविवार को नवमीं का व्रत किया जाएगा।

नवरात्र में तिथि की वृद्धि को शुभ माना जाता है। मां भगवती की गुप्त रूप से आराधना करना जातक के मनवांछित फल की सिद्धि के लिए विशेष शुभ है। इन गुप्त नवरात्रों में बसंत पचंमी, सरस्वती जयंती का अबूझ मुहूर्त भी 16 फरवरी मंगलवार के दिन है।

इस अबूझ मुहूर्त में विवाह जैसे मांगलिक कार्य करना शास्त्र सम्मत माना गया है। परंतु बंसत पंचमी मंगलवार के दिन होने के कारण नूतन गृह निर्माण करना शुभ नहीं माना जाएगा। इसके उपरांत दूसरा अबूझ मुहूर्त 15 मार्च फुलैरा दूज के दिन होगा। इसमें भी विवाह जैसे शुभ मांगलिक कार्य किए जाएंगे। शुक्र, गुरु ग्रहों के अस्त होने के कारण 22 अप्रैल के बाद ही विवाह जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे।

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