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  • At Present 650 Saplings Are Planted In One Hectare, Up To 26000 Saplings Will Be Planted According To Japan's Method.

मियावाकी तकनीक:एक हेक्टेयर में अभी 650 पौधे लगते हैं, जापान की पद्धति से 26000 तक पौधे लगाए जाएंगे

ग्वालियर3 महीने पहले
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ग्वालियर में भी संभावना तालाशी जारी - Dainik Bhaskar
ग्वालियर में भी संभावना तालाशी जारी

अंचल में मियावाकी तकनीक से पहला जंगल दतिया की भूता नर्सरी में बनाने की तैयारी चल रही है। यह जंगल आधा हेक्टेयर में तैयार किया जाएगा। इस पद्धति से तैयार होने वाला यह ग्वालियर वृत का पहला जंगल होगा। इसमें अलग-अलग हाइट के हिसाब से पौधों को पास-पास लगाया जा सकता है।

ग्वालियर में भी इसकी संभावना तलाशी जा रही है। सामाजिक वानिकी वृत ग्वालियर के वन संरक्षक संजीव झा के मुताबिक मियावाकी तकनीक से दतिया में जंगल तैयार करने के लिए तैयारी शुरु कर दी है। ग्वालियर में भी संभावना तालाशी जा रही है।

ये है फायदा... खर्च कम, ऑक्सीजन ज्यादा

  • इस तकनीक की मदद से कम खर्च में जंगल तैयार किया जा सकता है।
  • अलग-अलग साइज के पौधे होने की वजह से यह एक दूसरे पर प्रभाव नहीं डालते और तेजी से जंगल बनता है।
  • इस तकनीक से जंगल विकसित करने के लिए लगाए गए पौधों की 3 साल तक देखभाल करनी होती है। उसके बाद यह ग्रोथ करते हैं।
  • जहां पर भी इस तरह के जंगल तैयार होते हैं वहां पर ऑक्सीजन काफी मात्रा में होती है। इसलिए इसको शहरी क्षेत्र के आसपास विकसित करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

यह है पौधे लगाने की पद्धति

मियावाकी पद्धति जापान की तकनीक है। इससे छोटी जगह में अधिक पौधों का घना जंगल विकसित किया जा सकता है। जहां पर एक हेक्टेयर में अभी लगभग 650 पौधे लग सकते हैं, वहीं इस तकनीक से एक हेक्टेयर पर 26 हजार तक पौधे लगाए जा सकते हैं। इससे वहां का प्रदूषण स्तर भी सही रहता है।