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स्वच्छता का हाल बेहाल:ईको ग्रीन कंपनी के 60 कचरा वाहन खराब, घर घर से कचरा लेने की व्यवस्था फिर से लड़खड़ाई

ग्वालियरएक महीने पहले
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एक तरफ मानसून का सीजन और दूसरी ओर काेराेना का संक्रमण। दाेहरी समस्या के बीच शहर में सफाई व्यवस्था एक बार फिर लड़खड़ा गई है। इस बार वजह ईको ग्रीन कंपनी की गाड़ियां। कंपनी के 60 कचरा वाहन तकनीकी खामी आने से बंद हो गए हैं। सेंसर पर आधारित इन वाहनों में बारिश का पानी जाने से ये चालू नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण कंपनी की गाड़ियां घरों तक कचरा लेने नहीं पहुुंच रही हैं। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन में खराब वाहनों को ठीक कराने के लिए टाटा मोटर्स को भेजा जाएगा। इन्हें ठीक होने में 10 दिन लगेंगे, तब तक लाेगाें काे परेशानी भुगतनी पड़ेगी। सोमवार को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए काॅलाेनी अाैर माेहल्लाें में गाड़ियां नहीं पहुंचने का मामला सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बना रहा। जिन इलाकाें में कचरा वाहन नहीं पहुंचे वहां शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने वाहन पहुंचाने का प्रयास किया। गाैरतलब है कि पिछले दिनों पूर्व पार्षद बृजेश गुप्ता ने निगम आयुक्त संदीप माकिन को पत्र लिखकर ईको ग्रीन कंपनी की कचरा गाड़ी नहीं आने की शिकायत की थी।

सिस्टम बिगड़ा... कई इलाकों में नहीं पहुंचे कचरा वाहन
सारे शहर में कचरा कलेक्शन का सिस्टम बिगड़ गया है, लेकिन सोमवार को जब कई इलाकों में गाड़ियां नहीं पहुंचीं तो लोगों ने सोशल मीडिया पर गुस्सा निकालते हुए ईको ग्रीन कंपनी और नगर निगम को कोसा। लोगों का कहना था कि कचरा गाड़ी नहीं आने से घरों में ही कचरा रखा हुआ है। हरीशंकरपुरम में रहने वालों का कहना है कि घर से कचरा नहीं लेने पर सड़कों पर पड़ा रहता है। यही स्थिति विनय नगर की बनी हुई है। वहां पर कचरा गाड़ी पिछले चार दिन से नहीं आई। गांधी नगर में रहने वाले आशीष द्विवेदी का कहना है कि दो महीने से कचरा गाड़ी दिखाई ही नहीं दी। माधव नगर में भी कचरा गाड़ी के नहीं पहुंचने से लोग परेशान हैं। इसी तरह द्वारिकापुरी कॉलोनी में कई दिन से कचरा वाहन नहीं पहुंच रहा है।

वाहनों की मॉनीटरिंग नहीं हो रही इसलिए आ रही है समस्या
नगर निगम ने सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है। सुबह 6 से शाम को 5 बजे तक यहां ईको ग्रीन कंपनी का स्टाफ बैठता है। उसकी जिम्मेदारी है कि जीपीएस आधारित वाहनों पर नजर रखी जाए। वे कहां जा रहे हैं और कितनी देर में लौट रहे हैं, यह जानकारी दर्ज की जाए, लेकिन यह सारी व्यवस्था चौपट है। नगर निगम के अफसर इस पर ध्यान देने को तैयार नहीं है। कंट्रोल रूम नंबर के पर अाने वाली शिकायताें काे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
कंपनी काे 15 दिन का अल्टीमेटम
नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त ने ईको ग्रीन कंपनी को 15 दिन का अल्टीमेटम दे रखा है। हाल में भाेपाल में अायाेजित बैठक में कंपनी के अफसराें से नगर निगम से उनके अनुबंध के अनुसार किए गए काम के बारे में जानकारी मांगी गई है। नगर निगम के अफसर कंपनी के काम से नाखुश है।
कंपनी का फॉल्ट है, हमने टाटा कंपनी से बात की है
टाटा के जिप वाहन सेंसर आधारित हैं। उनमें कहीं भी फॉल्ट आता है ताे कम्प्यूटर सिस्टम से खोजा जाता है। यह कंपनी का फॉल्ट हैं। हमने टाटा कंपनी में बात की है। एक-दो दिन में खराब पड़ी 60 जिप कचरा वाहनों को कंपनी में भेजकर ठीक कराया जाएगा।
-अभिषेक पांडे, प्रोजेक्ट मैनेजर ईको ग्रीन कंपनी

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