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हाईकोर्ट ने सरकार को दिया सुझाव:कहा- स्टेट फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री करें विचार, जिससे लोगों को समय समय पर सटीक न्याय मिले

ग्वालियरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

ग्वालियर हाईकोर्ट ने लोगों को जल्द न्याय दिलाने के लिए प्रदेश सरकार को सुझाव दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि मध्य प्रदेश में स्टेट फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री को विचार करें। साथ ही, इस संबंध में दिए गए आदेश की एक-एक कॉपी प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी विभाग, मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। हाईकोर्ट का मकसद लोगों को समय पर न्याय दिलाना है।

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने शुक्रवार को जमानत के एक मामले में आदेश में कहा कि कानून के शासन की अवधारणा में सुधार के लिए शासन को ऐसे कदम उठाने चाहिए कि जिससे आम आदमी को आसानी और शीघ्रता से न्याय मिल सके। कई बार लोगों को अपराध से संबंधित रिपोर्ट जैसे बैलेस्टिक साइंस रिपोर्ट, साइबर क्राइम से जुड़ी रिपोर्ट, हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की रिपेार्ट, केमिकल एक्जामिनेशन, खाद्य अपमिश्रण एवं अन्य मामलों में रिपोर्ट नहीं आने पर अनावश्यक रूप से कैद में रहना पड़ता है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस कार्य को संभालने के लिए राज्य में एक्सपर्ट की संख्या भी कम है, इसलिए जांचकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए ठोस प्रयास की आवश्यकता है। इन्हीं सभी परिस्थितियों को देखते हुए इस न्यायालय ने 22 जनवरी 2020 को प्रदेश में फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना का सुझाव दिया था। इस आदेश को दिए हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। न्यायालय ने कहा कि इस आदेश के बाद न्यायालय ने एक अन्य मामले में फिर इसी आदेश को दोहराया था।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि राज्य में राज्य फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए हाईकोर्ट मध्यप्रदेश की एरियर-कम-कोर्ट केस मैनेजमेंट कमेटी ने भी राष्ट्रीय या राज्य फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की सिफारिश की थी। जिससे कि प्रदेश में इस वजह से लंबित होने वाले प्रकरणों की संख्या में कमी हो सके।

न्यायालय ने कहा कि कोविड के कारण परेशानियां तो आई है इससे कई चुनौतियां भी सामने आईं हैं, लेकिन यह समय है इसे अवसर में बदलने का, जिससे कि व्यवस्थाएं और बेहतर हो सकें। नीति निर्धारकों को वर्तमान की साइबर अपराध की चुनौतियों को देखते हुए भी इस पर तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि राज्य में DNA रिपोर्ट तथा FSL रिपोर्ट के कारण कई मामले लंबित होने तथा इस कारण प्रकरणों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए न्यायालय ने अपने पूर्व के आदेश के अनुरूप इस पर कदम उठाने के लिए फिर से इस संबंध में निर्देश दिए हैं।

न्यायालय द्वारा इस उम्मीद के साथ फिर से निर्देश दिए जा रहे हैं कि कानून का शासन कायम करने तथा शीघ्र न्याय के लिए नीति निर्धारक इस दिशा में शीघ्र कदम उठाएंगे। न्यायालय ने यह आदेश आरोपी भारत जाटव के मामले में दिए हैं। आरोपी को 21 अगस्त 2018 को शिवपुरी जिले के बदरवास थाना पुलिस ने बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट के अपराध में गिरफ्तार किया है।

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