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जूडा की हड़ताल का 7वां दिन:7 दिन से डाॅक्टरों की कमी के कारण जेएएच में भर्ती मरीज कराने लगे छुट्टी

ग्वालियर8 दिन पहले
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जेएएच के एक वार्ड का दृश्य... यहां रविवार को मरीज कम होने के कारण कई पलंग खाली नजर आए।          फोटो: भास्कर - Dainik Bhaskar
जेएएच के एक वार्ड का दृश्य... यहां रविवार को मरीज कम होने के कारण कई पलंग खाली नजर आए। फोटो: भास्कर
  • भोपाल में बातचीत का दौर इसलिए नहीं किया प्रदर्शन

गजराराजा मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल सातवें दिन रविवार को भी जारी रही। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर अब जेएएच के वार्डों में भी पड़ने लगा है। यहां से मरीज या ताे छुट्टी करा रहे हैं या फिर खुद काे दूसरे अस्पताल के लिए रैफर कराने लगे हैं। इसके चलते जिन वार्डों में बेड फुल हुआ करते थे, अब वहां कई बेड खाली हाे गए हैं। रविवार को जेएएच के आईसीयू में भर्ती नरेश और शिव नामक दो मरीजों को उनके परिजन डिस्चार्ज करवाकर ले गए। नरेश को किडनी से संबंधित परेशानी है और शिव के ब्लड में इंफेक्शन जांच में आया है।

वहीं दोपहर 2 बजे केआरएच की तीसरी मंजिल पर एक भी डॉक्टर नहीं था। पेट में दर्द की शिकायत लेकर आए मरीज के परिजन काे नर्स ने यह कहकर इंतजार करने के लिए कहा कि डॉक्टर अभी नहीं हैं, थोड़ी देर इंतजार कर लो। वार्ड में भर्ती पुनिया देवी के पेट में दर्द था। अटेंडेंट का कहना था कि सुबह डॉक्टर देख गए। अब मरीज के पेट में दर्द हो रहा है और डॉक्टर नहीं हैं। तीसरी मंजिल में लिफ्ट की तरफ बने पर वार्डों में एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। रविवार का अवकाश होने के कारण ओपीडी पहले से ही बंद थी, इसलिए जो भी मरीज दिखाने आया वह कैजुअल्टी में आकर चला गया।

आईसीयू... यहां भर्ती 40 मरीजों को रविवार को एक ही डॉक्टर को देखना पड़ा

हालात... तीसरी मंजिल में लिफ्ट की तरफ बने वार्डों में एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा

ऐसा प्रबंधन... कम गंभीर मरीजों को दवा लिखकर किया जा रहा डिस्चार्ज

केआरएच से 48 घंटे में 8 मरीज किए गए डिस्चार्ज
हड़ताल के चलते जिन मरीजों का घर पर ही इलाज चल सकता है। ऐसे कम गंभीर मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा है। केआरएच में शनिवार की शाम से रविवार तक 8 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया। इन मरीजों को डॉक्टर दवाएं लिखकर कह रहे हैं कि वे इन दवाओं को सेवन करें और अगर कोई परेशानी आए तो वापस आ जाएं।

एक डॉक्टर पर 50 से अधिक मरीज की जिम्मेदारी
जूनियर डॉक्टर और सीनियर रेसीडेंट के हड़ताल पर जाने के कारण सीनियर डॉक्टरों पर मरीजों का लोड बढ़ गया है। ऐसे में एक-एक सीनियर डॉक्टरों के भरोसे 50 से अधिक मरीजों की जिम्मेदारी है। केआरएच में रविवार को डॉ. संजय धबले अकेले थे। उनकी निगरानी में 50 मरीज थे। आईसीयू के 40 मरीजों की जिम्मेदारी डॉ. अजय पाल सिंह पर थी। मरीज को देखने में समय लगता है, इस कारण मरीज परेशान हो रहे हैं।

हड़ताल खत्म होने के लिए हो सकता है समझौता
हड़ताली जूनियर डॉक्टराें ने रविवार को कोई विराेध प्रदर्शन नहीं किया, क्योंकि भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के साथ सेंट्रल जूडा के प्रतिनिधियों की बैठक में हड़ताल खत्म होने को लेकर समझौते की उम्मीद की जा रही थी। जूडा अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा का कहना है कि सरकार से हमारी बातचीत चल रही है। जल्द ही इसका कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा।

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