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गले मिलकर ईद की मुबारकबाद:ग्वालयिर में तीसरी लहर के आशंका के बीच मनाई ईद, मस्जिदों और ईदगाहों पर गाइलाइन के पालन के साथ नमाज अदा हुई

ग्वालियर2 महीने पहले
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ईद पर अस्पतालों में बांटा खाना, सादगी से मनाई ईद। - Dainik Bhaskar
ईद पर अस्पतालों में बांटा खाना, सादगी से मनाई ईद।
  • मस्जिदों में 50 लोगों ने एक साथ बैठकर अदा की नमाज
  • ईदगाहों में 6 लोगों की थी इजाजत

ग्वालियर में बुधवार को हर्षोल्लास और सादगी के साथ बकरीद मनाई गई। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच बकरीद पर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा की गई। मस्जिदों में 50-50 लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा की, जबकि ईदगाहों में 6 लोगों ने नमाज पढ़ी। इसके बाद कुर्बानी की रस्म अदा की गई। लोगों ने एक दूसरे को गले मिलकर ईद की बधाइयां दीं। तीन दिन तक चलने वाले बकरा ईद के पर्व में तीन दिनों तक कुर्बानियां दी जाएंगी।

कोविड के बीच सादगी से कुछ इस तरह एक दूसरे को ईद की बधाई दी।
कोविड के बीच सादगी से कुछ इस तरह एक दूसरे को ईद की बधाई दी।

इस्लाम धर्म के बड़े त्योहारों में शामिल बकरीद पर हजारों लोगों ने सुबह 8.30 बजे घरों, ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा की। बकरीद के ठीक दो दिन पहले ही गृह मंत्रालय से त्योहार को लेकर गाइडलाइन स्पष्ट की गई थी। मस्जिदों में 50-50 लोग प्रवेश कर नमाज अदा कर सकते थे, जबकि ईदगाहों में 5+1 मतलब 6 लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते थे। यही कारण था, लोगों ने कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए अपने घरों पर ईद की नमाज अदा की। एक-दूसरे को फोन पर या गले मिलकर बधाइयां दीं।

जीवाजीगंज में शहरकाजी ने अदा की नमाज

शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी ने बुधवार सुबह 8.30 बजे जीवाजीगंज मस्जिद में बकरीद की नमाज अदा की। साथ ही, सभी को ईद की बधाइयां दी। इस मौके पर उन्होंने संदेश में कहा कि ईद की नमाज को लेकर गृह मंत्रालय से जो गाइडलाइन आई है, सभी उसका पालन करें। त्योहार के साथ-साथ शहर के सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

यहां-यहां हुई नमाज

बुधवार को विभिन्न मस्जिद व ईदगाह में कोविड गाइडलाइन से नमाज अदा की गई। शहर में मोती मस्जिद में नमाज अदा की। साथ ही, मस्जिद हजरतजी दानाओली, मस्जिद काजमी गाढवे की गोठ , मस्जिद फर्राशखाना टोपी बाजार, मस्जिद बस स्टैंड मुरार, मस्जिद याहया खां आपागंज, मस्जिद दरगाह हजरत ख्वाजा खानून, मस्जिद रंगरेजान हुजरात का पुल लश्कर, मस्जिद उस्मानी गेंडेवाली सड़क, मस्जिद कुरैशियान नूरगंज, शाही जामा मस्जिद फोर्ट ग्वालियर, मस्जिद सुनहरी फालका बाजार, मस्जिद गाड़ीवालान ग्वालियर, मस्जिद एक मीनार आपागंज, मस्जिद दरगाह हजरत मेहराव शाह दाता, मस्जिद अकबरी शर्मा फार्म हाउस, मुस्जिद पुराना हाईकोर्ट, मस्जिद सिकंदर कंपू, मस्जिद हजरत मोहम्मद गौस की दरगाह हजीरा, मस्जिद जिन्नातों की रामाजी का पुरा, मस्जिद आसमानी नाकाचन्द्रवदनी गली नंबर एक लश्कर, मस्जिद नालबंदों की तारागंज लश्कर आदि पर नमाज अदा की गई।

कुर्बानी के किए जाते हैं तीन हिस्से

बकरीद पर लोग बकरों की कुर्बानी देते हैं, कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा अहबाब (रिश्तेदारों) के लिए और तीसरा हिस्सा घर में उपयोग के लिए रखा जाता है। वहीं, बकरे की खाल को मस्जिदों को दान कर दिया जाता है।

इसलिए दी जाती है कुर्बानी

पैगम्बर हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह ने आदेश दिया कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कर दें। पैगम्बर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी दी, लेकिन जब उन्होंने अपनी आंखें खोली तो उनका बेटा सामने खेल रहा था, जबकि उनके बेटे के स्थान पर बकरा आ गया, जिसकी कुर्बानी अल्लाह ने कुबूल की थी। तभी से बकरीद पर बकरे की कुर्बानी की रस्म शुरू हुई।

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