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ग्वालियर में एक माह में 58 आत्महत्या:मरने वालों में सबसे ज्यादा 30 से 50 वर्ष के बीच, 52% की वजह शराब और गृह क्लेश

ग्वालियर13 दिन पहलेलेखक: अमित मिश्रा
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  • 35 महिला और 23 पुरुषों ने छोटे-छोटे विवादों पर खत्म कर ली जिंदगी

शहर में एक माह के भीतर 58 लोगों ने आत्महत्या की, यानि औसतन हर दिन आत्महत्या की दो घटनाएं हो रही हैं। यह आंकड़ा, अन्य महीनों की तुलना में ज्यादा है। जनवरी में 41 और फरवरी में 35 लोगों ने खुदकुशी की थी। मरने वालों में सबसे ज्यादा वह लोग हैं, जिनकी उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच है। खुदकुशी करने वाले 48 में से 35 ऐसे लोग हैं, जिनकी उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच थी। इन लोगों की मौत की वजह बनी शराब की लत और गृह क्लेश। आत्महत्या के 52 प्रतिशत मामलों में मौत की वजह यही है। कुल 58 खुदकुशी करने वालों में 35 महिलाएं हैं और 23 पुरुष हैं।

7 मार्च से 7 अप्रैल के बीच शहर में हुई आत्महत्या की 58 घटनाओं का दैनिक भास्कर ने किया विश्लेषण

  • एक माह में 18 वर्ष से कम उम्र के 3 नाबालिगों ने खुदकुशी की। इसमें दो की मौत की वजह परिजनों की डांट थी। परिजनों ने छोटी-छोटी बात पर डांटा और बच्चों ने खुदकुशी कर ली।
  • 18 से 30 वर्ष के 14 लोगों ने खुदकुशी की। इसमें से प्रेम में असफल रहने पर दो लोगों ने खुदकुशी की। जबकि चार नवविवाहिता इसमें शामिल हैं, जिन्होंने दहेज प्रताड़ना और गृह क्लेश के चलते खुदकुशी की। अन्य लोगों ने अलग-अलग कारणों से खुदकुशी की।
  • 18 से 50 वर्ष के 35 लोगों ने खुदकुशी की। इसमें से सबसे ज्यादा 18 लोगों की मौत की वजह शराब और गृह क्लेश बनी। इस आयु वर्ग में खुदकुशी करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही।
  • 50 वर्ष से अधिक उम्र के 6 लोगों ने खुदकुशी की। इसमें बीमारी की वजह से 60 वर्ष से अधिक उम्र के दो बुजुर्गों ने खुदकुशी की। जबकि चार लोगों ने पारिवारिक कलह या परिजनों से विवाद की वजह से जान दी।

परेशान सदस्य की गतिविधियों पर नजर रखें
^आत्महत्या दो तरह की होती हैं। पहली अवस्था जिसमें व्यक्ति तत्काल किसी आवेश की वजह से ऐसा कदम उठाने की कोशिश करेगा। दूसरी अवस्था जिसमें व्यक्ति पहले से आत्महत्या की तैयारी करता है। ऐसा करने वाला बातों बातों में ऐसा इशारा भी करेगा कि वह जीवन से परेशान है। अगर ऐसी बात कोई करता है तो उसकी हर गतिविधि पर नजर रखना चाहिए। जब व्यक्ति हताश, असहाय, डिप्रेशन वाली स्थिति यानी ऐसा मानने लगे कि उसके जीवन का कोई मतलब नहीं है। तब स्थिति को भांपकर उसे मनोचिकित्सक के पास ले जा सकते हैं। इस तरह आत्महत्या को रोका जा सकता है। गर्मी में मस्तिष्क में सेरेटोनिन लेवल कम होता है तो इन दिनों खुदकुशी के विचार ज्यादा आते हैं।
-डॉ. कमलेश उदैनियां, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, जेएएच

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