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यात्री बसों की जांच:ओवरलोडिंग और बिना परमिट वाली बसों को पहले जब्त किया परमिट निलंबित किए बिना छोड़ा, फिर सड़कों पर दौड़ने लगीं

ग्वालियर5 दिन पहलेलेखक: रामरूप महाजन
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19 फरवरी को जब्त बस के साथ परिवहन आयुक्त। - Dainik Bhaskar
19 फरवरी को जब्त बस के साथ परिवहन आयुक्त।
  • सवाल : ऐसी बसों से फिर हादसा हुआ तो क्या परिवहन विभाग जिम्मेदारी लेगा?

सीधी बस हादसे के बाद परिवहन विभाग के अफसर यात्री बसों की जांच के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन बिना परमिट और क्षमता से ज्यादा यात्रियों को ले जा रही बसों को सिर्फ जुर्माना या समझौता शुल्क लेकर छोड़ा जा रहा है। ये बसें फिर से सड़कों पर दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग का अमला ऐसी बसों के परमिट रद्द या निलंबित करने का अधिकार नहीं होने की बात कहकर सिर्फ चेकिंग का दिखावा कर रहा है।

जानकारों का कहना है कि यदि ऐसी बसों को तत्काल जब्त कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाए तो कोर्ट के आदेश के बिना वे सड़कों पर नहीं आ सकती। लेकिन परिवहन विभाग के अफसर सरकार का खजाना भरने के लिए सिर्फ जुर्माना वसूल कर बसों को छोड़ रहे हैं।

परिवहन आयुक्त ने जिस बस को पकड़ा, उसे भी छोड़ा: जिले में 5 दिन में परिवहन विभाग ने जिन 25 बसों को जब्त किया, उनमें से 4 बसों को जुर्माना वसूल कर छोड़ दिया। इनमें ग्वालियर से दिल्ली जा रही वह बस भी शामिल है, जिसे परिवहन आयुक्त मुकेश कुमार जैन ने 19 फरवरी को खुद पकड़ा था।

एक्ट में प्रावधान तो समझौता क्यों
परिवहन एक्ट में प्रावधान है कि ओवरलोडिंग और बिना परमिट वाली बसों को जब्त किया जाना चाहिए। ओवरलोडिंग वाली बस का परमिट एक माह से लेकर एक साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है, क्योंकि यह परमिट नियमाें के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। साथ ही क्षेत्रीय परिवहन अधिकार में सुनवाई होने तक ऐसी बसें जब्त रहेंगी। लेकिन यदि विभाग ने आरोपी ऑपरेटर से समझौता शुल्क ले लिया है तो फिर परमिट खत्म करने की कार्रवाई नहीं सकती।

कैसे मिलता है परमिट
बस का बीमा, फिटनेस होने के बाद परिवहन विभाग 3 माह के लिए अस्थायी और 5 साल के लिए स्थायी परमिट जारी करता है। यदि एक बार परमिट निलंबित होता है तो स्थायी परमिट लेने में दिक्कत आती है।

आमने-सामने- पूर्व व मौजूदा परिवहन आयुक्त के विचार अलग-अलग

ओवर लोडिंग बसों के परमिट तत्काल निलंबित करना चाहिए
ऐसी बसें जिन्हें परिवहन विभाग अधिक ओवरलोडिंग में जब्त कर रहा है, उनका तत्काल परमिट निलंबित करना चाहिए। क्याेंकि यह सीधे-सीधे परमिट नियमाें का उल्लंघन है। साथ ही बिना परमिट वाली जो बसें पकड़ी गई हैं, उन्हें तब तक नहीं छोड़ा जा सकता है, जब तक उनकी कमियां दूर नहीं हो जातीं। जिन बसों को जब्त किया जाता है, उनकी सुनवाई आरटीए कोर्ट में होती है। आरटीए सुनवाई के बाद कार्रवाई तय करता है।
-शैलेंद्र श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त परिवहन आयुक्त

सीधे परमिट खत्म करने की कार्रवाई नहीं कर सकते, नोटिस जारी करेंगे
अधिक ओवर लोडिंग और बिना परमिट जो बसें पकड़ी गईं हैं, उन पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। अब ऐसी बसों की परमिट खत्म करने की कार्रवाई होगी। इसके लिए पहले नोटिस जारी किए जाएंगे। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के समक्ष सुनवाई होगी। यह वैधानिक प्रक्रिया है। इसे पूरी करने के बाद परमिट खत्म करने की कार्रवाई होगी। विभाग सुनवाई किए बिना सीधे बस का परमिट निलंबित या रद्द नहीं कर सकता।
-मुकेश कुमार जैन, परिवहन आयुक्त

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