पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • After Corona, Diabetes Is Above 300, Then The Risk Of Black Fungal Is More, 9 Patients Found In Two Days

नया संकट:कोरोना के बाद डायबिटीज 300 से ऊपर है तो ब्लैक फंगल का खतरा ज्यादा, दो दिन में 9 मरीज मिले

ग्वालियरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • 18 साल से अधिक आयु के 12% लोगों को डायबिटीज इसलिए ये बीमारी खतरनाक

कोरोना रोगियों को म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगल) का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले 39 दिन में जिले में इस बीमारी के 27 मरीज मिल चुके हैं। पहला मरीज 6 अप्रैल को मिला था। एक दिन पहले 24 घंंटे के भीतर 7 मरीज सामने आए थे। शनिवार को जेएएच में दो रोगी मिले। हालांकि अभी तक किसी मरीज की आंख निकालने की नौबत नहीं आई है लेकिन इसका खतरा उन मरीजों पर बढ़ रहा है, जो डायबिटीज (शुगर) के मरीज हैं। जेएएच में इसके लिए 10 बेड का वार्ड रिजर्व किया गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्वालियर में 18 साल से अधिक उम्र के 15 लाख 74 हजार 564 लोग हैं। इनमें से करीब 12 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। यह देखा गया है कि 20 से 30% लोग ऐसे हैं, जिन्हें शुगर नहीं थी या उन्हें इसका पता भी नहीं था। कोविड के दौरान जब उनकी जांच की गई तो उन्हें शुगर होने का पता चला।

जिस व्यक्ति का शुगर लेवल 300 से अधिक हो और उसे स्टेरॉयड दिए जा रहे हों तो ब्लैक फंगल होने का खतरा अधिक है। आईसीएमआर ने देशभर के 25 राज्यों में करीब सवा लाख लोगों पर सर्वे किया था। इसमें पाया कि ग्रामीणों के मुकाबले शहरी क्षेत्र के लोग अधिक संक्रमित हो रहे हैं। 7 से 9% ग्रामीण और 11 से 12% शहरी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।

इंफेक्शन से ऐसे बचें

  • कंस्ट्रक्शन साइट से दूर रहें, डस्ट वाले एरिया में न जाएं, गार्डनिंग या खेती करते वक्त फुल स्लीव्स से ग्लव्ज पहने, मास्क पहनें, उन जगहों पर जाने बचें जहां पानी का लीकेज हो।
  • जिन लोगों को कोरोना हो चुका है वह पॉजिटिव अप्रोच रखें। ठीक होने के बाद रेगुलर हेल्थ चेकअप कराते रहें।

दो बार शुगर की जांच कराएं
^डायबिटीज के रोगियों में ब्लैक फंगल होने का खतरा अधिक है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। अगर आप 18 साल से अधिक हैं और कोरोना संक्रमण हो चुका है और आप ठीक हो जाएं तो दो बार शुगर की जांच कराएं। -डॉ. नवनीत अग्रवाल, डायबिटीज रोग विशेषज्ञ

हर लक्षण को गंभीरता से लें
^कोरोना पीड़ित या ठीक हो चुके मरीज की अगर डायबिटीज अनियंत्रित है और आंख में लालिमा या सूजन आ रही है या फिर सिर में दर्द के एक तरफ सुन्नपन महसूस होने लगते या पलक नहीं घूमे या फिर आंख घूमना बंद कर दे तो इसे गंभीरता से लें यह ब्लैक फंगल हो सकता है।
- डॉ. पुरेंद्र भसीन, नेत्र रोग विशेषज्ञ

कोरोना संक्रमितों को देना पड़ रही खून पतला करने की दवा, हर पांचवें मरीज में ब्लीडिंग की शिकायत

कोरोना संक्रमण के कारण पीड़ित का खून गाढ़ा होने लगता है। इसे पता करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। इस कारण कुछ मरीजों को ब्लीडिंग होने की शिकायत है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के हर 10 में से 2 मरीजों में ब्लीडिंग होने की शिकायत आ रही है। चेस्ट फिजीशियन डॉ. उज्जवल शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण मरीज के फेफड़े पर असर डालता है।

साथ ही मरीज का खून गाढ़ा होने लगता है। अगर खून अधिक गाढ़ा हो जाएगा तो खून के धक्के जमने से हार्ट अटैक या ब्रेन अटैक की आशंका रहती है, इसलिए मरीज को खून पतला करने का इंजेक्शन या गोलियां दी जाती है। जिन मरीजों को यह दवा दी जाती है उनकी हर तीसरे दिन पीटीआईएनआर जांच कराई जाती है।

ब्लीडिंग होने के बाद हुई मौत

ग्वालियर निवासी 44 वर्षीय धर्मेंद्र को कोरोना के लक्षण थे। उन्होंने चेस्ट सीटी स्कैन कराने के बाद दवा ली। 5 दिन बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो वे निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। 4 दिन उन्हें ब्लीडिंग हुई और आखिर में उनकी इलाज के दाैरान मौत हो गई।

खबरें और भी हैं...