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  • Court Seeks Response From Chancellor And Principal Secretary On Allegations Of Irregularities, Violation Of Rights Of Executive Council On JU Vice Chancellor

हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस…:JU की कुलपति पर कार्य परिषद के अधिकारों के अतिक्रमण, अनियमितता के आरोप, कोर्ट ने कुलाधिपति व प्रमुख सचिव से मांगा जवाब

ग्वालियर3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • बढ़ सकती है JU की कुलपति की मुश्किलें

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। उन पर नियमों की अनदेखी करने, कार्यपरिषद के अधिकारों पर अतिक्रण, अनियमितता के आरोप में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। यह नोटिस कुलाधिपति (राज्यपाल) व प्रमुख सचिव को जारी किए गए हैं। यह सुनवाई सोमवार को हुई है।

जीवाजी विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यपरिषद सदस्य केपी सिंह ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि 3 फरवरी 2021 को JU (जीवाजी यूनिवर्सिटी) के कुलाधिपति को विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 14(3) के अंतर्गत एक अभ्यावेदन पेश किया था। यह एक अर्ध न्यायिक प्रक्रिया है। कुलाधिपति के पास अभ्यावेदन लंबित हुए काफी समय हो गया है, लेकिन उन्होंने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं है। राजभवन के अधिकारी भी कुलपति से मिले हुए हैं। इसलिए फैसला नहीं लिया जा रहा है। जीवाजी विश्वविद्याल में हुए भ्रष्टाचार के चलते कुलपति को उनके पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। छात्र हित इसी में है कि वह तत्काल अपने पद से हट जाएं या हटाया जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद इस मामले में कुलाधिपति (राज्यपाल) व प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में इस मसले पर चार सप्ता के अंदर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता संकल्प शर्मा ने की।

याचिकाकर्ता ने यह आरोप लगाए

- BSC नर्सिंग चतुर्थ वर्ष 2019 के फेल छात्रों को पास की मार्कशीट जारी की गई। इसमें कुलपति का सीधा हाथ है। खुद को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार बताते हुए परेशान किया जा रहा है।

- वर्ष 2010 व 2011 में बीपीएड की परीक्षाएं गलत तरीके से कराई गईं। अध्यादेश के खिलाफ जाकर कार्य किया।

- कुलपति ने यूनिवर्सिटी के अधिनियम व परिनियम का निष्ठापूर्वक पालन नहीं किया है। वह नियमों के पालन में असफल रही हैं।

- बीएड की परीक्षाओं के सेंटर बनाने में अनियमितता की गई है। 7 से 8 कॉलेज के सेंटर एक जगह ही बनाए गए।

- विश्वविद्याल में प्रतिवर्ष अतिथि विद्वानों की नियुक्ति होती है। इनकी नियुक्ति का अधिकार कार्य परिषद को दिया गया है, लेकिन इस अधिकार पर अतिक्रमण कर नियुक्तियां की हैं।

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